कोरोना से जंग में ढह गई मजहब की दीवारें, पैदल चल रहे लोगों की मदद के लिए साथ आए हिंदू-मुस्लिम
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बागपत के ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस वे पर प्रवासियों का रैला उमड़ रहा है। पूर्वांचल के जिलों में अपने अपने घरों तक पहुंचने की जद्दोजहद दिख रही। हर चेहरे पर बेचैनी हैं। सुकून है तो बस इतना कि पश्चिम उत्तर प्रदेश के हिंदु और मुसलमान मजहब की दीवारें तोड़कर मदद के लिए साथ खड़े हो गए हैं। जिसकी जो जरूरत है, पूरी की जा रही है। रोटी, दूध, पानी, फल और नाश्ते के पैकेट बांटे जा रहे हैं।
एक्सप्रेस-वे मवी कलां इंटरचेंज पर हरियाणा की ओर से पूर्वांचल के कानपुर, इलाहाबाद, एटा, औरेया, झांसी, कन्नौज, सीतापुर समेत अन्य जिलों के लोग गुजर रहे हैं। इनकी मदद के लिए जिले के लोग खड़े हैं।
रटौल के पूर्व प्रधान जुनैद फरीदी के नेतृत्व में मुस्लिम समाज के लोगों ने खाने के पैकेट बांटे। खेकड़ा के नवाब अंसारी मोहसिन अंसारी, जावेद अंसारी, मेहरबान, शकील जमील, मोनू, इमरान, नदीम और आशु ने फल बांटे। बच्चों के लिए दूध की व्यवस्था की। सफर की थकान से परेशान पूर्वांचल के लोगों के लिए सड़क पर खड़े लोग राहत की फुहारें लेकर आएं।

बागपत के ईस्टर्न पेरीफेरल एक्सप्रेस-वे पर मजदूरों के लिए खाना बनाते खेकड़ा के मुस्लिम युवक।- फोटो : BAGHPAT
वाहन रुकवाकर किए रवाना
ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस वे पर मवी कलां इंटरचेंज पर पुलिस-प्रशासन के अधिकारी भी मौजूद रहे। यहां से गुजर रहे इक्का दुक्का वाहनों को रुकवाकर लोगों को उनमें बैठाकर रवाना किया।
फैक्टरी से निकाला, जेब खाली
सीतापुर निवासी प्रदीप कुमार ने बताया कि वह पानीपत से आए हैं। लॉकडाउन के बाद फैक्टरी मालिकों ने उन्हें निकाल दिया। रुपये भी नहीं दिए, उनकी जेब खाली है। इस कारण वह पैदल ही घरों की तरफ जा रहे हैं।
बच्चों पर भारी पड़ रहा सफर
जिंदगी की जद्दोजहद का सफर बच्चों पर भारी पड़ रहा है। मासूम बच्चों को लेकर परिवार के लोग पैदल ही मंजिल की ओर बढ़ रहे हैं।