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प्राकृत भाषा की दुर्लभ पांडुलिपियों होगा पॉलिश भाषा में अनुवाद
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बड़ौत के शहजाद राय शोध संस्थान में पोलैंड के शोधार्थी को संग्रहित दुर्लभ एवं प्राचीन पांडुलिपिय
- फोटो : BARAUT
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बड़ौत स्थित शहजाद राय शोध संस्थान पहुंचे पोलैंड के शोधार्थी
पोलैंड विश्वविद्यालय की ओर से प्रकाशित करने की कार्य योजना तैयार
संवाद न्यूज एजेंसी
बड़ौत (बागपत)। शहजाद राय शोध संस्थान में रविवार को पोलैंड के शोधार्थी दुर्लभ प्राकृत भाषा की पांडुलिपियां देखने के लिए पहुंचे। संस्थान निदेशक ने उन्हें यहां संग्रहीत दुर्लभ एवं प्राचीन पांडुलिपियों की जानकारी दी। विचार विमर्श के बाद प्राकृत भाषा की पांडुलिपियों का पॉलिश भाषा में अनुवाद करने का कार्य शुरू हुआ। अनुवाद के बाद पोलैंड विश्वविद्यालय की ओर से इन पांडुलिपियों को प्रकाशित किया जाएगा।
इतिहासकार डॉ. अमित राय जैन ने बताया कि पोलैंड के डॉक्टर फिलिप वर्ष 2019 में भी अन्य प्राध्यापकों के साथ संस्थान में आ चुके हैं। उस समय भी महाभारत पर चल रहे शोध कार्य के संबंध में उन्होंने यहां संग्रहीत आंकड़े जुटाए थे। अब पोलैंड विश्वविद्यालय के अंतर्गत डॉक्टर फिलिप ने एक कार्य योजना तैयार की है। इसमें शहजाद राय शोध संस्थान में संग्रहीत दुर्लभ प्राचीन प्राकृत भाषा की पांडुलिपियों का पॉलिश भाषा में अनुवाद और प्रकाशन का महत्वपूर्ण कार्य किया जाएगा। सबसे पहले संस्कृत भाषा में रचित भक्तांबर स्तोत्र एवं तत्वार्थ सूत्र के पोलैंड की राजकीय भाषा में अनुवाद करने की योजना बनाई गई है, जिसके लिए दुर्लभ पांडुलिपियों की स्कैन कॉपी इस कार्य के लिए प्रदान कर दी गई।
दिल्ली विश्वविद्यालय में दिल्ली कॉलेज ऑफ आर्ट के प्राध्यापक डॉ महेंद्र नाथ ने भी शोधार्थियों को शीघ्र ही बड़ौत के शहजाद राय शोध संस्थान लाने की इच्छा जाहिर की। इस अवसर पर शहजाद राय केला देवी जयंती स्मृति न्यास के अध्यक्ष सुरेश चंद जैन ने शोधार्थियों का स्वागत अभिनंदन साहित्य भेंट कर किया।
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पोलैंड विश्वविद्यालय की ओर से प्रकाशित करने की कार्य योजना तैयार
संवाद न्यूज एजेंसी
बड़ौत (बागपत)। शहजाद राय शोध संस्थान में रविवार को पोलैंड के शोधार्थी दुर्लभ प्राकृत भाषा की पांडुलिपियां देखने के लिए पहुंचे। संस्थान निदेशक ने उन्हें यहां संग्रहीत दुर्लभ एवं प्राचीन पांडुलिपियों की जानकारी दी। विचार विमर्श के बाद प्राकृत भाषा की पांडुलिपियों का पॉलिश भाषा में अनुवाद करने का कार्य शुरू हुआ। अनुवाद के बाद पोलैंड विश्वविद्यालय की ओर से इन पांडुलिपियों को प्रकाशित किया जाएगा।
इतिहासकार डॉ. अमित राय जैन ने बताया कि पोलैंड के डॉक्टर फिलिप वर्ष 2019 में भी अन्य प्राध्यापकों के साथ संस्थान में आ चुके हैं। उस समय भी महाभारत पर चल रहे शोध कार्य के संबंध में उन्होंने यहां संग्रहीत आंकड़े जुटाए थे। अब पोलैंड विश्वविद्यालय के अंतर्गत डॉक्टर फिलिप ने एक कार्य योजना तैयार की है। इसमें शहजाद राय शोध संस्थान में संग्रहीत दुर्लभ प्राचीन प्राकृत भाषा की पांडुलिपियों का पॉलिश भाषा में अनुवाद और प्रकाशन का महत्वपूर्ण कार्य किया जाएगा। सबसे पहले संस्कृत भाषा में रचित भक्तांबर स्तोत्र एवं तत्वार्थ सूत्र के पोलैंड की राजकीय भाषा में अनुवाद करने की योजना बनाई गई है, जिसके लिए दुर्लभ पांडुलिपियों की स्कैन कॉपी इस कार्य के लिए प्रदान कर दी गई।
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दिल्ली विश्वविद्यालय में दिल्ली कॉलेज ऑफ आर्ट के प्राध्यापक डॉ महेंद्र नाथ ने भी शोधार्थियों को शीघ्र ही बड़ौत के शहजाद राय शोध संस्थान लाने की इच्छा जाहिर की। इस अवसर पर शहजाद राय केला देवी जयंती स्मृति न्यास के अध्यक्ष सुरेश चंद जैन ने शोधार्थियों का स्वागत अभिनंदन साहित्य भेंट कर किया।
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