{"_id":"5de1602d8ebc3e54b909fd1f","slug":"rape-case-to-3-year-old-child-baghpat-news-mrt4561929144","type":"story","status":"publish","title_hn":"बच्ची से दुष्कर्म मामले में पांच दिन में सुनवाई पूरी, आज आ सकता है फैसला","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बच्ची से दुष्कर्म मामले में पांच दिन में सुनवाई पूरी, आज आ सकता है फैसला
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बच्ची से दुष्कर्म मामले में पांच दिन में सुनवाई पूरी, आज आ सकता है फैसला
बागपत। तीन साल की मासूम चचेरी बहन से दुष्कर्म के मामले में रिकॉर्ड पांच दिन में सुनवाई पूरी हो गई। आज फैसला सुनाया जा सकता है। अगर ऐसा होता है, तो यह देश का पहला मामला होगा, जिसमें छह दिन में फैसला आ गया। इससे पहले पॉक्सो एक्ट के मामले मेें औरेया की अदालत ने नौ दिन में फैसला सुनाया था।
छपरौली थाना क्षेत्र के एक गांव में 13 सितंबर को तीन साल की बच्ची को उसका चचेरा भाई नमकीन दिलाने के बहाने घर से ले गया था। युवक ने जंगल में ले जाकर बच्ची से दुष्कर्म किया था। पुलिस ने आरोपी को दिल्ली से 29 अक्तूबर को गिरफ्तार किया और 30 अक्तूबर को जेल भेजा था। विवेचक छपरौली थानाध्यक्ष दिनेश कुमार चिकारा ने 15 नवंबर को अदालत में चार्जशीट दाखिल की। एडीजे प्रथम विशेष न्यायाधीश पॉक्सो अधिनियम शैलेंद्र पांडेय की कोर्ट में 25 नवंबर को आरोप तय किए। डीजीसी सुनील कुमार और एडीजीसी राजीव कुमार ने बताया कि केस की रोजाना सुनवाई हुई। 29 नवंबर को पांच दिन में केस की सुनवाई पूरी हो गई। अब शनिवार को कोर्ट का फैसला आने की पूरी उम्मीद है। चार्ज फ्रेम होने के बाद सिर्फ छह दिन में फैसला सुनाए जाने का यह पहला मामला हो सकता है।
हां... यही है गंदा आदमी
इस मामले में कुल आठ गवाह पेश किए गए। पीड़ित बच्ची के जब बयान लिए गए, उसने रोते हुए कहा कि अंकल यही है वो गंदा आदमी। इस मामले की सुनवाई के दौरान पुलिस ने पीड़ित परिवार को पूरी सुरक्षा दी। एसपी प्रताप गोपेंद्र यादव ने खुद इस मामले की मॉनिटरिंग की।
विज्ञापन
मां बोली, फांसी पर चढ़ा दो, तभी मिलेगा सुकून
छपरौली थाना क्षेत्र के जिस गांव में वारदात हुई, उसके ग्रामीण भी बेहद दुखी हैं। ग्रामीण बताते हैं कि उस दिन मासूम घर में खिलौने से खेल रही थी। मां-बाप घर में चिनाई के कार्य में व्यस्त थे। तभी 25 साल का आरोपी चचेरा भाई पहुंचा। कुछ देर घर पर रहा और बच्ची को अपने साथ ले जाकर दुष्कर्म किया। बच्ची की हालत बहुत खराब हो गई थी। उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया, तब जाकर उसकी जान बची। पीड़िता की मां बताती हैं कि जब डॉक्टर ने उन्हें बेटी के साथ गलत काम होने की बात बताई, तो उन्हें एक बार तो यकीन ही नहीं हुआ। बच्ची नर्सरी में पढ़ती है। उसके स्कूल की शिक्षिकाओं ने भी उसे संभालने में मदद की। आंखों में आंसू लिए मां बोलीं कि ऐसे दरिंदे को फांसी की सजा होनी चाहिए, तभी उन्हें सुकून मिलेगा।
एक या दो नहीं, 300 मामले
पॉक्सो एक्ट के प्रकरणों की सुनवाई के लिए विदेश अदालत बनाई गई है। यहां कुल 300 प्रकरण चल रहे हैं। इनमें 12 साल से कम उम्र की दुष्कर्म पीड़िताओं की संख्या 28 है।
ढाबे पर नौकरी, दिल्ली से हत्थे चढ़ा
एसओ छपरौली दिनेश कुमार ने बताया कि वारदात के बाद आरोपी ने मवी कलां क्षेत्र में एक ढाबे पर नौकरी की। इसके बाद दिल्ली में अपने पुराने ठिकाने पर पहुंच गया। वह नशे का आदी है। लोगों से उधार रुपये लेकर गायब हो जाता था। आरोपी दिल्ली की मजदूर मंडी से पुलिस के हत्थे चढ़ा। यहां अधिकतर नशा करने वाले घूमते हैं।
विज्ञापन
बागपत। तीन साल की मासूम चचेरी बहन से दुष्कर्म के मामले में रिकॉर्ड पांच दिन में सुनवाई पूरी हो गई। आज फैसला सुनाया जा सकता है। अगर ऐसा होता है, तो यह देश का पहला मामला होगा, जिसमें छह दिन में फैसला आ गया। इससे पहले पॉक्सो एक्ट के मामले मेें औरेया की अदालत ने नौ दिन में फैसला सुनाया था।
छपरौली थाना क्षेत्र के एक गांव में 13 सितंबर को तीन साल की बच्ची को उसका चचेरा भाई नमकीन दिलाने के बहाने घर से ले गया था। युवक ने जंगल में ले जाकर बच्ची से दुष्कर्म किया था। पुलिस ने आरोपी को दिल्ली से 29 अक्तूबर को गिरफ्तार किया और 30 अक्तूबर को जेल भेजा था। विवेचक छपरौली थानाध्यक्ष दिनेश कुमार चिकारा ने 15 नवंबर को अदालत में चार्जशीट दाखिल की। एडीजे प्रथम विशेष न्यायाधीश पॉक्सो अधिनियम शैलेंद्र पांडेय की कोर्ट में 25 नवंबर को आरोप तय किए। डीजीसी सुनील कुमार और एडीजीसी राजीव कुमार ने बताया कि केस की रोजाना सुनवाई हुई। 29 नवंबर को पांच दिन में केस की सुनवाई पूरी हो गई। अब शनिवार को कोर्ट का फैसला आने की पूरी उम्मीद है। चार्ज फ्रेम होने के बाद सिर्फ छह दिन में फैसला सुनाए जाने का यह पहला मामला हो सकता है।
विज्ञापन
हां... यही है गंदा आदमी
इस मामले में कुल आठ गवाह पेश किए गए। पीड़ित बच्ची के जब बयान लिए गए, उसने रोते हुए कहा कि अंकल यही है वो गंदा आदमी। इस मामले की सुनवाई के दौरान पुलिस ने पीड़ित परिवार को पूरी सुरक्षा दी। एसपी प्रताप गोपेंद्र यादव ने खुद इस मामले की मॉनिटरिंग की।
विज्ञापन
मां बोली, फांसी पर चढ़ा दो, तभी मिलेगा सुकून
छपरौली थाना क्षेत्र के जिस गांव में वारदात हुई, उसके ग्रामीण भी बेहद दुखी हैं। ग्रामीण बताते हैं कि उस दिन मासूम घर में खिलौने से खेल रही थी। मां-बाप घर में चिनाई के कार्य में व्यस्त थे। तभी 25 साल का आरोपी चचेरा भाई पहुंचा। कुछ देर घर पर रहा और बच्ची को अपने साथ ले जाकर दुष्कर्म किया। बच्ची की हालत बहुत खराब हो गई थी। उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया, तब जाकर उसकी जान बची। पीड़िता की मां बताती हैं कि जब डॉक्टर ने उन्हें बेटी के साथ गलत काम होने की बात बताई, तो उन्हें एक बार तो यकीन ही नहीं हुआ। बच्ची नर्सरी में पढ़ती है। उसके स्कूल की शिक्षिकाओं ने भी उसे संभालने में मदद की। आंखों में आंसू लिए मां बोलीं कि ऐसे दरिंदे को फांसी की सजा होनी चाहिए, तभी उन्हें सुकून मिलेगा।
एक या दो नहीं, 300 मामले
पॉक्सो एक्ट के प्रकरणों की सुनवाई के लिए विदेश अदालत बनाई गई है। यहां कुल 300 प्रकरण चल रहे हैं। इनमें 12 साल से कम उम्र की दुष्कर्म पीड़िताओं की संख्या 28 है।
ढाबे पर नौकरी, दिल्ली से हत्थे चढ़ा
एसओ छपरौली दिनेश कुमार ने बताया कि वारदात के बाद आरोपी ने मवी कलां क्षेत्र में एक ढाबे पर नौकरी की। इसके बाद दिल्ली में अपने पुराने ठिकाने पर पहुंच गया। वह नशे का आदी है। लोगों से उधार रुपये लेकर गायब हो जाता था। आरोपी दिल्ली की मजदूर मंडी से पुलिस के हत्थे चढ़ा। यहां अधिकतर नशा करने वाले घूमते हैं।