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कई लाख भाइयों की कलाई पर सजेगी वहीदन के घर बनीं राखियां

Thu, 30 Jul 2020 10:36 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Thu, 30 Jul 2020 10:36 PM IST
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Rakhi made in Waheedan's house will be decorated on the wrist of several lakh brothers
सिंघावली अहीर गांव में राखी बनाते हुए - फोटो : BAGHPAT
अमर उजाला ब्यूरो
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बागपत। तीज-त्योहार सभी धर्म के लोगों को आपस में जोड़कर भाईचारे का संदेश देते हैं। रक्षा बंधन पर भी बामनौली गांव से हिंदू और मुस्लिम एकता की अनूठी मिसाल का संदेश दिया गया है। मुस्लिम महिला वहीदन ने इस्लाम नाम से स्वयं सहायता समूह बनाकर आत्मनिर्भरता की ओर कदम बढ़ाए हैं। रक्षा बंधन पर वहीदन के घर कई लाख राखी तैयार हो चुकी हैं। दिल्ली से देश के विभिन्न हिस्सों में यह राखी भाइयों की कलाई पर सजेंगी।
बामनौली गांव की वहीदन ने एनआरएलएम के माध्यम से एक जनवरी 2017 को स्वयं सहायता समूह बनाया था। वह बताती हैं कि आत्मनिर्भरता के लिए ग्रुप बनाया गया। काम शुरू हुआ, धीरे-धीरे उन्हें लाभ भी हुआ। मुश्किल जरूर हुई क्योंकि लॉकडाउन में तैयार किया माल सप्लाई नहीं हो सका, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। रक्षा बंधन के लिए उनके ग्रुप ने राखी और धागे बनाए हैं। अलग-अलग डिजाइन की राखी बनाई गई हैं। उनके माल की सप्लाई दिल्ली में होती है। इस बार खूब मांग रही। कई लाख राखी वह अब तक दिल्ली भेज चुकी हैं। आमतौर पर उनके ग्रुप की ओर से प्रति सप्ताह करीब ढाई से तीन हजार राखी भेजी जाती हैं। रोजाना काम चल रहा है।
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सिंघावली में भी राखी बना रहीं हैं मुस्लिम महिलाएं
सिंघावली अहीर गांव में बाबा मोहन राम स्वयं सहायता समूह चलाने वाली महेंद्री कहती हैं कि उनके ग्रुप में भी कई मुस्लिम महिलाएं आत्मीयता के साथ राखी बना रही हैं। राखी का त्योहार सबको एकसूत्र में बांधने का त्योहार है।
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वर्जन :
एनआरएलएम के उपायुक्त ब्रजभूषण का कहना है कि वहीदन के ग्रुप ने कई लाख राखियां बनाई हैं। यह बेहद अच्छी पहल है। जिले की महिलाएं आत्मनिर्भरता की ओर कदम बढ़ा रही हैं। स्वयं सहायता समूहों की मदद से सैकड़ों महिलाओं को आत्मनिर्भरता के अवसर मिले हैं।
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