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मंदिर की भूमि पर बना दिया पानी की टंकी का प्रस्ताव
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बागपत। बिजरौल गांव में पानी की टंकी के निर्माण के लिए वाल्मीकि मंदिर की भूमि का प्रस्ताव बनाकर भेज दिया गया। समाज के लोगों ने इस पर रोष जताते हुए डीएम से शिकायत की है। आरोप लगाया कि मंदिर की भूमि को बंजर दर्शाकर यहां पानी की टंकी का निर्माण करने के लिए प्रस्ताव भेजा है। शिकायत पर एसडीएम बड़ौत ने जांच बैठा दी है।
राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने कृष्णा और हिंडन नदी के किनारे बसे गांवों में हर हाल में शुद्ध पानी मुहैया कराने के लिए निर्देशित किया हुआ है। पाइप पेयजल योजना लागू कर ओवरहेड टैंक बनाकर गांवों में शुद्ध पानी पहुंचाना है। कई गांवों ऐसे है जहां भूमि न मिलने के कारण योजना अटकी हुई है। इनमें से एक गांव बिजरौल है। सवा दो करोड़ रुपये की परियोजना स्वीकृत है। भूमि न मिलने की वजह से योजना अधर में लटकी हुई है। ग्राम प्रधान प्रभा देवी की ओर से एक बंजर भूमि का प्रस्ताव टंकी निर्माण के लिए भेजा है। अब इस भूमि को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। वाल्मीकि समाज ने प्रस्तावित भूमि को मंदिर की होने दावा करते हुए डीएम से शिकायत की है। बताया कि मंदिर की चारदीवारी है। भूमि में ही श्मशान, माता का मंदिर, बारात घर, दो साधुओं की समाधि, साधुओं का धूनी वाला कमरा है। आरोप लगाया कि उक्त भूमि को ग्राम प्रधान ने बंजर दिखाकर पानी की टंकी का प्रस्ताव भेजा है। दावा किया यह भूमि उनके पूर्वजों की है, जो उन्हें विरासत में मिली हुई है। धार्मिक भावनाओं के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। इस प्रस्ताव पर रोक लगाई जाए। बिजेंद्र, बेबी, राजू, किशन, चंपा, सचिन, रमेश, वेदपाल, कृष्ण, शुभम, कविता, देव, कुनाल आदि ने इस मामले की जांच कराकर कार्रवाई की मांग की है।
एसडीएम बड़ौत दुर्गेश मिश्रा ने बताया कि वाल्मीकि समाज के लोगों की शिकायत के बाद जांच बैठा दी गई है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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बंजर भूमि का ही भेजा गया है प्रस्ताव
बागपत। बिजरौल ग्राम की प्रधान प्रभा देवी के प्रतिनिधि रविंद्र सिंह ने बताया कि कृष्णा नदी के निकट गांव पड़ता है। गांव का पानी दूषित है। पानी की टंकी गांव के लिए स्वीकृत है। जो भूमि चिह्नित की गई है, वह बंजर भूमि है। इसका प्रस्ताव बनाकर भेजा गया है। उनका निजी स्वार्थ नहीं है, पानी की टंकी का निर्माण होने से गांव के हर व्यक्ति को लाभ मिलेगा। भूमि के सभी अभिलेखों में यह बंजर भूमि दर्ज है।
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राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने कृष्णा और हिंडन नदी के किनारे बसे गांवों में हर हाल में शुद्ध पानी मुहैया कराने के लिए निर्देशित किया हुआ है। पाइप पेयजल योजना लागू कर ओवरहेड टैंक बनाकर गांवों में शुद्ध पानी पहुंचाना है। कई गांवों ऐसे है जहां भूमि न मिलने के कारण योजना अटकी हुई है। इनमें से एक गांव बिजरौल है। सवा दो करोड़ रुपये की परियोजना स्वीकृत है। भूमि न मिलने की वजह से योजना अधर में लटकी हुई है। ग्राम प्रधान प्रभा देवी की ओर से एक बंजर भूमि का प्रस्ताव टंकी निर्माण के लिए भेजा है। अब इस भूमि को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। वाल्मीकि समाज ने प्रस्तावित भूमि को मंदिर की होने दावा करते हुए डीएम से शिकायत की है। बताया कि मंदिर की चारदीवारी है। भूमि में ही श्मशान, माता का मंदिर, बारात घर, दो साधुओं की समाधि, साधुओं का धूनी वाला कमरा है। आरोप लगाया कि उक्त भूमि को ग्राम प्रधान ने बंजर दिखाकर पानी की टंकी का प्रस्ताव भेजा है। दावा किया यह भूमि उनके पूर्वजों की है, जो उन्हें विरासत में मिली हुई है। धार्मिक भावनाओं के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। इस प्रस्ताव पर रोक लगाई जाए। बिजेंद्र, बेबी, राजू, किशन, चंपा, सचिन, रमेश, वेदपाल, कृष्ण, शुभम, कविता, देव, कुनाल आदि ने इस मामले की जांच कराकर कार्रवाई की मांग की है।
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एसडीएम बड़ौत दुर्गेश मिश्रा ने बताया कि वाल्मीकि समाज के लोगों की शिकायत के बाद जांच बैठा दी गई है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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बंजर भूमि का ही भेजा गया है प्रस्ताव
बागपत। बिजरौल ग्राम की प्रधान प्रभा देवी के प्रतिनिधि रविंद्र सिंह ने बताया कि कृष्णा नदी के निकट गांव पड़ता है। गांव का पानी दूषित है। पानी की टंकी गांव के लिए स्वीकृत है। जो भूमि चिह्नित की गई है, वह बंजर भूमि है। इसका प्रस्ताव बनाकर भेजा गया है। उनका निजी स्वार्थ नहीं है, पानी की टंकी का निर्माण होने से गांव के हर व्यक्ति को लाभ मिलेगा। भूमि के सभी अभिलेखों में यह बंजर भूमि दर्ज है।