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आधी रात तक भुगतान में उलझे रहे प्रधान और सचिव

Fri, 25 Dec 2020 11:53 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Fri, 25 Dec 2020 11:53 PM IST
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Principal and Secretary were stuck in payment till midnight
- ग्राम पंचायतों में कराए गए विकास कार्यों का किया गया भुगतान
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- देर रात तक चलती रही भुगतान की प्रक्रिया, शनिवार से नियुक्त होंगे प्रशासक
अमर उजाला ब्यूरो
बागपत। कार्यकाल के आखिरी दिन ग्राम प्रधान और सचिव देर रात तक भुगतान में उलझे रहे। आखिरी दिन करोड़ों रुपये का भुगतान किया गया। वित्तीय अधिकार खत्म किए जाने से पहले ग्राम पंचायतों में कराए गए कार्यों का हिसाब लगाया जाता रहा। ग्राम सचिव के साथ मिलकर लंबित भुगतान के मामले निपटाए गए। दिसंबर माह में 14वें वित्त में 75.82 करोड़, 15वें वित्त से 22.40 करोड़ और पांचवें वित्त 11.18 करोड़ की धनराशि जिले को मिली थी।
प्रधानों का कार्यकाल शुक्रवार आधी रात के समय पूरा हो गया। शनिवार से ग्राम पंचायतों में प्रशासक नियुक्त कर दिए गए हैं। कार्यकाल पूरा होने से पहले दिनभर ग्राम पंचायतों में कराए गए विकास कार्यों के भुगतान के लिए दिनभर प्रक्रिया चलती रही। शुक्रवार को देर रात तक प्रधान और सचिव अपनी-अपनी ग्राम पंचायतों का लंबित भुगतान करने में जुट रहे। जिलेभर में करोड़ों रुपये का भुगतान किया गया है। बागपत और खेकड़ा ब्लॉक की बीडीओ स्मृति अवस्थी ने बताया कि शनिवार से ग्राम पंचायतों में प्रशासक नियुक्त किए जाएंगे।
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बढ़ना चाहिए था कार्यकाल : रामपाल धामा
बागपत। पंचायत राज संगठन के जिलाध्यक्ष रामपाल प्रधान का कहना है कि चुनाव होने तक प्रधानों का कार्यकाल बढ़ाया जाना चाहिए था। प्रशासक नियुक्त जरूर किए गए हैं, लेकिन इससे ग्राम पंचायतों के विकास पर ब्रेक लग जाएगा।
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रटौल बन गई नगर पंचायत
बागपत। रटौल के लिए इस बार प्रधानी का आखिरी चुनाव साबित हुआ। शासन ने रटौल को नगर पंचायत का दर्जा दे दिया है। अब यहां पर प्रधानी के चुनाव के बजाए चेयरमैन का चुनाव होगा।

कब्जामुक्त नहीं हो सकी ग्राम पंचायतों की जमीन
बागपत। गुराना गांव के प्रधान रणधीर सिंह का कहना है कि डिजीटल सिग्नेर की वजह से इस बार काम समय पर पूरे नहीं हो पाए। स्कूलों के सौंदर्यकरण का कार्य लटका रहा। तालाब की सफाई नहीं हो पाई। ग्राम पंचायतों की जमीनें कब्जामुक्त नहीं हो सकी।
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