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बाढ़ से निपटने की तैयारी, 13 ठोकरों का निर्माण
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बागपत। मानसून ने दस्तक दे दी है। रोजाना आसमान में बादल उमड़ घुमड़ रहे हैं। बरसात के मौसम में यमुना नदी का जलस्तर बढ़ जाता है। हथिनी कुंड बैराज से भी पानी छोड़ा जाता है। जिले में गांव और फसलों को बाढ़ से बचाने के लिए 13 ठोकरों का निर्माण किया। बाढ़ नियंत्रण के लिए खेड़ा इस्लामपुर व खेड़ा हटाना में ठोकरों का निर्माण पूरा नहीं कराया।
जिले के कई गांव यमुना के किनारे बसे हैं। बरसात आने पर यमुना का जलस्तर बढ़ने से किसानों की हजारों बीघा फसल पानी में बह जाती है। बाढ़ नियंत्रण के लिए खेड़ा हटाना और खेड़ा इस्लामपुर गांव में टक्कर बनाने का कार्य चल रहा है। बाढ़ नियंत्रण नोडल अधिकारी संजीव कुमार ने कहा बाढ़ नियंत्रण के लिए सीमेंट की बोरियों और बल्ली का स्टॉक जमा कर लिया। इसके अलावा खेड़ा हटाना और खेड़ा इस्लामपुर में 13 ठोकरों का निर्माण कराया जा रहा है। कटान होने पर सीमेंट की बोरियों में मिट्टी भरकर और बल्ली लगाकर कटान को रोका जाता है।
इन गांवों में रहता है बाढ़ का खतरा
बागपत। खेड़ा हटाना, खेड़ा इस्लामपुर, बदरखा, कोताना, टांडा, निवाड़ा, सिसाना, बागपत पुराना कस्बा, पाली, काठा, मवी कलां आदि गांवों में बरसात के मौसम में बाढ़ का खतरा बढ़ जाता है।
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जिले के कई गांव यमुना के किनारे बसे हैं। बरसात आने पर यमुना का जलस्तर बढ़ने से किसानों की हजारों बीघा फसल पानी में बह जाती है। बाढ़ नियंत्रण के लिए खेड़ा हटाना और खेड़ा इस्लामपुर गांव में टक्कर बनाने का कार्य चल रहा है। बाढ़ नियंत्रण नोडल अधिकारी संजीव कुमार ने कहा बाढ़ नियंत्रण के लिए सीमेंट की बोरियों और बल्ली का स्टॉक जमा कर लिया। इसके अलावा खेड़ा हटाना और खेड़ा इस्लामपुर में 13 ठोकरों का निर्माण कराया जा रहा है। कटान होने पर सीमेंट की बोरियों में मिट्टी भरकर और बल्ली लगाकर कटान को रोका जाता है।
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इन गांवों में रहता है बाढ़ का खतरा
बागपत। खेड़ा हटाना, खेड़ा इस्लामपुर, बदरखा, कोताना, टांडा, निवाड़ा, सिसाना, बागपत पुराना कस्बा, पाली, काठा, मवी कलां आदि गांवों में बरसात के मौसम में बाढ़ का खतरा बढ़ जाता है।
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