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स्कूल-कॉलेजों में शुरू हुई ऑनलाइन पढ़ाई की तैयारी
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बड़ौत। कोविड की दूसरी लहर में विद्यार्थियों का भविष्य संवारने के लिए स्कूल-कॉलेजों में ऑनलाइन पढ़ाई की तैयारी शुरू हो गई है। एक बार फिर ग्रुपों से जोड़ कर जूम एप और वीडियो के जरिए छात्र-छात्राओं को पढ़ाने की कवायद होगी। एंड्रायड फोन की कमी और कमजोर नेटवर्क गांव-देहात में पढ़ाई में बाधक बनेगा। शहरों को छोड़ दे तो ऑनलाइन शिक्षा प्रणाली में देहात के कम ही विद्यार्थी कामयाब हो पाते हैं। शासकीय फरमान के बाद स्कूल प्रबंधन विद्यार्थियों के लिए ऑनलाइन पढ़ाई का मसौदा तैयार करने में जुट गया है। हालांकि, नए सत्र में प्रवेश नहीं होने से स्कूलों में सुचारु रूप से पढ़ाई होने में व्यावहारिक दिक्कत आना बताया जा रहा है।
बोले शिक्षाविद
एंड्रायड फोन की किल्लत बनती है बाधा
- श्रीराम शिक्षा मंदिर इंटर कॉलेज के डायरेक्टर उपेन्द्र चौधरी ने बताया कि पहले की तरह इस बार भी कॉलेज के शिक्षक ऑनलाइन पढ़ाई को तैयार हैं। शिक्षकों ने ग्रुप बनाकर छात्र-छात्राओं को जोड़ रखा है। कुछ ऐसे भी विद्यार्थी हैं जिनके पास फोन नहीं हैं वह अपने साथियों की मदद से पढ़ते हैं। इस बार ग्रामीण अंचल में संक्रमण बढ़ा है। ऐसे में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।
कमजोर नेटवर्क बनता है परेशानी का सबब
- इंडियन इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य विजयानंद का कहना है कि गांवों में ऑनलाइन पढ़ाई में बच्चों को दिक्कत आती है। हर अभिभावकों की सामर्थ्य मोबाइल फोन रिचार्ज कराने की नहीं है। यही वजह है काफी बच्चे माकूल पढ़ाई से वंचित रह जाते हैं।
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- डीआईओएस सर्वेश कुमार का कहना है कि शासन के नए आदेश का अनुपालन शुरू करा दिया गया है। ग्रामीण क्षेत्र में 75-80 फीसदी बच्चे ही ऑनलाइन क्लास से जुड़ पाते है। ऐसे बच्चों को पीडीएफ फाइल भेजी जाती है।
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बोले शिक्षाविद
एंड्रायड फोन की किल्लत बनती है बाधा
- श्रीराम शिक्षा मंदिर इंटर कॉलेज के डायरेक्टर उपेन्द्र चौधरी ने बताया कि पहले की तरह इस बार भी कॉलेज के शिक्षक ऑनलाइन पढ़ाई को तैयार हैं। शिक्षकों ने ग्रुप बनाकर छात्र-छात्राओं को जोड़ रखा है। कुछ ऐसे भी विद्यार्थी हैं जिनके पास फोन नहीं हैं वह अपने साथियों की मदद से पढ़ते हैं। इस बार ग्रामीण अंचल में संक्रमण बढ़ा है। ऐसे में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।
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कमजोर नेटवर्क बनता है परेशानी का सबब
- इंडियन इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य विजयानंद का कहना है कि गांवों में ऑनलाइन पढ़ाई में बच्चों को दिक्कत आती है। हर अभिभावकों की सामर्थ्य मोबाइल फोन रिचार्ज कराने की नहीं है। यही वजह है काफी बच्चे माकूल पढ़ाई से वंचित रह जाते हैं।
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- डीआईओएस सर्वेश कुमार का कहना है कि शासन के नए आदेश का अनुपालन शुरू करा दिया गया है। ग्रामीण क्षेत्र में 75-80 फीसदी बच्चे ही ऑनलाइन क्लास से जुड़ पाते है। ऐसे बच्चों को पीडीएफ फाइल भेजी जाती है।