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धमकी और खून-खराबे की जड़ में जिला पंचायत की सियासत

Mon, 27 Jul 2020 12:06 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Mon, 27 Jul 2020 12:06 AM IST
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Politics of district panchayat at the root of threats and bloodshed
परमवीर तुगाना की हत्या के बाद विधायक योगेश धामा को धमकी का मामला
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- कुख्यात सुनील राठी अपनी मां राजबाला चौधरी और परिवार सदस्यों को चुनाव लड़ाने की तैयारी में
- बागपत विधायक योगेश धामा की पत्नी है वर्तमान में जिला पंचायत अध्यक्ष
- बसी गांव के रहने वाले सीओ जितेंद्र सरगम भी पत्नी को चुनाव लड़ाने की तैयारी में
अमर उजाला ब्यूरो
बागपत। भले ही सूबे में जिला पंचायत चुनाव का एलान नहीं हुआ हो, लेकिन जिले में धमकियों और खून-खराबे का सिलसिला शुरू हो गया है। जिला पंचायत सदस्य का चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे परमवीर तुगाना की हत्या हो चुकी है और आरोप सुनील राठी गैंग पर लगा है। बागपत के भाजपा विधायक योगेश धामा भी सुनील राठी से जान का खतरा बता चुके हैं। दरअसल, कुख्यात सुनील राठी की नजर भी जिला पंचायत अध्यक्ष कुर्सी पर है और वह अपने परिवार और समर्थकों को चुनाव लड़ानी की तैयारी में कर रहा है।
जिला पंचायत के चुनाव से जिले का माहौल पूरी तरह गरम है। तिहाड़ जेल में बंद सुनील राठी और बागपत के भाजपा विधायक योगेश धामा के बीच बदरखा गांव के खनन पट्टे को लेकर बात बिगडनी शुरू हुई थी। विधायक ने सीएम योगी आदित्यनाथ से मिलकर सुरक्षा को खतरा बताया है। लेकिन इसकी पीछे और भी वजह हैं। विधायक योगेश धामा का परिवार लंबे समय से जिला पंचायत की कुर्सी पर काबिज है। वर्तमान में उनकी पत्नी रेणू धामा जिला पंचायत अध्यक्ष हैं। चौगामा क्षेत्र के वार्ड संख्या एक, दो और तीन को योगेश धामा की सबसे बड़ी ताकत माना जाता रहा है। वह खुद वार्ड एक, रेणू धामा वार्ड दो और विधायक की भाभी वार्ड तीन से सदस्य चुने गए थे। सुनील राठी ने अपनी मां राजबाल चौधरी और परिवार के अन्य सदस्यों को इन्हीं वार्ड से चुनाव लड़ाने की तैयारी की है। ऐसे में इन वार्ड का चुनाव हॉट बन गया है।
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छपरौली क्षेत्र के कूड़ी गांव में परमवीर तुगाना की हत्या कर दी गई। वारदात का खुलासा हुआ तो वजह जिला पंचायत चुनाव और सुनील राठी का नाम सामने आया। सुनील राठी के मामा कूड़ी गांव में है। जिस वार्ड से परमवीर तुगाना और उसका भाई चुनाव लड़ने की तैयारी में जुटे थे, उसी वार्ड से राठी ने अपने ममेरे भाई और रोबिन हलालपुर को चुनाव लड़ाने की तैयारी कर रखी थी। चुनाव को लेकर यहां से खून-खराबा शुरू हुआ तो दावेदार सहम गए। धर्मेंद्र किरठल का नाम भी जिला पंचायत चुनाव को लेकर बार बार सुर्खियों में आता रहता है।
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इस बार चुनाव में यह भी नाम
बागपत। खेकड़ा के बसी गांव के रहने वाले सीओ जितेंद्र सरगम इस बार अपनी पत्नी वंदना को चुनाव लड़ाने की तैयारी में जुटे हैं। छपरौली विधायक सहेंद्र सिंह रमाला की पत्नी के समर्थन में भी जिला पंचायत चुनाव का प्रचार किया गया। पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष ओमकार यादव, सदस्य अभयवीर यादव, दीपक यादव समेत अन्य कईं नाम शामिल हैं।
राठी के परिवार का सियासत से नाता
बागपत। सुनील राठी के परिवार का सियासत से पुराना नाता है। राठी के पिता स्वर्गीय नरेश राठी दो बार टीकरी के चेयरमैन रहे। तीन बार राजबाला चौधरी चेयरपर्सन रही हैं। साल 2017 का विधानसभा चुनाव भी राजबाला चौधरी ने बसपा के टिकट पर लड़ा, लेकिन वह हार गई थी। पिछला नगर पंचायत का चुनाव भी राजबाला चौधरी हार गई थी। इस बार जिला पंचायत चुनाव की तैयारी में यह परिवार जुटा है। राठी के परिवार के सदस्यों ने चुनाव लडने के लिए अलग-अलग गांव में वोट बनवाने की तैयारी की है।
खनन को लेकर शुरू हुई थी धामा और राठी में अदावत
बागपत। ईंट भट्ठा कारोबारी देशपाल खोखर की हत्या के बाद फिर से बदरखा खनन पट्टे की गूंज लखनऊ तक हो गई है। विधायक योगेश धामा की शिकायत के बाद ही पट्टे की जांच कराई गई, जिसमें अवैध खनन साबित हुआ था। पट्टा छोड़े जाने के बाद से ही ग्रामीण विरोध कर रहे थे। पंचायतों और शिकायतों का दौर चला। लखनऊ तक गूंज हुई। पट्टा निरस्त होने के बाद रास्ता दिए जाने के विवाद में रालोद नेता देशपाल खोखर की हत्या कर दी गई थी।
बदरखा खनन पट्टे को लेकर ग्रामीण शुरूआत से विरोध कर रहे थे। पंचायतों का दौर चला। गांव में फायरिंग भी हुई थी। खनन पट्टा पहली बार लखनऊ की सुर्खियों में तब आया जब भाजपा विधायक योगेश धामा ने 18 फरवरी को सीएम योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर बदरखा में खनन पट्टे की आड़ में अवैध खनन का आरोप लगाया था। चिट्ठी में प्रशासन पर भी आरोप लगाए गए थे। जांच बैठी तो अवैध खनन पकड़ा गया था। शासन से स्वीकृत पट्टे में अवैध खनन, रॉयल्टी और जुर्माने की करीब चार करोड़ 43 लाख रुपये की धनराशि जमा नहीं किए जाने पर पट्टा निरस्त कर दिया गया था। यही नहीं ठेकेदार को दो साल के लिए ब्लैक लिस्ट किया जा चुका है। खनन पट्टे की अवधि 21 फरवरी 2018 से 20 फरवरी 2023 तक थी। ग्रामीण लगातार विरोध कर रहे थे।

19 मार्च को खुलकर सामने आया सुनील राठी
बागपत। पूर्वांचल के डॉन मुन्ना बजरंगी की हत्या के आरोपी सुनील राठी को 19 मार्च को पेशी पर लाया गया था। राठी ने बदरखा के खनन पट्टे को रिश्तेदार का बताया था। यह भी कहा था कि न्यायालय में वह जुर्माने को चुनौती देंगे। राठी ने कहा था कि राजनीतिक दबाव में खनन पट्टे की गलत जांच कर गलत जुर्माना लगाया गया है, न्यायालय में चुनौती देंगे। दोबारा जांच में दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा।
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