{"_id":"627fe01eb22143300a0498c8","slug":"police-is-cherishing-the-deteriorating-relations-baraut-news-mrt5886013193","type":"story","status":"publish","title_hn":"दरकते रिश्तों को संजो रही पुलिस","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
दरकते रिश्तों को संजो रही पुलिस
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
संवाद न्यूज एजेंसी
बड़ौत। परिवार रिश्तों की मजबूत डोर है। इसमें सुरक्षा के वादे और इरादे होते हैं। रिश्ते की गरिमा बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है। इसके जरिए पुलिस सात जन्मों के दरकते रिश्तों को संजोने में जुटी है। पुलिस ने बीते एक साल में 1150 लोगों का घर टूटने से बचाया है। हालांकि 270 परिवारों के झगड़े अभी विचाराधीन हैं।
कहीं पति पर भरोसा नहीं, कहीं सास-ससुर से दूर पति के साथ रहने की जिद, बेरोजगारी, नशा, दहेज उत्पीड़न आदि समेत अन्य कारणों से हंसते-खेलते परिवार टूट रहे हैं। पुलिस के अनुसार एक साल में 1420 मामले आए हैं। ये टूटने की दहलीज पर थे। पुलिस ने 1150 परिवारों को टूटने से बचाया है।
खत्म हो रहे संयुक्त परिवार
संयुक्त परिवार खत्म होते जा रहे हैं। बच्चे बड़े होकर अलग रहना चाहते हैं। माता-पिता भी बच्चों को परदेस में परिवार के साथ भेज देते हैं। इसका मुख्य कारण भौतिकवाद व लालन पालन में कमी है। रविवार को विश्व परिवार दिवस है। संयुक्त परिवारों को बचाने के लिए 15 मई 1994 से विश्व परिवार दिवस मनाया जा रहा है। इसका मकसद नैतिक संस्कार विकसित करना तथा परिवार को बिखराव से बचाना है।
विज्ञापन
टूटने की यह भी वजह
पति-पत्नी को लगता है कि वे एकल परिवार में बच्चों की बेहतर परवरिश कर पाएंगे। वे भूल जाते हैं कि संयुक्त परिवार में रहकर संस्कार के साथ बच्चों को लालन-पालन अच्छा कर पाएंगे। एकल परिवार का नतीजा है कि बच्चों का पूर्ण रूप से सामाजिक एवं मानसिक विकास नहीं हो पाता है।
270 परिवारों का विवाद भी जल्द निपटाएंगे
महिला थानाध्यक्ष साक्षी सिंह के अनुसार एक साल में 1150 परिवारों को टूटने से बचाया है। हालांकि अभी 270 परिवारों का झगड़ा विचाराधीन है। जल्द ही इनका भी समाधान कराया जाएगा।
नजीर हैं धन सिंह का संयुक्त परिवार
चौधरी धन सिंह व कैलाशी देवी का संयुक्त परिवार नजीर है। धन सिंह व कैलाशी देवी के परिवार में छह बेटे वेदपाल सिंह, ओमवीर सिंह, सत्यपाल सिंह, प्रवीण तोमर, राजवीर, जयवीर, उनकी पत्नियां व बच्चे एक साथ रहते हैं। पुत्र सत्यपाल का कहना है कि सभी सुख-दुख में एकदूसरे की सलाह से काम करते हैं। छोटे-छोटे विवादों को गंभीरता से नहीं लेते हैं। उन्हें समझदारी से सुलझा लेते हैं।
विज्ञापन
बड़ौत। परिवार रिश्तों की मजबूत डोर है। इसमें सुरक्षा के वादे और इरादे होते हैं। रिश्ते की गरिमा बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है। इसके जरिए पुलिस सात जन्मों के दरकते रिश्तों को संजोने में जुटी है। पुलिस ने बीते एक साल में 1150 लोगों का घर टूटने से बचाया है। हालांकि 270 परिवारों के झगड़े अभी विचाराधीन हैं।
कहीं पति पर भरोसा नहीं, कहीं सास-ससुर से दूर पति के साथ रहने की जिद, बेरोजगारी, नशा, दहेज उत्पीड़न आदि समेत अन्य कारणों से हंसते-खेलते परिवार टूट रहे हैं। पुलिस के अनुसार एक साल में 1420 मामले आए हैं। ये टूटने की दहलीज पर थे। पुलिस ने 1150 परिवारों को टूटने से बचाया है।
विज्ञापन
खत्म हो रहे संयुक्त परिवार
संयुक्त परिवार खत्म होते जा रहे हैं। बच्चे बड़े होकर अलग रहना चाहते हैं। माता-पिता भी बच्चों को परदेस में परिवार के साथ भेज देते हैं। इसका मुख्य कारण भौतिकवाद व लालन पालन में कमी है। रविवार को विश्व परिवार दिवस है। संयुक्त परिवारों को बचाने के लिए 15 मई 1994 से विश्व परिवार दिवस मनाया जा रहा है। इसका मकसद नैतिक संस्कार विकसित करना तथा परिवार को बिखराव से बचाना है।
विज्ञापन
टूटने की यह भी वजह
पति-पत्नी को लगता है कि वे एकल परिवार में बच्चों की बेहतर परवरिश कर पाएंगे। वे भूल जाते हैं कि संयुक्त परिवार में रहकर संस्कार के साथ बच्चों को लालन-पालन अच्छा कर पाएंगे। एकल परिवार का नतीजा है कि बच्चों का पूर्ण रूप से सामाजिक एवं मानसिक विकास नहीं हो पाता है।
270 परिवारों का विवाद भी जल्द निपटाएंगे
महिला थानाध्यक्ष साक्षी सिंह के अनुसार एक साल में 1150 परिवारों को टूटने से बचाया है। हालांकि अभी 270 परिवारों का झगड़ा विचाराधीन है। जल्द ही इनका भी समाधान कराया जाएगा।
नजीर हैं धन सिंह का संयुक्त परिवार
चौधरी धन सिंह व कैलाशी देवी का संयुक्त परिवार नजीर है। धन सिंह व कैलाशी देवी के परिवार में छह बेटे वेदपाल सिंह, ओमवीर सिंह, सत्यपाल सिंह, प्रवीण तोमर, राजवीर, जयवीर, उनकी पत्नियां व बच्चे एक साथ रहते हैं। पुत्र सत्यपाल का कहना है कि सभी सुख-दुख में एकदूसरे की सलाह से काम करते हैं। छोटे-छोटे विवादों को गंभीरता से नहीं लेते हैं। उन्हें समझदारी से सुलझा लेते हैं।