{"_id":"57d470de4f1c1b94213177ca","slug":"pavage-road-say-not-highway","type":"story","status":"publish","title_hn":"हाईवे नहीं, खड़ंजे वाला रोड बोलिए","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
हाईवे नहीं, खड़ंजे वाला रोड बोलिए
ब्यूरो/अमर उजाला, बागपत
Updated Sun, 11 Sep 2016 02:21 AM IST
विज्ञापन
दिल्ली-सहारनपुर हाईवे स्थित गौरीपुर जवाहरनगर में जर्जर मार्ग से गुजरते वाहन।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
दिल्ली-यमुनौत्री हाईवे के दिन बहुरते नजर नहीं आ रहे है। सरकारों में बैठे नेता और मंत्री इसका ठिकरा एक दूसरे के सिर फोड़ रहे हैं, जबकि हाईवे के गड्ढे पूरी तरह खूनी बनते जा रहे हैं।
हादसे में मां ने अपने लाल, बहन ने भाई, पत्नी ने पति और न जाने कितने बच्चों के सिरों से बाप का साया उठ चुका है। कुछ तो दिव्यांग होकर दूूसरे के सहारे के लिए मोहताज बन गए। स्थानीय अधिकारी और नेता क्षेत्रीय लोगों को आश्वासन देते हैं, लेकिन कार्रवाई कोई नहीं करता है।
बसपा सरकार में मायावती ने दिल्ली-यमुनौत्री हाईवे को बनवाने की घोषणा की थी, लेकिन सरकार नहीं बनी। प्रदेश में सपा की सरकार आयी। हैदराबाद की कंपनी एसईडल्ब्यूएल एसवाई लिमिटेड को हाईवे निर्माण का ठेका दिया गया। कंपनी ने तेजी से सर्वे कराकर पुलिया का निर्माण कराया।
विज्ञापन
कहीं-कहीं सड़क भी बनाई। कंपनी ने एनओसी न मिलने से कार्य बंद हो गया। जब एनओसी मिली तो कंपनी ने हाईवे से सबसे पहले पेड़ों का सफाया कराया। इसके बाद फिर काम बंद है। लोगों के विरोध और दबाव के चलते सरकार ने गड्ढे भरने के लिए दूसरी कंपनी को टेंडर दिया। लीपापोती करते हुए कंपनी ने गड्ढे भरे, जो ज्यादा दिन नहीं चले। अधिकारी और नेता, मंत्री आए दिन टूटे हाईवे से गुजरते हैं, मगर इसे बनवाने पर किसी का ध्यान नहीं है।
दिल्ली-यमुनौत्री मार्ग को अब लोग खूनी हाईवे कहने लगे। डूंडाहेडा से लेकर ककड़ीपुर तक हर रोड हादसे में कई की जाने जा चुकी हैं और दर्जनों लोग दिव्यांग हो चुके हैं। कुछ स्थानों पर शासन और प्रशासन द्वारा बीच-बीच में ईंटों से गड्ढों को भरवाया गया है। यहां तक की लोग खंड़जेवाला हाईवे कहने लगे हैं।
दिल्ली-यमुनौत्री हाईवे के चार लेन चौड़ीकरण का कार्य एसईडब्ल्यूएल एसवाई लिमिटेड हैदराबाद द्वारा पीपीपी मॉडल पर किया जा रहा था। नवंबर 2013 से कार्य बंद कर दिया गया। अब तकनीकी एवं वित्तीय डिफॉल्ड के कारण निजी विकास कर्ता का अनुबंध प्राधिकरण ने 25 जुलाई को निरस्त किया। शासन द्वारा मार्ग निर्माण के अंत विकल्पों पर निर्णय लिया जाना है। इसके बाद आगे की कार्रवाई निर्धारित की जाएगी।
‘प्रदेश सरकार अड़ा रही रोड़ा’
भाजपा नेता मान सिंह बली ने कहा हमारे सांसद डॉ. सत्यपाल सिंह लगातार हाईवे का निर्माण कराने का प्रयास कर रहे हैं। प्रदेश सरकार इसमें रोड़ा अटका रही है। भाजपा की सरकार बनते ही हाईवे का निर्माण होगा।
गन्ना समिति के चेयरमैन चौ. कृष्णपाल ने कहा जनपद के किसान और आम आदमी जागरूक नहीं है, जिस कारण हाईवे का निर्माण नहीं है। किसानों के सहयोग से इसके विरोध में आंदोलन चलाया जाएगा। व्यापारी नेता दीपक सिंधी ने कहा हाईवे का निर्माण भ्रष्टाचार और राजनीति की भेंट चढ़ गया है। हाईवे पर न जाने कितने लोग अपनी जान गंवा चुके हैं, इसके बाद भी सरकार की नींद नहीं टूट रही हैं।
विज्ञापन
हादसे में मां ने अपने लाल, बहन ने भाई, पत्नी ने पति और न जाने कितने बच्चों के सिरों से बाप का साया उठ चुका है। कुछ तो दिव्यांग होकर दूूसरे के सहारे के लिए मोहताज बन गए। स्थानीय अधिकारी और नेता क्षेत्रीय लोगों को आश्वासन देते हैं, लेकिन कार्रवाई कोई नहीं करता है।
विज्ञापन
बसपा सरकार में मायावती ने दिल्ली-यमुनौत्री हाईवे को बनवाने की घोषणा की थी, लेकिन सरकार नहीं बनी। प्रदेश में सपा की सरकार आयी। हैदराबाद की कंपनी एसईडल्ब्यूएल एसवाई लिमिटेड को हाईवे निर्माण का ठेका दिया गया। कंपनी ने तेजी से सर्वे कराकर पुलिया का निर्माण कराया।
विज्ञापन
कहीं-कहीं सड़क भी बनाई। कंपनी ने एनओसी न मिलने से कार्य बंद हो गया। जब एनओसी मिली तो कंपनी ने हाईवे से सबसे पहले पेड़ों का सफाया कराया। इसके बाद फिर काम बंद है। लोगों के विरोध और दबाव के चलते सरकार ने गड्ढे भरने के लिए दूसरी कंपनी को टेंडर दिया। लीपापोती करते हुए कंपनी ने गड्ढे भरे, जो ज्यादा दिन नहीं चले। अधिकारी और नेता, मंत्री आए दिन टूटे हाईवे से गुजरते हैं, मगर इसे बनवाने पर किसी का ध्यान नहीं है।
दिल्ली-यमुनौत्री मार्ग को अब लोग खूनी हाईवे कहने लगे। डूंडाहेडा से लेकर ककड़ीपुर तक हर रोड हादसे में कई की जाने जा चुकी हैं और दर्जनों लोग दिव्यांग हो चुके हैं। कुछ स्थानों पर शासन और प्रशासन द्वारा बीच-बीच में ईंटों से गड्ढों को भरवाया गया है। यहां तक की लोग खंड़जेवाला हाईवे कहने लगे हैं।
दिल्ली-यमुनौत्री हाईवे के चार लेन चौड़ीकरण का कार्य एसईडब्ल्यूएल एसवाई लिमिटेड हैदराबाद द्वारा पीपीपी मॉडल पर किया जा रहा था। नवंबर 2013 से कार्य बंद कर दिया गया। अब तकनीकी एवं वित्तीय डिफॉल्ड के कारण निजी विकास कर्ता का अनुबंध प्राधिकरण ने 25 जुलाई को निरस्त किया। शासन द्वारा मार्ग निर्माण के अंत विकल्पों पर निर्णय लिया जाना है। इसके बाद आगे की कार्रवाई निर्धारित की जाएगी।
‘प्रदेश सरकार अड़ा रही रोड़ा’
भाजपा नेता मान सिंह बली ने कहा हमारे सांसद डॉ. सत्यपाल सिंह लगातार हाईवे का निर्माण कराने का प्रयास कर रहे हैं। प्रदेश सरकार इसमें रोड़ा अटका रही है। भाजपा की सरकार बनते ही हाईवे का निर्माण होगा।
गन्ना समिति के चेयरमैन चौ. कृष्णपाल ने कहा जनपद के किसान और आम आदमी जागरूक नहीं है, जिस कारण हाईवे का निर्माण नहीं है। किसानों के सहयोग से इसके विरोध में आंदोलन चलाया जाएगा। व्यापारी नेता दीपक सिंधी ने कहा हाईवे का निर्माण भ्रष्टाचार और राजनीति की भेंट चढ़ गया है। हाईवे पर न जाने कितने लोग अपनी जान गंवा चुके हैं, इसके बाद भी सरकार की नींद नहीं टूट रही हैं।