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Baghpat News: अधीक्षकों को नोटिस जारी, मांगा स्पष्टीकरण
Sat, 14 Jan 2023 12:41 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बागपत
संवाद न्यूज एजेंसी, बागपत
Updated Sat, 14 Jan 2023 12:41 AM IST
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बागपत। जिले में पिछले तीन माह में स्वास्थ्य विभाग की ओर से एक सैम बच्चे को एनआरसी में भर्ती कराया है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का मानना है कि जिले में सैम बच्चों की प्रोपर स्क्रीनिंग नहीं की जा रही है। जिस पर सीएमओ ने जिले के सभी सीएचसी अधीक्षकों को नोटिस जारी कर अधिक से अधिक बच्चों की स्क्रीनिंग कराकर महीने में कम से कम चार बच्चों को एनआरसी में भर्ती कराने के निर्देश दिए हैं।
जिले में 3124 नीली श्रेणी व 1166 लाल श्रेणी के बच्चे हैं। लाल श्रेणी में तीन प्रकार के बच्चों को शामिल किया जाता है। इनमें सबसे गंभीर स्थिति वाले बच्चों को सैम श्रेणी, कम गंभीर बच्चों को मैम श्रेणी, सामान्य श्रेणी में रखा जाता है। जिले में 161 बच्चे सैम श्रेणी के है। कुषोषण दूर करने के लिए शासन ने सैम बच्चों की नियमित स्क्रीनिंग कराने और कुषोषण दूर करने के लिए बच्चों को एनआसी में भर्ती कराने के निर्देश दिए हैं।
इसके बावजूद चिकित्सा विभाग के अधिकारी व कर्मचारी कुषोषित बच्चों का इलाज करने में रुचि नहीं ले रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने पिछले तीन माह में केवल एक बच्चे को एनआरसी में भर्ती कराया है। बागपत, बड़ौत और बिनौली ब्लॉक से तीन माह में एक भी बच्चा एनआरसी में भर्ती नहीं कराया गया है। जिस पर स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का मानना है कि जिले में कुषोषित बच्चों की प्रोपर स्क्रीनिंग नहीं की जा रही है और न ही सैम बच्चों को चिंहित कर एनआरसी में भर्ती कराया जा रहा है।
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सीएमओ डॉ. दिनेश कुमार ने जिले के सभी सीएचसी अधीक्षकों को नोटिस जारी कर विभाग की टीम को अधिक से अधिक सैम बच्चों की स्क्रीनिंग कराकर उनका उपचार कराने के लिए एनआरसी में भर्ती कराने के निर्देश दिए है। तीन माह में एक बच्चों को एनआरसी में भर्ती कराना विभाग के अधिकारियों की कार्यशैली पर प्रश्न चिह्न है।
उन्होंने सीएचसी अधीक्षकों को सैम बच्चों की नियमित स्क्रीनिंग कराने और एक महीने में प्रत्येक ब्लॉक से कम से कम चार बच्चों को उपचार के लिए एनआसी में भर्ती कराने के निर्देश दिए हैं। अति कुषोषित बच्चों के इलाज में किसी भी प्रकार की लापरवाही के लिए सीएचसी अधीक्षकों को जिम्मेदार मानते हुए उनके खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी दी है।
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जिले में 3124 नीली श्रेणी व 1166 लाल श्रेणी के बच्चे हैं। लाल श्रेणी में तीन प्रकार के बच्चों को शामिल किया जाता है। इनमें सबसे गंभीर स्थिति वाले बच्चों को सैम श्रेणी, कम गंभीर बच्चों को मैम श्रेणी, सामान्य श्रेणी में रखा जाता है। जिले में 161 बच्चे सैम श्रेणी के है। कुषोषण दूर करने के लिए शासन ने सैम बच्चों की नियमित स्क्रीनिंग कराने और कुषोषण दूर करने के लिए बच्चों को एनआसी में भर्ती कराने के निर्देश दिए हैं।
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इसके बावजूद चिकित्सा विभाग के अधिकारी व कर्मचारी कुषोषित बच्चों का इलाज करने में रुचि नहीं ले रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने पिछले तीन माह में केवल एक बच्चे को एनआरसी में भर्ती कराया है। बागपत, बड़ौत और बिनौली ब्लॉक से तीन माह में एक भी बच्चा एनआरसी में भर्ती नहीं कराया गया है। जिस पर स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का मानना है कि जिले में कुषोषित बच्चों की प्रोपर स्क्रीनिंग नहीं की जा रही है और न ही सैम बच्चों को चिंहित कर एनआरसी में भर्ती कराया जा रहा है।
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सीएमओ डॉ. दिनेश कुमार ने जिले के सभी सीएचसी अधीक्षकों को नोटिस जारी कर विभाग की टीम को अधिक से अधिक सैम बच्चों की स्क्रीनिंग कराकर उनका उपचार कराने के लिए एनआरसी में भर्ती कराने के निर्देश दिए है। तीन माह में एक बच्चों को एनआरसी में भर्ती कराना विभाग के अधिकारियों की कार्यशैली पर प्रश्न चिह्न है।
उन्होंने सीएचसी अधीक्षकों को सैम बच्चों की नियमित स्क्रीनिंग कराने और एक महीने में प्रत्येक ब्लॉक से कम से कम चार बच्चों को उपचार के लिए एनआसी में भर्ती कराने के निर्देश दिए हैं। अति कुषोषित बच्चों के इलाज में किसी भी प्रकार की लापरवाही के लिए सीएचसी अधीक्षकों को जिम्मेदार मानते हुए उनके खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी दी है।