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जोनमाना की गोशाला में जलनिकासी के नहीं इंतजाम
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जौनमाना गांव में गौशाला के अंदर जलभराव का दृश्य।
- फोटो : BARAUT
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ग्रामीणों ने कहा कि बीमार पड़ रहे गोवंशीय पशु
संवाद न्यूज एजेंसी
बड़ौत। बूंदाबांदी और ठंड के बावजूद जिले के जोनमाना गांव की गोशाला में इंतजाम अधूरे हैं। जलनिकासी नहीं होने के कारण पशु पानी में खड़े नजर आए। गोवंशीय पशु ठंड लगने से बीमार हो रहे हैं। खुले में टीन शेड और तिरपाल के इंतजाम गोवंशों के लिए नाकाफी साबित हो रहे हैं। फिलहाल गोशाला में 38 गोवंश है। मगर, इन्हें ठंड से बचाव के इंतजाम नहीं किए गए हैं।
सूखा भूसा खाकर भर रही पेट
बड़ौत। गोशाला में गोवंशीय पशुओं के खाने के लिए व्यवस्था अधूरी है। पशु सूखा भूसा खाते हुए ही नजर आए।
ये बोले ग्रामीण
- ग्रामीण श्यामवीर और सरदार सिंह ने बताया कि गोशाला में गोवंशों की हालत बहुत खराब है, इस ओर प्रशासन को ध्यान देना चाहिए। सरकार पूरी तरह से गोवंशों की देखभाल के लिए बजट दे रही है, लेकिन गांव में ध्यान नहीं रखा जा रहा है। ग्रामीण आतिश ने बताया कि देखरेख के अभाव के कारण प्रति सप्ताह गोशाला में एक गोवंश की मौत हो रही है। लेकिन शिकायतों के बावजूद कोई सुनवाई नहीं हो रही है।
ये बोले अधिकारी
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डा खुशीराम ने बताया कि उन्होंने रात के समय निरीक्षण किया, इस दौरान गोशाला में जो खामियां मिली थी, उन्हें ठीक करने के निर्देश दिए गए थे।
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बीडीओ राहुल वर्मा व सचिव शैंकी ने बताया कि गोशाला में पर्याप्त इंतजाम है, किसी तरह की कोई समस्या नहीं है। पर्याप्त हरा चारा, भूसा और दाने की व्यवस्था करा दी गई है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
बड़ौत। बूंदाबांदी और ठंड के बावजूद जिले के जोनमाना गांव की गोशाला में इंतजाम अधूरे हैं। जलनिकासी नहीं होने के कारण पशु पानी में खड़े नजर आए। गोवंशीय पशु ठंड लगने से बीमार हो रहे हैं। खुले में टीन शेड और तिरपाल के इंतजाम गोवंशों के लिए नाकाफी साबित हो रहे हैं। फिलहाल गोशाला में 38 गोवंश है। मगर, इन्हें ठंड से बचाव के इंतजाम नहीं किए गए हैं।
सूखा भूसा खाकर भर रही पेट
बड़ौत। गोशाला में गोवंशीय पशुओं के खाने के लिए व्यवस्था अधूरी है। पशु सूखा भूसा खाते हुए ही नजर आए।
ये बोले ग्रामीण
- ग्रामीण श्यामवीर और सरदार सिंह ने बताया कि गोशाला में गोवंशों की हालत बहुत खराब है, इस ओर प्रशासन को ध्यान देना चाहिए। सरकार पूरी तरह से गोवंशों की देखभाल के लिए बजट दे रही है, लेकिन गांव में ध्यान नहीं रखा जा रहा है। ग्रामीण आतिश ने बताया कि देखरेख के अभाव के कारण प्रति सप्ताह गोशाला में एक गोवंश की मौत हो रही है। लेकिन शिकायतों के बावजूद कोई सुनवाई नहीं हो रही है।
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ये बोले अधिकारी
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डा खुशीराम ने बताया कि उन्होंने रात के समय निरीक्षण किया, इस दौरान गोशाला में जो खामियां मिली थी, उन्हें ठीक करने के निर्देश दिए गए थे।
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बीडीओ राहुल वर्मा व सचिव शैंकी ने बताया कि गोशाला में पर्याप्त इंतजाम है, किसी तरह की कोई समस्या नहीं है। पर्याप्त हरा चारा, भूसा और दाने की व्यवस्था करा दी गई है।