{"_id":"59c2cc314f1c1b1f688b59df","slug":"muslim-women-preparing-mother-s-chunari","type":"story","status":"publish","title_hn":"मुस्लिम महिलाएं तैयार कर रहीं मां की चुनरी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मुस्लिम महिलाएं तैयार कर रहीं मां की चुनरी
ब्यूरो/अमर उजाला, बागपत
Updated Thu, 21 Sep 2017 01:44 AM IST
विज्ञापन
बड़ौत में नवरात्र पर्व के लिए माता की चुनरी तैयार करतीं मुस्लिम महिला।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
शारदीय नवरात्र भक्ति और शक्ति का प्रतीक हैं, लेकिन जिले में नवरात्र का त्योहार भाईचारे का संदेश भी देता है। जिले में कई जगह मुस्लिम महिलाएं मां की चुनरियां तैयार कर रही है। यहां तैयार होने वाली चुनरी हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान और उत्तराखंड में सप्लाई की जाती है। सैकड़ों मुस्लिम परिवार हैं, जहां इन दिनों चुनरी बनाने का काम चल रहा है। रोजाना यहां से आपूर्ति होती है।
बृहस्पतिवार से मां दुर्गा के विभिन्न रूपों की आराधना शुरू होगी। मां दुर्गा को शक्ति की देवी माना जाता है। मां की आराधना यहां एकता का प्रतीक भी बन गई है। बड़ौत के पठानकोट, शोरगिरान, छपरौली रोड के अलावा बागपत, डौला, नौरोजपुर गुर्जर समेत ऐसे कई गांव हैं, जहां मुस्लिम परिवारों में मां की चुनरी तैयार की जा रही है। बड़ौत निवासी मीना बताती है नवरात्र आने से पहले यहां काम शुरू हो जाता है। दुर्गा की चुनरी बनाने में विशेष ख्याल स्वच्छता का रखा जाता है।
12 चुनरी पर सिर्फ दो रुपये
बागपत। जिले भर में मुस्लिम के अलावा अन्य बिरादरी की महिलाएं भी चुनरी तैयारी करती हैं। इनको 12 चुनरी तैयार करने पर सिर्फ दो रुपये ही मिलते हैं, यह बेहद कम है। वह बार-बार रुपये बढ़वाने के लिए कह चुके हैं।
विज्ञापन
बच्चे भी करते हैं सहयोग
बागपत। नौरोजपुर गांव की शमिता कहती हैं कि परिवारों के बच्चे भी इस कार्य से जुड़े हैं। स्कूल से आने बाद परिवार के बच्चे भी चुनरी बनाने में सहयोग करते हैं। माता की चुन्नी बनाने में मेहनत ज्यादा है, लेकिन रुपये उन्हें कम मिलते हैं।
विज्ञापन
बृहस्पतिवार से मां दुर्गा के विभिन्न रूपों की आराधना शुरू होगी। मां दुर्गा को शक्ति की देवी माना जाता है। मां की आराधना यहां एकता का प्रतीक भी बन गई है। बड़ौत के पठानकोट, शोरगिरान, छपरौली रोड के अलावा बागपत, डौला, नौरोजपुर गुर्जर समेत ऐसे कई गांव हैं, जहां मुस्लिम परिवारों में मां की चुनरी तैयार की जा रही है। बड़ौत निवासी मीना बताती है नवरात्र आने से पहले यहां काम शुरू हो जाता है। दुर्गा की चुनरी बनाने में विशेष ख्याल स्वच्छता का रखा जाता है।
विज्ञापन
12 चुनरी पर सिर्फ दो रुपये
बागपत। जिले भर में मुस्लिम के अलावा अन्य बिरादरी की महिलाएं भी चुनरी तैयारी करती हैं। इनको 12 चुनरी तैयार करने पर सिर्फ दो रुपये ही मिलते हैं, यह बेहद कम है। वह बार-बार रुपये बढ़वाने के लिए कह चुके हैं।
विज्ञापन
बच्चे भी करते हैं सहयोग
बागपत। नौरोजपुर गांव की शमिता कहती हैं कि परिवारों के बच्चे भी इस कार्य से जुड़े हैं। स्कूल से आने बाद परिवार के बच्चे भी चुनरी बनाने में सहयोग करते हैं। माता की चुन्नी बनाने में मेहनत ज्यादा है, लेकिन रुपये उन्हें कम मिलते हैं।