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डोली पर सवार होकर आएंगी माता रानी, स्त्री शक्ति को मिलेगा बल
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पंडित राजकुमार शास्त्री
- फोटो : BAGHPAT
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बागपत। इस बार शारदीय नवरात्र में माता रानी डोली में सवार होकर आएंगी। इससे स्त्री शक्ति को मजबूति मिलेगी और राजनीति में काफी उथल-पुथल की स्थिति रहेगी। नवरात्र में माता की श्रद्धा से उपासना करने से शुभ फल की प्राप्ति होगी। नवमी को डोली पर सवार होकर ही प्रस्थान करेंगी।
ज्योतिषाचार्य पंडित राजकुमार शास्त्री ने बताया कि सात अक्तूूबर से शारदीय नवरात्र शुरू हो रहे है। इस बार नवरात्र आठ दिन के होंगे, 14 अक्तूबर को महानवमी होगी। नवरात्र में तन्मय होकर माता रानी की उपासना करने से शुभ फल की प्राप्ति होगी। भगवती दुर्गा जातक को शत्रु बाधा, प्रेत बाधा व अन्य सभी बाधाओं से मुक्ति देती है। महाकाली धन ऐश्वर्य और माता सरस्वती विद्या, बुद्धि और विवेक प्रदान करती है।
ईशान कोण में करें कलश की स्थापना
पंडित राजकुमार शास्त्री का कहना है कि माता रानी की उपासना में कलश की स्थापना, शुभ स्थान और शुभ समय पर पूजा करने पर ही उत्तम फल की प्राप्ति होती है। कलश की स्थापना ईशान कोण में करनी चाहिए। कलश स्थापना के लिए सुबह छह बजकर 15 मिनट से आठ बजकर 15 मिनट का समय उत्तम है। ईशान कोण में रेत या मिट्टी डालकर उसमें जौ बोए और उसके ऊपर जल से भरकर मिट्टी का घड़ा रखे। घड़े में रोली, चावल, सुपारी, फूल व मिष्ठान डालकर उसके ऊपर आम के पत्ते लगाकर करवा रखे और करवे के ऊपर सराई में चावल भरकर लाल कपडे़ में लपेट कर नारियल रखना चाहिए। नारियल रखते समय नारियल के मुख का ध्यान रखे। नारियल का मुंह नीचे की ओर से शत्रु बढ़ते है। अखंड दीपक ईशान कोण के कलश के पास ही लगाए और भैरव जी के लिए तेल का दीपक अग्नि कोण में लगाए। पूर्व दक्षिण का कोना माता रानी की स्थापना करें। नित्य पूजा पाठ करने के बाद माता रानी से क्षमा प्रार्थना अवश्य करें।
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व्रत में यह करें
व्रत में फलों का सेवन करें और इसमें भी रस युक्त फल ही ले। भगवती दुर्गा के बीज मंत्र का जाप व दुर्गा सप्तशती का पाठ कर आरती करें और सात्विक रहकर माता रानी की गुणगान करना चाहिए।
यह न करें
माता रानी के व्रत में सरसों के तेल का प्रयोग न करें, ब्रह्मचर्य का पालन करें और मादक पदार्थों का सेवन न करें।
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ज्योतिषाचार्य पंडित राजकुमार शास्त्री ने बताया कि सात अक्तूूबर से शारदीय नवरात्र शुरू हो रहे है। इस बार नवरात्र आठ दिन के होंगे, 14 अक्तूबर को महानवमी होगी। नवरात्र में तन्मय होकर माता रानी की उपासना करने से शुभ फल की प्राप्ति होगी। भगवती दुर्गा जातक को शत्रु बाधा, प्रेत बाधा व अन्य सभी बाधाओं से मुक्ति देती है। महाकाली धन ऐश्वर्य और माता सरस्वती विद्या, बुद्धि और विवेक प्रदान करती है।
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ईशान कोण में करें कलश की स्थापना
पंडित राजकुमार शास्त्री का कहना है कि माता रानी की उपासना में कलश की स्थापना, शुभ स्थान और शुभ समय पर पूजा करने पर ही उत्तम फल की प्राप्ति होती है। कलश की स्थापना ईशान कोण में करनी चाहिए। कलश स्थापना के लिए सुबह छह बजकर 15 मिनट से आठ बजकर 15 मिनट का समय उत्तम है। ईशान कोण में रेत या मिट्टी डालकर उसमें जौ बोए और उसके ऊपर जल से भरकर मिट्टी का घड़ा रखे। घड़े में रोली, चावल, सुपारी, फूल व मिष्ठान डालकर उसके ऊपर आम के पत्ते लगाकर करवा रखे और करवे के ऊपर सराई में चावल भरकर लाल कपडे़ में लपेट कर नारियल रखना चाहिए। नारियल रखते समय नारियल के मुख का ध्यान रखे। नारियल का मुंह नीचे की ओर से शत्रु बढ़ते है। अखंड दीपक ईशान कोण के कलश के पास ही लगाए और भैरव जी के लिए तेल का दीपक अग्नि कोण में लगाए। पूर्व दक्षिण का कोना माता रानी की स्थापना करें। नित्य पूजा पाठ करने के बाद माता रानी से क्षमा प्रार्थना अवश्य करें।
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व्रत में यह करें
व्रत में फलों का सेवन करें और इसमें भी रस युक्त फल ही ले। भगवती दुर्गा के बीज मंत्र का जाप व दुर्गा सप्तशती का पाठ कर आरती करें और सात्विक रहकर माता रानी की गुणगान करना चाहिए।
यह न करें
माता रानी के व्रत में सरसों के तेल का प्रयोग न करें, ब्रह्मचर्य का पालन करें और मादक पदार्थों का सेवन न करें।