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मिल में मजदूरों को नहीं मिल रहा काम
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हादसे के बाद रमाला मिल में मजदूरों को नहीं मिल रहा काम
रमाला। सहकारी चीनी मिल रमाला में दो मजदूरों की मौत के बाद अब आसपास के गांव के मजदूरों को काम नहीं दिया जा रहा है। आसपास के गांव के मजदूर मिल में जाते हैं, लेकिन काम नहीं होने की बात कहते हुए उन्हें मना कर दिया जाता है। मजदूरों का कहना है कि त्योहार से पहले उनके सामने रोजी रोटी का संकट खड़ा हो गया है।
बता दें कि एक वर्ष पूर्व सहकारी चीनी मिल के विस्तारीकरण के शुरू होते ही क्षेत्र के काफी मजदूरों को दिहाड़ी पर लगाया गया था। सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं होने के कारण कई बार हादसे हो चुके हैं। मजदूरों का कहना है कि उन्हें सेफ्टी बेल्ट और न हेलमेट उपलब्ध कराए गए। इस कारण दो मजदूरों की मौत हो चुकी है। मजदूरों की मौत के बाद 22.40 लाख रुपये का मुआवजा देना पड़ा था। एक सप्ताह पूर्व मिल का निरीक्षण करने आई डीएम शकुंतला गौतम ने खामियां मिलने पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने के निर्देश दिए थे। बृहस्पतिवार को काम पर पहुंचे स्थानीय मजदूरों को यहां काम नहीं होने की बात कहते हुए निकाल दिया गया। आसपास के गांव के करीब दो सौ मजदूर रोजाना यहां पर मजदूरी के लिए जाते थे। मजदूर सुरेश, अनिल, फिरोज, जावेद, मनीष आदि मजदूर का कहना है कि रोजी रोटी का संकट गहरा गया है। मजदूरों का कहना है कि ऐसे में अब वह कहां जाए। गांव के नजदीक काम मिलने से उन्होंने अन्य जगह से भी काम छोड़ दिया।
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रमाला। सहकारी चीनी मिल रमाला में दो मजदूरों की मौत के बाद अब आसपास के गांव के मजदूरों को काम नहीं दिया जा रहा है। आसपास के गांव के मजदूर मिल में जाते हैं, लेकिन काम नहीं होने की बात कहते हुए उन्हें मना कर दिया जाता है। मजदूरों का कहना है कि त्योहार से पहले उनके सामने रोजी रोटी का संकट खड़ा हो गया है।
बता दें कि एक वर्ष पूर्व सहकारी चीनी मिल के विस्तारीकरण के शुरू होते ही क्षेत्र के काफी मजदूरों को दिहाड़ी पर लगाया गया था। सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं होने के कारण कई बार हादसे हो चुके हैं। मजदूरों का कहना है कि उन्हें सेफ्टी बेल्ट और न हेलमेट उपलब्ध कराए गए। इस कारण दो मजदूरों की मौत हो चुकी है। मजदूरों की मौत के बाद 22.40 लाख रुपये का मुआवजा देना पड़ा था। एक सप्ताह पूर्व मिल का निरीक्षण करने आई डीएम शकुंतला गौतम ने खामियां मिलने पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने के निर्देश दिए थे। बृहस्पतिवार को काम पर पहुंचे स्थानीय मजदूरों को यहां काम नहीं होने की बात कहते हुए निकाल दिया गया। आसपास के गांव के करीब दो सौ मजदूर रोजाना यहां पर मजदूरी के लिए जाते थे। मजदूर सुरेश, अनिल, फिरोज, जावेद, मनीष आदि मजदूर का कहना है कि रोजी रोटी का संकट गहरा गया है। मजदूरों का कहना है कि ऐसे में अब वह कहां जाए। गांव के नजदीक काम मिलने से उन्होंने अन्य जगह से भी काम छोड़ दिया।
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