बाल दिवस पर मनस्संज्ञिनी का संदेश - चीनी कम या चीनी बंद
मनस्संज्ञिनी ने लिखित बयान में कहा देशवासी अपने जीवन से चीनी को निकाल फेंके। उसने कहा न केवल चीनी हमारे दिल, लीवर और नाड़ी के लिए जहर है, अपितु उसे बनानी वाली शुगर मिल हमारी और जलवायु का भी सत्यानाश कर रही है। मनस्संज्ञिनी के अनुसार अधिकांश चीनी मिलेें किसानों का पेमेंट रोक कर उन्हें आत्महत्या करने पर मजबूर कर रही है। जल वीरांगना ने कहा किसान जहरीले केमिकल का इस्तेमाल और गन्ने की एक फसलीय खेती के कारण अपनी मिट्टी को भी बीमार कर रहे हैं। बिटिया कहा भारतवासी उपभोक्ता के रूप में चीनी की जगह गुड़, शक्कर और खंड़सारी का सेवन करें और किसान गन्ने के साथ बहु फसलीय और जैविक खेती अपनाएं। साथ ही सरकार और नीति निर्धारक भी गुड्, शक्कर और खंड़सारी के लघु उद्योगों को बढ़ावा देने वाली नीतियां बनाए और किसानों का पेमेंट दिलाकर चीनी उद्योग को दंडित और बंद करवाने का कार्य करें।
मनस्संज्ञिनी के अनुसार चीनी कम चीनी बंद अभियान अंतरराष्ट्रीय स्तर तक जा चुका है। इससे प्रभावित होकर बहुराष्ट्रीय कंपनी पेप्सी में भी अपने उत्पादों में 50 प्रतिशत चीनी कम करने का निर्णय लिया है और अपने विज्ञापनों में भी चीनी कम का संदेश देना शुरू कर दिया है। इस अंतरराष्ट्रीय मुहिम को आगे बढ़ाकर वह आने वाले दिनों में सॉर्क देशों के तीन लाख से अधिक बच्चों को पत्र लिखकर चीनी कम या चीनी बंद करने के लिए प्रेरित करेगी।