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Baghpat News: निरन्तर आत्म चिंतन करने से मनुष्य को मिलती है कामयाबी
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-समयदेशना ग्रंथ पर तीन दिवसीय विद्वत गोष्ठी प्रारंभ
फोटो संख्या 3
बड़ौत। दिगम्बराचार्य विशुद्ध सागर महाराज ने कहा कि समझो, संभलो, सोचो और निरन्तर आत्म चिंतन करने से मनुष्य को कामयाबी मिलती है।
जैनमुनि ऋषभ सभागार में आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रिय विद्वत गोष्ठी में बोले। उन्होंने कहा जगत्-प्रपंच आत्म कल्याण। आत्म शांति के कारण नहीं हैं। आत्म-साधना, संयम-तप साधना, जिन-अर्चना, गुरु वाणी रस पान के अलावा बाह्य समस्त कार्य संसार भ्रमण के ही कारण हैं। आत्मा मात्र मेरा है। शेष देह, मकान, पुत्र-पुत्री, पत्नी, परिवार, धन-सम्पत्ति बाह्य द्रव्य मुझसे अत्यंत भिन्न ही हैं। संयोग का वियोग होगा। विचार करो, आत्मभूत क्या है और अनात्मभूत क्या है? लोक में सबसे सुन्दर कोई वस्तु है तो वह अरस-अरूपी आत्मा है। आत्म भूत जानो, आत्म भूत का चिंतन करो, आत्मभूत को अनुभूत करो। आसव भाव छोड़ो, आत्मभूत पर दृष्टि करो। अनात्मभूत से चित्त को शीघ्र हटाओ, आत्म भूत पर दृष्टिपात करो। गोष्ठी में डॉ. श्रेयांस जैन बड़ौत, पंडित भी वीरसागर दिल्ली, डॉ. सोनल शास्त्री दिल्ली, पंडित विनोद रजवांस, डॉ. कमलेश जैन जयपुर, ज्योति जैन खतौली ने सहभागिता की। गोष्ठी की अध्यक्षता डॉ़ वीर सागर जैन, संचालन डॉ़ श्रेयांस जैन ने किया।
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बड़ौत। दिगम्बराचार्य विशुद्ध सागर महाराज ने कहा कि समझो, संभलो, सोचो और निरन्तर आत्म चिंतन करने से मनुष्य को कामयाबी मिलती है।
जैनमुनि ऋषभ सभागार में आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रिय विद्वत गोष्ठी में बोले। उन्होंने कहा जगत्-प्रपंच आत्म कल्याण। आत्म शांति के कारण नहीं हैं। आत्म-साधना, संयम-तप साधना, जिन-अर्चना, गुरु वाणी रस पान के अलावा बाह्य समस्त कार्य संसार भ्रमण के ही कारण हैं। आत्मा मात्र मेरा है। शेष देह, मकान, पुत्र-पुत्री, पत्नी, परिवार, धन-सम्पत्ति बाह्य द्रव्य मुझसे अत्यंत भिन्न ही हैं। संयोग का वियोग होगा। विचार करो, आत्मभूत क्या है और अनात्मभूत क्या है? लोक में सबसे सुन्दर कोई वस्तु है तो वह अरस-अरूपी आत्मा है। आत्म भूत जानो, आत्म भूत का चिंतन करो, आत्मभूत को अनुभूत करो। आसव भाव छोड़ो, आत्मभूत पर दृष्टि करो। अनात्मभूत से चित्त को शीघ्र हटाओ, आत्म भूत पर दृष्टिपात करो। गोष्ठी में डॉ. श्रेयांस जैन बड़ौत, पंडित भी वीरसागर दिल्ली, डॉ. सोनल शास्त्री दिल्ली, पंडित विनोद रजवांस, डॉ. कमलेश जैन जयपुर, ज्योति जैन खतौली ने सहभागिता की। गोष्ठी की अध्यक्षता डॉ़ वीर सागर जैन, संचालन डॉ़ श्रेयांस जैन ने किया।