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क्षमा मांगने वाले वीर व क्षमा करने वाले होते हैं महावीर: डा. श्रीयांश
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दशलक्षण महापर्व का क्षमावाणी पर्व के साथ धूमधाम से समापन
बड़ौत। वाचस्पति प्रकांड पंडित डॉ. श्रीयांश जैन ने कहा कि क्षमा वीरस्य भूषणम। जो क्षमा मांगते हैं वो वीर होते हैं, लेकिन जो क्षमा करते हैं वो महावीर होते हैं। कहा कि जाने-अनजाने में कोई भूल हुई हो, किसी का दिल दुखा हो, किसी को बुरा लगा हो, तो क्षमा कर देना।
वे बुधवार को क्षमावाणी पर्व पर दिगंबर जैन बड़ा मंदिर में श्रद्घालुओं को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि व्यक्ति जिसके संपर्क में होता है, उससे कभी ना कभी मन में खटास भी अवश्य हुई होगी। उन सभी शब्दों और हमने किसी आचरण, वजह से किसी भी तरह से दिल को दुखाया हो तो उसके लिए क्षमापर्व पर आपसे करबद्ध क्षमा मांगते है। सभी राग और द्वेषों को दूर करते हुए मन, वचन और काया से अपने कर्मों की निर्जरा करते हैं। इस अवसर पर सभी श्रद्धालुओं ने एक-दूसरे से क्षमा मांगी तथा विश्व शांति के लिए भगवान से कामना की। उधर बुधवार को जैन अनुयायियों ने दशलक्षण महापर्व के अंतिम दिन मन्दिर व घरों में कोविड-19 के मद्देनजर पूजा-अर्चना की और दशलक्षण धर्म के उत्तम क्षमा धर्म को अंगीकार किया।
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उत्तम क्षमा धर्म को अंगीकार किया
बड़ौत। दिगंबर जैन बड़ा मन्दिर में कोविड-19 के मद्देनजर दशलक्षण महापर्व के अंतिम दिन उत्तम क्षमा धर्म को अंगीकार किया। सर्वप्रथम श्री जी का प्रकक्षालन व अभिषेक किया गया एवम तेरह द्वीप की सादगी पूर्वक पूजा की गई तथा अर्ध्य चढ़ाए गए तथा क्षमावाणी पर्व मनाया गया। इसमें प्रवीण जैन, अतुल जैन, सुनील जैन शामिल रहे। श्री पार्श्वनाथ मंदिर नेहरु रोड में भी सादगी पूर्वक दशलक्षण महापर्व के अंतिम दिन उत्तम क्षमा धर्म को अंगीकार किया गया तथा क्षमावाणी धर्म एवं सरस्वती जी की पूजा की गई। इसमें सतेंद्र जैन, अमन जैन, नेमचंद जैन, आदिश जैन शामिल रहे।
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बड़ौत। वाचस्पति प्रकांड पंडित डॉ. श्रीयांश जैन ने कहा कि क्षमा वीरस्य भूषणम। जो क्षमा मांगते हैं वो वीर होते हैं, लेकिन जो क्षमा करते हैं वो महावीर होते हैं। कहा कि जाने-अनजाने में कोई भूल हुई हो, किसी का दिल दुखा हो, किसी को बुरा लगा हो, तो क्षमा कर देना।
वे बुधवार को क्षमावाणी पर्व पर दिगंबर जैन बड़ा मंदिर में श्रद्घालुओं को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि व्यक्ति जिसके संपर्क में होता है, उससे कभी ना कभी मन में खटास भी अवश्य हुई होगी। उन सभी शब्दों और हमने किसी आचरण, वजह से किसी भी तरह से दिल को दुखाया हो तो उसके लिए क्षमापर्व पर आपसे करबद्ध क्षमा मांगते है। सभी राग और द्वेषों को दूर करते हुए मन, वचन और काया से अपने कर्मों की निर्जरा करते हैं। इस अवसर पर सभी श्रद्धालुओं ने एक-दूसरे से क्षमा मांगी तथा विश्व शांति के लिए भगवान से कामना की। उधर बुधवार को जैन अनुयायियों ने दशलक्षण महापर्व के अंतिम दिन मन्दिर व घरों में कोविड-19 के मद्देनजर पूजा-अर्चना की और दशलक्षण धर्म के उत्तम क्षमा धर्म को अंगीकार किया।
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उत्तम क्षमा धर्म को अंगीकार किया
बड़ौत। दिगंबर जैन बड़ा मन्दिर में कोविड-19 के मद्देनजर दशलक्षण महापर्व के अंतिम दिन उत्तम क्षमा धर्म को अंगीकार किया। सर्वप्रथम श्री जी का प्रकक्षालन व अभिषेक किया गया एवम तेरह द्वीप की सादगी पूर्वक पूजा की गई तथा अर्ध्य चढ़ाए गए तथा क्षमावाणी पर्व मनाया गया। इसमें प्रवीण जैन, अतुल जैन, सुनील जैन शामिल रहे। श्री पार्श्वनाथ मंदिर नेहरु रोड में भी सादगी पूर्वक दशलक्षण महापर्व के अंतिम दिन उत्तम क्षमा धर्म को अंगीकार किया गया तथा क्षमावाणी धर्म एवं सरस्वती जी की पूजा की गई। इसमें सतेंद्र जैन, अमन जैन, नेमचंद जैन, आदिश जैन शामिल रहे।
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