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शिवरात्रि पर धनिष्ठा नक्षत्र और परिधी योग का बन रहा महासंयोग
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शिव की उपासना करने से होगी दांपत्य सुख की प्राप्ति और रोग से मिलेगी मुक्ति
संवाद न्यूज एजेंसी
बागपत। महाशिव रात्रि पर धनिष्ठा नक्षत्र और परिधि योग होने से महासंयोग बन रहा है। चंद्रमा के कुंभ राशि में प्रवेश करने भी महाशिवरात्रि पर भगवान शिव का जलाभिषेक और पूजा-अर्चना करने से विशेष फल की प्राप्ति होगी। धनिष्ठा नक्षत्र होने से शिव उपासना से दांपत्य सुखी की प्राप्ति और शोक से मुक्ति मिलेगी।
ज्योतिषाचार्य पं. राजकुमार शास्त्री ने बताया कि रात्रि शिवशक्ति के मिलन का महापर्व है। यह दिन और रात शिव शक्ति के मिलन का महापर्व है। इस बार महाशिवरात्रि पर परिधि योग का होना विशेष फलदायी है। परिधि योग सुबह 11 बजकर 18 मिनट तक रहेगा और इसके बाद शिव योग लगेगा। परिधि योग में भगवान भोले नाथ की आराधना करने से शत्रुओं पर विजय मिलती है। महाशिवरात्रि पर धनिष्ठा नक्षत्र होना भी महासंयोग है। धनिष्ठा नक्षत्र में शिव शक्ति की पूजा करने से उत्तम दांपत्य सुख की प्राप्ति के साथ-साथ रोग व शोक से मुक्ति मिलती है। शाम चार बजकर 31 मिनट पर चंद्रमा कुंभ राशि में प्रवेश करेंगे। जिससे यह भी उत्तम संयोग बन रहा है। महाशिवरात्रि पर भगवान शिव का दूध से अभिषेक करने मनोकामना की सिद्धि होती है। सोमवार को पूरा दिन त्रयोदशी है। इसी दिन प्रदोष व्रत भी है। एक मार्च को सुबह तीन बजकर 16 मिनट पर चतुर्दशी आएगी और रात्रि में एक बजे तक रहेगी। शिवरात्रि पर्व पर रात्रि जागरण करने से अंधकार रूपी कष्टों से मुक्ति मिलती है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
बागपत। महाशिव रात्रि पर धनिष्ठा नक्षत्र और परिधि योग होने से महासंयोग बन रहा है। चंद्रमा के कुंभ राशि में प्रवेश करने भी महाशिवरात्रि पर भगवान शिव का जलाभिषेक और पूजा-अर्चना करने से विशेष फल की प्राप्ति होगी। धनिष्ठा नक्षत्र होने से शिव उपासना से दांपत्य सुखी की प्राप्ति और शोक से मुक्ति मिलेगी।
ज्योतिषाचार्य पं. राजकुमार शास्त्री ने बताया कि रात्रि शिवशक्ति के मिलन का महापर्व है। यह दिन और रात शिव शक्ति के मिलन का महापर्व है। इस बार महाशिवरात्रि पर परिधि योग का होना विशेष फलदायी है। परिधि योग सुबह 11 बजकर 18 मिनट तक रहेगा और इसके बाद शिव योग लगेगा। परिधि योग में भगवान भोले नाथ की आराधना करने से शत्रुओं पर विजय मिलती है। महाशिवरात्रि पर धनिष्ठा नक्षत्र होना भी महासंयोग है। धनिष्ठा नक्षत्र में शिव शक्ति की पूजा करने से उत्तम दांपत्य सुख की प्राप्ति के साथ-साथ रोग व शोक से मुक्ति मिलती है। शाम चार बजकर 31 मिनट पर चंद्रमा कुंभ राशि में प्रवेश करेंगे। जिससे यह भी उत्तम संयोग बन रहा है। महाशिवरात्रि पर भगवान शिव का दूध से अभिषेक करने मनोकामना की सिद्धि होती है। सोमवार को पूरा दिन त्रयोदशी है। इसी दिन प्रदोष व्रत भी है। एक मार्च को सुबह तीन बजकर 16 मिनट पर चतुर्दशी आएगी और रात्रि में एक बजे तक रहेगी। शिवरात्रि पर्व पर रात्रि जागरण करने से अंधकार रूपी कष्टों से मुक्ति मिलती है।
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