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डेढ़ करोड़ खोकर, कटान नहीं रोक पाई ठोकर

Sun, 31 Jul 2022 11:57 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sun, 31 Jul 2022 11:57 PM IST
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Losing one and a half crores, could not stop the stumbling block
बागपत के काठा गांव में यमुना किनारे बनी ठोकर - फोटो : BAGHPAT
बागपत। पहाड़ों पर बारिश होने के बाद यमुना नदी का जलस्तर लगातार बढ़ता जा रहा है। जिससे सिसाना, बागपत, मवीकलां, खेड़ा हटाना समेत कई गांवों में यमुना किनारे मिट्टी कटान भी होने लगा है। उधर काठा गांव में डेढ़ करोड़ रुपये खर्च कर ठोकर बनाने में भी खानापूर्ति कर दी गई है। जहां यमुना किनारे बनी ठोकर के पास ही मिट्टी कटान शुरू हो गया है। वहीं जलस्तर बढ़ने से यमुना में 50 बीघा में उगाई गई सब्जी की फसल डूब गई है।
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जिले में यमुना किनारे 25 गांव बसे हुए हैं। जिन्हें यमुना नदी का जलस्तर बढ़ने पर बाढ़ से बचाने के लिए जगह-जगह प्रशासन ने ठोकरे बनवा रखी हैं। पिछले महीने ही सिंचाई विभाग ने काठा गांव में यमुना नदी किनारे डेढ़ करोड़ रुपये खर्च कर दो ठोकरें बनवाई। जिनके निर्माण में खानापूर्ति की गई है और यमुना का जलस्तर बढ़ने से पहले ठोकरों का निर्माण पूर्ण नहीं हो सका। जिसके चलते यमुना नदी का जलस्तर बढ़ने पर काठा गांव में लगातार मिट्टी कटान हो रहा है। जिसको लेकर किसानों की चिंता भी बढ़ती जा रही है।
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बाढ़ चौकियों से कर्मचारी गायब
यमुना नदी का जलस्तर बढ़ने पर प्रशासन ने अलर्ट जारी कर दिया है। जिलेभर में 11 बाढ़ चौकियां बनाकर कर्मचारियों को निगरानी के लिए कहा है, लेकिन कर्मचारी बाढ़ चौकियों से गायब है। जबकि उनकी जिम्मेदारी होती है कि जलस्तर बढ़ने पर स्थिति से अधिकारियों से अवगत कराया जा सके।
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इन गांवों में मिट्टी कटान का खतरा बढ़ा
बागपत जनपद में यमुना नदी किनारे टांडा, जागोस, बागपत, कोताना, बदरखा, पाली, काठा, गौरीपुर जवाहरनगर, नैथला, फैजपुर निनाना, खेड़ा इस्लामपुर, सुल्तानपुर हटाना, मवीकलां, सांकरौद समेत 25 गांव स्थित है। जहां यमुना नदी का जलस्तर बढ़ने पर मिट्टी कटान का खतरा बढ़ गया है।
यमुना में छोड़ा गया 28 हजार क्यूसेक पानी
हथिनीकुंड बैराज से यमुना नदी में शनिवार देर रात 27,923 क्यूसेक पानी छोड़ा गया। जिससे रविवार शाम यमुना का जलस्तर बढ़ गया।
डूब गई 28 बीघा सीताफल व लौकी की फसल
यमुना खादर में 15 बीघा भूमि पर सीताफल व 13 बीघा लौकी की फसल उगा रखी है। यमुना नदी का जलस्तर बढने से सीताफल व लौकी की फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई। जिससे करीब 70 हजार रुपये का नुकसान हो गया। - जयकिशन, किसान
फसल डूबने से हो गया कर्जा
यमुना खादर में हर साल फसल उगाकर परिवार का पालन पोषण करते है। इस बार यमुना नदी का जलस्तर अचानक बढ़ गया और उसकी आठ बीघा लौकी व चार बीघा सीताफल की फसल जलमग्न हो गई। जिससे उसे 50 हजार रुपये से अधिक नुकसान हो गया। फसल बर्बाद होने से उस पर कर्जा भी हो गया। - बिजेंद्र, किसान।
डूब गई ज्वार व ढांचे की फसल
निवाड़ा गांव के यमुना खादर में आठ बीघा जमीन पर ज्वार व चार बीघा जमीन पर ढांचे की फसल उगा रखी थी। जिसे बेचने के बाद परिवार का गुजर बसर करता हूं, लेकिन अब यमुना जलस्तर बढ़ने से फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई। जिससे करीब 50 हजार रुपये का नुकसान हो गया। - जाहिद, किसान।

कोट...
काठा गांव में दो ठोकरे बनाई गई हैं, जिनका कुछ काम बाकी रह गया है। जिसे नवंबर माह में पूरा कराया जाएगा। अभी जो ठोकरे बनी हैं, एक-दो महीने में ठीक हो जाएगी और फिर मिट्टी कटान भी नहीं होगा। उत्कर्ष भारद्वाज, एक्सईएन, सिंचाई।

बागपत के काठा गांव में यमुना किनारे लगाए गए कट्टे

बागपत के काठा गांव में यमुना किनारे लगाए गए कट्टे- फोटो : BAGHPAT

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