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भगवान श्रीकृष्ण ने पुकारा था बागेश्वर महादेव

Sat, 30 Jul 2016 12:57 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बागपत
ब्यूरो/अमर उजाला, बागपत Updated Sat, 30 Jul 2016 12:57 AM IST
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Lord Krishna was called Bageshwar Mahadev
बागेश्वर महादेव मंदिर। - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
कौरवों ने पांडवों को रास्ते से हटाने के लिए बरनावा में लाक्षागृह बनवाया था। भगवान श्रीकृष्ण पांडवों को लेकर सुरंग के जरिए तिगरी खंडवारी पहुंचे। वहां से पुराना कस्बे के मंदिर में विश्राम किया। तब भगवान श्रीकृष्ण ने मंदिर को बागेश्वर महादेव का नाम दिया था। मंदिर इसी नाम से प्रसिद्ध हो गया।
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हस्तिनापुर में कौरवों ने पांडु पुत्रों को रास्ते से हटाने के लिए लाक्षागृह बरनावा में लाख का एक अनोखा महल बनवाया, जहां पर पांडवों के रहने की व्यवस्था की। योजना बनाई थी कि रात में महल को आग के हवाले कर दिया जाएगा, जिसमें पांडव जिंदा दफन हो जाएंगे। इसकी जानकारी भगवान श्रीकृष्ण को लगी तो उन्होंने अपने सेवक मूसकराज को लाक्षागृह भेजकर रातों रात जमीन के अंदर सुरंग बनवा दी जो बागपत के तिगरी में निकली।
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महल में उस दौरान भगवान श्रीकृष्ण के साथ पांच पांडव और द्रोपदी थी। महल में आग के लगते ही सभी लोग सुरंग से होते हुए बागपत तिगरी पहुंचे। वहां से होते हुए पुराना कस्बा में बने मंदिर में सभी ने विश्राम किया। मंदिर की सुंदरता और मनमोहन दृश्य को देखकर भगवान श्रीकृष्ण भाव विभोर हो गए और मंदिर का नाम बागेश्वर महादेव मंदिर रख दिया। सभी ने वहां पर भगवान शिव की आराधना की। विश्राम करने के बाद सभी हस्तिनापुर के लिए निकल गए। तभी से मंदिर बागेश्वर महादेव के नाम से  प्रसिद्ध हो गया। 
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पूरी होती है मन की मुराद
मंदिर समिति के अध्यक्ष वेदप्रकाश भारद्वाज और सचिव प्रेमपाल चौहान ने बताया कि बागेश्वर महादेव मंदिर ऋंगी ऋषि की तपोस्थली है। यहां पर 41 दिन की तपस्या करने वालों की सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती है। पूर्णमासी के दिन यहां पर हजारों की संख्या में दिल्ली और हरियाणा से लोग भगवान शिव का जलाभिषेक और प्रसाद चढ़ाने के लिए आते हैं। 


मंदिर में थे अनोखे तीन पेड़
समिति के लोगों ने बताया कि मंदिर के पीछे हिस्से में तीन अनोखे पेड़ हुआ करते थे, जिस पर कभी पतझड़ नहीं हुआ। जिसकी कलम बरनावा के एक वेदशास्त्री ने भी मंगवाई थी। तीनों पेड़ों के आज तक भी कोई नाम नहीं बता पाया था। जो विशालकाय थे।
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