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Baghpat News: तिलवाड़ा की तरह सिनौली में भी मिली थी दीवार
Fri, 17 Jan 2025 12:58 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बागपत
संवाद न्यूज एजेंसी, बागपत
Updated Fri, 17 Jan 2025 12:58 AM IST
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बड़ौत। तिलवाड़ा के आला टीले पर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की खोदाई में जिस तरह की दो दीवारें निकली हैं। इस तरह की दीवार सिनौली में भी निकली थी। उस दीवार पर शोध के बाद ही वहां मानव बस्ती पर मुहर लगी थी। इसको लेकर पुरातत्वविदों ने मंथन शुरू कर दिया है। वहीं बृहस्पतिवार को पुरावशेषों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए उत्खनन किया गया।
खोदाई जिस तरह से आगे बढ़ रही है, इसमें मृदभांड, बड़े आकार के मिट्टी के बर्तन, हड्डियां, दीवारें, चबूतरेनुमा आकृति समेत अन्य पुरावशेष मिलने से आला टीला पुरातत्वविदों के लिए खास होता जा रहा है। इसमें अहम बात है कि जिस तरह की दीवारें खोदाई में सामने आईं हैं, इस तरह की दीवार सिनौली में दूसरे चरण में की गई खोदाई में सामने आई थी। उस दौरान पुरातत्वविदों ने स्पष्ट कर दिया था कि यहां मानव बस्ती थी। मगर, अभी तक आला टीले के विषय में पुरातत्वविद कुछ स्पष्ट नहीं कर रहे हैं। हालांकि इन अहम पुरावशेषों ने पुरातत्वविदों की उम्मीद को बल दिया है।
दीवारें, चबूतरानुमा आकृति, सुराही के आकार के बर्तन, हड्डियां अपनी ओर से इतिहास की दृष्टि से मानव बस्ती का इशारा कर रहे हैं। मगर, शोध और वरिष्ठ पुरातत्वविदों की राय के बाद ही कुछ स्पष्ट होगा। वहीं बृहस्पतिवार को दीवारें, सुराहीनुमा आकृति के बर्तनों व अन्य पुरावशेषों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए उत्खनन किया गया। इसको लेकर सहायक अधीक्षण भूपेंद्र फोनिया का कहना है कि पुरावशेषों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए उत्खनन किया जा रहा हैं। इनपर शोध के बाद ही कुछ स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
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खोदाई जिस तरह से आगे बढ़ रही है, इसमें मृदभांड, बड़े आकार के मिट्टी के बर्तन, हड्डियां, दीवारें, चबूतरेनुमा आकृति समेत अन्य पुरावशेष मिलने से आला टीला पुरातत्वविदों के लिए खास होता जा रहा है। इसमें अहम बात है कि जिस तरह की दीवारें खोदाई में सामने आईं हैं, इस तरह की दीवार सिनौली में दूसरे चरण में की गई खोदाई में सामने आई थी। उस दौरान पुरातत्वविदों ने स्पष्ट कर दिया था कि यहां मानव बस्ती थी। मगर, अभी तक आला टीले के विषय में पुरातत्वविद कुछ स्पष्ट नहीं कर रहे हैं। हालांकि इन अहम पुरावशेषों ने पुरातत्वविदों की उम्मीद को बल दिया है।
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दीवारें, चबूतरानुमा आकृति, सुराही के आकार के बर्तन, हड्डियां अपनी ओर से इतिहास की दृष्टि से मानव बस्ती का इशारा कर रहे हैं। मगर, शोध और वरिष्ठ पुरातत्वविदों की राय के बाद ही कुछ स्पष्ट होगा। वहीं बृहस्पतिवार को दीवारें, सुराहीनुमा आकृति के बर्तनों व अन्य पुरावशेषों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए उत्खनन किया गया। इसको लेकर सहायक अधीक्षण भूपेंद्र फोनिया का कहना है कि पुरावशेषों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए उत्खनन किया जा रहा हैं। इनपर शोध के बाद ही कुछ स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
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