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कुबरिहि रानि प्रानप्रिय जानी, बार-बार बुद्धि बखानी
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तितरौदा में रामलीला का मंचन करते कलाकार।
- फोटो : BARAUT
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बिनौली/खेकड़ा। कुबरिहि रानि प्रानप्रिय जानी। बार बार बुद्धि बखानी। तोहि सम हित न मोर संसारा। बहे जात कई भइसि अधारा। भावार्थ : कुबरी को रानी ने प्राणों के समान प्रिय समझकर बार-बार उसकी बड़ी बुद्धि का बखान किया और बोली- संसार में मेरा तेरे समान हितकारी और कोई नहीं है। तू मुझे बही जाती हुई के लिए सहारा हुई है।
तितरौदा गांव की धर्मशाला में रामलीला मंचन में मंगलवार को डायरेक्टर डॉ. विनय कुमार पांडेय के निर्देशन में मन्थरा-कैकेयी संवाद, कोप भवन में रानी कैकेयी का राजा दशरथ से दो वर मांगने का कलाकारों ने मनमोहक मंचन किया। मंचन में राजा दशरथ दरबार में श्रीराम को युवराज पद देने की घोषणा करते हैं। धूमधाम से राम के राजतिलक की तैयारियां चलती हैं, इसी बीच दासी मन्थरा जाकर रानी कैकेयी के कान भरती है। तब रानी अपनी दासी मंथरा की बातों में आकर आभूषण आदि त्यागकर कोप भवन में चली जाती है। यह समाचार पाकर राजा दशरथ जाते हैं और रानी से इसका कारण पूछते हैं।
कैकेयी तब राजा को पूर्व में दिए गए दो वर मांगने का वचन याद दिलाती है और राम की शपथ दिलाकर राजा से दो वर भरत को राजगद्दी और राम को 14 वर्ष का वनवास मांगती है। यह सुनकर राजा हतप्रभ रह जाते हैं। दुखी मन से रानी के सामने अनुनय विनय करते हैं, लेकिन रानी की हठ के आगे उनकी एक नहीं चलती। अंतत: वह असहनीय कष्ट के चलते मूर्छित हो जाते हैं। वहीं श्री प्रेम मंडल रामलीला कमेटी बिनौली की ओर से शिव मंदिर प्रांगण में चल रही रामलीला में राम जन्म, गुरुकुलीय शिक्षा दीक्षा और ताड़का वध का मंचन किया।
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उधर, खेकड़ा के मोहल्ला अहिरान में राम वनवास का मार्मिक मंचन हुआ। धार्मिक रामलीला कमेटी के तत्वावधान में भव्य राम बरात निकाली गई। श्रद्धालुओं ने राम बरात पर पुष्प वर्षा की। राम बरात जैन कालेज रोड से शुरू होकर बाजार चौकी चौराहा, बड़ा बाजार, छोटा बाजार, मोहल्ला गिरधरपुर, मोहल्ला मुंडाला, मोहल्ला औरंगाबाद से होते हुए गांधी प्याऊ पर पहुुंची। शुभारंभ क्षेत्रीय विधायक योगेश धामा ने भगवान राम की आरती कर किया।
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तितरौदा गांव की धर्मशाला में रामलीला मंचन में मंगलवार को डायरेक्टर डॉ. विनय कुमार पांडेय के निर्देशन में मन्थरा-कैकेयी संवाद, कोप भवन में रानी कैकेयी का राजा दशरथ से दो वर मांगने का कलाकारों ने मनमोहक मंचन किया। मंचन में राजा दशरथ दरबार में श्रीराम को युवराज पद देने की घोषणा करते हैं। धूमधाम से राम के राजतिलक की तैयारियां चलती हैं, इसी बीच दासी मन्थरा जाकर रानी कैकेयी के कान भरती है। तब रानी अपनी दासी मंथरा की बातों में आकर आभूषण आदि त्यागकर कोप भवन में चली जाती है। यह समाचार पाकर राजा दशरथ जाते हैं और रानी से इसका कारण पूछते हैं।
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कैकेयी तब राजा को पूर्व में दिए गए दो वर मांगने का वचन याद दिलाती है और राम की शपथ दिलाकर राजा से दो वर भरत को राजगद्दी और राम को 14 वर्ष का वनवास मांगती है। यह सुनकर राजा हतप्रभ रह जाते हैं। दुखी मन से रानी के सामने अनुनय विनय करते हैं, लेकिन रानी की हठ के आगे उनकी एक नहीं चलती। अंतत: वह असहनीय कष्ट के चलते मूर्छित हो जाते हैं। वहीं श्री प्रेम मंडल रामलीला कमेटी बिनौली की ओर से शिव मंदिर प्रांगण में चल रही रामलीला में राम जन्म, गुरुकुलीय शिक्षा दीक्षा और ताड़का वध का मंचन किया।
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उधर, खेकड़ा के मोहल्ला अहिरान में राम वनवास का मार्मिक मंचन हुआ। धार्मिक रामलीला कमेटी के तत्वावधान में भव्य राम बरात निकाली गई। श्रद्धालुओं ने राम बरात पर पुष्प वर्षा की। राम बरात जैन कालेज रोड से शुरू होकर बाजार चौकी चौराहा, बड़ा बाजार, छोटा बाजार, मोहल्ला गिरधरपुर, मोहल्ला मुंडाला, मोहल्ला औरंगाबाद से होते हुए गांधी प्याऊ पर पहुुंची। शुभारंभ क्षेत्रीय विधायक योगेश धामा ने भगवान राम की आरती कर किया।