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Baghpat News: दादा व पिता की कर्मभूमि वापस लेने में अहम जयंत का गठबंधन दांव

Sun, 11 Feb 2024 02:20 AM IST
मेरठ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बागपत
संवाद न्यूज एजेंसी, बागपत Updated Sun, 11 Feb 2024 02:20 AM IST
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Jayant's alliance stake important in taking back the land of grandfather and father
बागपत। भाजपा के साथ रालोद का गठबंधन तय हो चुका है और अब केवल औपचारिक घोषणा होनी बाकी है। जयंत का गठबंधन का यह दांव दादा चौधरी चरण सिंह और पिता चौधरी अजित सिंह की कर्मभूमि वापस लेने में अहम होगा। भाजपा के साथ गठबंधन होने के बाद रालोद के लिए बागपत सीट सबसे सुरक्षित मानी जा रही है।
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बागपत लोकसभा सीट पर वर्ष 1998 को छोड़कर लगातार चौधरी चरण सिंह परिवार का कब्जा रहा है। वर्ष 1977 में चौधरी चरण सिंह पहली बार यहां से लोकसभा चुनाव लड़कर जीत दर्ज करते रहे। उनके बाद वर्ष 1989 में उनके बेटे चौधरी अजित सिंह ने यहां से जीत दर्ज की तो वह 1997 तक सांसद रहे। वर्ष 1998 में जरूर उलटफेर हुआ और सोमपाल शास्त्री ने उनको हरा दिया। इसके बावजूद वह ज्यादा समय तक सांसद नहीं रह सके और वर्ष 1999 में हुए चुनाव में चौधरी अजित सिंह ने फिर जीत दर्ज करते हुए लगातार कब्जा जमाए रखा।
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मगर वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा के डाॅ. सत्यपाल सिंह ने उनको हरा दिया। उसके बाद वर्ष 2019 में खुद चौधरी जयंत सिंह यहां से चुनाव मैदान में उतरे और सपा व बसपा के साथ गठबंधन होने के बाद भी वह चुनाव नहीं जीत सके। इस तरह लगातार दस साल से बागपत पर भाजपा का कब्जा है और जयंत को दादा व पिता की कर्मभूमि वापस लेने के लिए जद्दोजहद करनी पड़ रही है। मगर अब भाजपा के साथ रालोद का गठबंधन होता है तो चौधरी चरण सिंह व चौधरी अजित सिंह की कर्मभूमि दोबारा से चौधरी परिवार को मिल सकती है।
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- बागपत सीट पर यह वोटरों की स्थिति
बागपत लोकसभा सीट में बागपत, बड़ौत, छपरौली विधानसभा के अलावा मेरठ की सिवालखास, गाजियाबाद की मोदीनगर विधानसभा सीट है। इस तरह लोकसभा क्षेत्र में पंद्रह लाख से ज्यादा वोटर हैं। इनमें सबसे ज्यादा जाट वोटर शामिल हैं तो मुस्लिम, दलित भी काफी हैं। इनके अलावा गुर्जर, त्यागी, ठाकुर वोटरों की संख्या भी काफी है। इनमें भाजपा का कोर वोटर व जाट के सहारे रालोद के लिए यह सीट सुरक्षित मानी जा रही है। हालांकि भाजपा के साथ गठबंधन होने के बाद रालोद को मुस्लिम वोटर मिलना मुश्किल है जो सपा या कांग्रेस का प्रत्याशी आने पर उसके पास जा सकता है।
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