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ईस्टर्न पेरिफेरल से जोड़ा जाए जैन मंदिर तो पर्यटकों की बढ़ेगी आवाजाही

Fri, 25 Sep 2020 11:54 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Fri, 25 Sep 2020 11:54 PM IST
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Jain temple to be linked with Eastern Peripheral, then tourist movement will increase
बड़ागांव स्थित त्रिलोक तीर्थ धाम जैन मंदिर - फोटो : BAGHPAT
पर्यटन दिवस :
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- जैन मंदिर कमेटी लंबे समय से केंद्र सरकार से कर रही मांग
अमर उजाला ब्यूरो
बागपत। बड़ा गांव का जैन मंदिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ख्यातिलब्ध है। मगर, आवाजाही की परेशानी के चलते पर्यटकों को मुश्किलें झेलनी पड़ती है। श्रद्धालु और मंदिर कमेटी के लोग ईस्टर्न पेरिफेरल से लिंक मार्ग के जरिए मंदिर को जोड़ने की मांग कर रहे हैं। कट की मांग पूरी नहीं हो सकी। मंदिर के अध्यक्ष त्रिलोक चंद जैन का कहना है कि एक्सप्रेस-वे पर अगर कट मिल जाता तो बेहतर रहता। पेरिफेरल एक्सप्रेस-वे के जरिये श्रद्धालुओं को आसानी होगी। जनप्रतिनिधियों के माध्यम से कई बार एनएचएआई के अधिकारियों के समक्ष भी मांग रखी जा चुकी है। एक्सप्रेस-वे से जुड़ाव होने के बाद श्रद्धालुओं को सहूलियत होगा और मंदिर और जिले में पर्यटन बढ़ेगा।
1922 में मिली थी पार्श्वनाथ की मूर्ति
बागपत। त्रिलोकचंद जैन बताते हैं कि साल 1922 में पार्श्वनाथ की मूर्ति मिली थी। साल दो हजार में पूर्व राज्यपाल सूरजभान ने भूमि पूजन किया था। केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भी मंदिर आ चुके हैं।
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पर्यटन विभाग से रखी मांग
बागपत। मंदिर कमेटी की मांग है कि पर्यटन विभाग को मंदिर को अपनी बुकलेट में शामिल करना चाहिए। इसके अलावा साइट पर विस्तार से मंदिर का इतिहास डालना चाहिए।
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यह भी है बड़ागांव का इतिहास
बागपत। बड़ागांव क्षेत्र में पुरातत्व के महत्व की चीजें मिलती रही हैं। किवदंति है कि बड़ागांव उर्फ रावण में ही लंकापति रावण ने देवी की पूजा की थी। वर्तमान में टीले पर मंशा देवी का मंदिर है। इस टीले के आसपास पुरानी चीजें मिलती रही हैं। शहजाद राय शोध संस्थान के निदेशक अमित राय जैन का दावा है कि उत्तर भारत में गुर्जर प्रतिहार काल से भी पुराना गांव का इतिहास है। प्रतिहार राजाओं ने ही गौरी के मंदिरों का निर्माण कराया था।
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