Baghpat: 780 गांवों में 638 करोड़ रुपये खर्च की तीन साल बाद शुरू हुई जांच
प्रदेश के सभी जिलों के 780 गांवों में 638 करोड़ रुपये खर्च करने के तीन साल बाद जांच शुरू कराई गई है। उस समय पंचायत चुनाव के कारण पंचायतों में एडीओ को प्रशासक बनाया गया था और चंद दिनों में इतनी बड़ी धनराशि पंचायतों के खाते से निकाली गई थी। इसमें जांच के लिए पंचायती राज निदेशक अटल कुमार राय ने सभी जिलों के डीएम को पत्र भेजा है, जिसमें डीपीआरओ को जांच सौंपी गई है।
प्रदेश में दिसंबर 2020 में प्रधानों का कार्यकाल खत्म हो गया था। जिसके बाद सभी ब्लॉक के एडीओ को प्रशासक नियुक्त करते हुए पंचायतों की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मई 2021 से पहले ही चुनाव हो गए और पंचायतों में प्रधान चुन लिए गए। मगर इस बीच शपथ ग्रहण होने से पहले ही सभी जिलों के 780 गांवों के खातों से प्रशासकों ने 638 करोड़ रुपये का भुगतान कर दिया। जिनसे गांवों में विकास कार्य होने दिखा दिए गए।
पश्चिम के जिलों में इस तरह खर्च किए गए रुपये
- बागपत में पांच करोड़ 94 लाख रुपये
- मेरठ में दो करोड़ 76 लाख रुपये
- शामली में चार करोड़ 57 लाख रुपये
- मुजफ्फरनगर में 14 करोड़ 62 लाख रुपये
- बिजनौर में 26 करोड़ 66 लाख रुपये
- सहारनपुर में 13 करोड़ 59 लाख रुपये
- गाजियाबाद में एक करोड़ 31 लाख रुपये
- बुलंदशहर में 17 करोड़ 54 लाख
- हापुड़ में एक करोड़ 88 लाख रुपये
- गौतमबुद्धनगर में एक करोड़ तीन लाख रुपये
बागपत में बिनौली ब्लॉक में सबसे ज्यादा दो करोड़ खर्च हुए
बागपत के बिनौली ब्लॉक में सबसे ज्यादा दो करोड़ दो लाख रुपये खर्च किए गए थे। जबकि बड़ौत ब्लॉक में डेढ़ करोड़ रुपये खर्च दिखाए गए और छपरौली में एक करोड़ 20 लाख रुपये खर्च हुए। इस तरह ही पिलाना में 53 लाख रुपये, खेकड़ा में 41 लाख रुपये, बागपत में करीब 27 लाख रुपये खर्च दिखाए गए थे।
जिस समय वर्ष 2021 में पंचायतों में प्रशासक तैनात थे। उस समय खर्च हुए बजट की जांच के लिए शासन से पत्र आया है। उससे संबंधित रिकार्ड मांगा गया है और उसके आधार पर जांच करके रिपोर्ट भेजी जाएगी। - अरुण अत्री, जिला पंचायत राज अधिकारी