फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Baghpat News ›   Initiative to save dome of Barnawa mound, tourism will increase through heritage

बरनावा टीले की गुंबद को बचाने की पहल, धरोहर से बढ़ेगा पर्यटन

Thu, 24 Sep 2020 11:15 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Thu, 24 Sep 2020 11:15 PM IST
विज्ञापन
Initiative to save dome of Barnawa mound, tourism will increase through heritage
बरनावा स्थित गुंबद का फाइल फोटो - फोटो : BAGHPAT
पर्यटन दिवस पर विशेष
विज्ञापन

- लाक्षागृह को लेकर बार-बार लोगों का ध्यान खींचता रहा है बरनावा
- हिंडन नदी के किनारे बने टीले पर पिछले साल कराई गई थी खुदाई
संवाद न्यूज एजेंसी
बागपत। सालों से बरनावा टीला लोगों के लिए रहस्य बना हुआ है। आसपास के लोग टीला देखने पहुंचते हैं। गुंबद जर्जर होकर गिरने लगी थी, जिसे पुरातत्व विभाग ने बचाने का कार्य शुरू कर दिया है। 24 लाख रुपये से गुंबद का जीर्णोद्धार किया जा रहा है। इससे धरोहर को संयोजा जा सकेगा।
महाभारतकालीन बरनावा टीले को लाक्षागृह से जोड़कर देखा जाता है। यही वजह है कि यहां पर लोगों का आवागमन रहता है। पुरातात्विक अवशेष जीर्णशीर्ण हो चुके हैं। यह पूरा क्षेत्र एएसआई की ओर से संरक्षित घोषित किया जा चुका है। एएसआई की आगरा इकाई ने क्षतिग्रस्त हो चुकी चारदीवारी को ठीक करने का कार्य शुरू कर दिया है। टीम के सुपरवाइजर शमशेर अली का कहना है कि जीर्णोद्धार में 24 लाख रुपये की लागत से संरक्षित क्षेत्र की मरम्मत की जाएगी। मरम्मत के दौरान पुरातात्विक अवशेष की चारदीवारी व गुंबद को ठीक किया जाएगा।
विज्ञापन

इसलिए प्रसिद्ध है बरनावा
बागपत। बरनावा में पांच हजार साल पुराना पांडवों का लाक्षागृह होने का दावा किया जाता है। हालांकि पिछले साल खुदाई का कोई नतीजा नहीं निकला था। लेकिन खंडहर में सुरंग आमने-सामने बनी हैं। इतिहासकारों का कहना है कि पांडवों ने लाक्षागृह के नीचे सुरंगों को निर्माण करवाया था। शहजाद राय शोध संस्थान के निदेशक अमित राय जैन का कहना है कि बरनावा गांव में महाभारतकाल का लाक्षागृह टीला होने के प्रमाण है। यहां एक सुरंग भी है। यहां पांडव किला भी है, इसमें अनेक प्राचीन मूर्तियां हैं। दक्षिण में सौ फीट ऊंचा और 30 एकड़ भूमि पर फैला टीला है। टीले के नीचे दो सुरंगें स्थित हैं। वर्तमान में टीले के पास एक गोशाला, श्रीगांधी धाम समिति, वैदिक अनुसंधान समिति तथा महानंद संस्कृत विद्यालय स्थापित है।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed