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महंगाई : धान की खेती की लागत 35 से 40 फीसदी बढ़ी
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बड़ौत में धान रोपती महिलाओं का फाइल फोटों।
- फोटो : BARAUT
डीजल, बिजली, खाद, बीज एवं कीटनाशकों के दामों में बेतहाशा वृद्धि से किसान परेशान
जिले में लग चुकी अब तक करीब 70 फीसदी धान की पौध
बड़ौत। डीजल, बिजली, खाद, बीज एवं कीटनाशकों के दामों में हुई बेतहाशा वृद्धि ने धान उत्पादक किसानों की हालत खस्ता कर दी है। वर्तमान में धान की खेती की लागत में करीब 35 से 40 फीसदी तक इजाफा हुआ है। मजदूरी महंगी हो गई है तो ट्रैक्टर से जुताई भी एक से डेढ़ गुना वृद्धि हो गई है। ऊपर से कम वर्षा ने किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें बढ़ा दी हैं। जुलाई में कुल दस दिन ही बरसात हुई है। अगस्त के भी 13 दिन सूखे बीत गए है। ऐसे में खेतों में लगी धान की पौध सूखने लगी है। छोटे किसान ज्यादा परेशान हैं। सिंचाई के लिए उनको ट्यूबवेल का सहारा लेना पड़ रहा है, जो उनकी जेब ढीली कर रहा है।
एक बीघा की लागत पांच से छह हजार रुपये
किसानों के मुताबिक विभिन्न मदों में बढ़े दामों के चलते वर्तमान में एक बीघा में धान की फसल की लागत औसतन पांच से छह हजार रुपये आ रही है। पिछले साल ढाई से तीन हजार रुपये औसत लागत थी। किसान को सबसे ज्यादा खर्च सिंचाई में करना पड़ रहा है। बताया कि एक बीघा खेत की सिंचाई में कम से कम दो घंटे इंजन (पंपसेट) चलाना होता है। वर्तमान में डीजल के रेट 90.11 रुपये प्रति लीटर है। एक घंटा इंजन (पंपसेट) चलाने में औसतन 3-4 लीटर डीजल का प्रयोग होता है। यानि दो घंटे में किसान को करीब तीन से चार हजार रुपये डीजल पर खर्च करने पड़ते है।
किसानों का कहना
अब तक करीब 70 फीसदी धान की पौध लग चुकी है। किसानों का कहना है कि यदि फसल कम पैदा हुई और दाम अच्छे नहीं मिले तो लागत भी नहीं निकल पाएगी। भाकियू के प्रदेश उपाध्यक्ष व किसान नेता राजेन्द्र सिंह का कहना है कि बिजली एवं डीजल की दरों में बेतहाशा वृद्धि से धान की खेती की लागत में 35 से 40 फीसदी इजाफा हुआ है। खाद, बीज एवं पेस्टीसाइड के दामों में भी पिछले साल की तुलना में वृद्धि हुई है। बारिश भी इस माह कम होने से जलस्तर नीचे पहुंच गया है। इससे किसान को सिंचाई के लिये ज्यादा देर तक पंपसेट चलाना पड़ रहा है। किसान देवराज व पुष्पेंद्र का कहना है कि डीजल, बिजली, खाद, बीज एवं कीटनाशकों के दामों में बेतहाशा वृद्धि के चलते धान उत्पादक किसानों की लागत डेढ़ से दो गुनी हो गई है। ऊपर से कम वर्षा ने लागत में और भी इजाफा किया है। इससे किसान परेशानियों में उलझ कर रह गया है।
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धान की किस्म के हिसाब से एक बीघा खेत में उत्पादन
प्रजाति उत्पादन
सुगंधा एक बीघा में अनुमानित 5 क्विंटल
1509 एक बीघा में अनुमानित 3 क्विंटल
पी-10-एक बीघा में अनुमानित 4 क्विंटल
पिछले साल मिले फसलों के रेट
प्रजाति मूल्य
सुगंधा 2200 रुपये क्विंटल
1509 2600 रुपये क्विंटल
पी-10 3000 रुपये क्विंटल
पिछले वर्ष के मुकाबले इस साल के दाम
डीजल पिछले साल जुलाई में करीब 60 रुपये प्रति लीटर, इस साल 90.11 रुपये प्रति लीटर है।
पेस्टीसाइड और हर्बीसाइड : पिछले साल की तुलना में दस से पंद्रह फीसदी की बढ़ोत्तरी।
बिजली: पिछले साल 140 रुपये प्रति हार्स पावर, इस साल 170 रुपये प्रति हार्सपावर।
बुआई की मजदूरी पिछले 500 रुपये प्रति बीघा, इस साल 700 रुपये प्रति बीघा है।
कटाई पिछले साल 600 से 800 रुपये थी, इस बार 150 से 200 रुपये की वृद्धि।
ट्रैक्टर से जुताई : पिछले साल 140 रुपये प्रति बीघा, इस साल 250 रुपये प्रति बीघा है।
कीटनाशक दवाओं के स्प्रे की मजदूरी: पिछले साल 100 रुपये थी, इस साल 150 रुपये है।
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जिले में लग चुकी अब तक करीब 70 फीसदी धान की पौध
बड़ौत। डीजल, बिजली, खाद, बीज एवं कीटनाशकों के दामों में हुई बेतहाशा वृद्धि ने धान उत्पादक किसानों की हालत खस्ता कर दी है। वर्तमान में धान की खेती की लागत में करीब 35 से 40 फीसदी तक इजाफा हुआ है। मजदूरी महंगी हो गई है तो ट्रैक्टर से जुताई भी एक से डेढ़ गुना वृद्धि हो गई है। ऊपर से कम वर्षा ने किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें बढ़ा दी हैं। जुलाई में कुल दस दिन ही बरसात हुई है। अगस्त के भी 13 दिन सूखे बीत गए है। ऐसे में खेतों में लगी धान की पौध सूखने लगी है। छोटे किसान ज्यादा परेशान हैं। सिंचाई के लिए उनको ट्यूबवेल का सहारा लेना पड़ रहा है, जो उनकी जेब ढीली कर रहा है।
एक बीघा की लागत पांच से छह हजार रुपये
किसानों के मुताबिक विभिन्न मदों में बढ़े दामों के चलते वर्तमान में एक बीघा में धान की फसल की लागत औसतन पांच से छह हजार रुपये आ रही है। पिछले साल ढाई से तीन हजार रुपये औसत लागत थी। किसान को सबसे ज्यादा खर्च सिंचाई में करना पड़ रहा है। बताया कि एक बीघा खेत की सिंचाई में कम से कम दो घंटे इंजन (पंपसेट) चलाना होता है। वर्तमान में डीजल के रेट 90.11 रुपये प्रति लीटर है। एक घंटा इंजन (पंपसेट) चलाने में औसतन 3-4 लीटर डीजल का प्रयोग होता है। यानि दो घंटे में किसान को करीब तीन से चार हजार रुपये डीजल पर खर्च करने पड़ते है।
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किसानों का कहना
अब तक करीब 70 फीसदी धान की पौध लग चुकी है। किसानों का कहना है कि यदि फसल कम पैदा हुई और दाम अच्छे नहीं मिले तो लागत भी नहीं निकल पाएगी। भाकियू के प्रदेश उपाध्यक्ष व किसान नेता राजेन्द्र सिंह का कहना है कि बिजली एवं डीजल की दरों में बेतहाशा वृद्धि से धान की खेती की लागत में 35 से 40 फीसदी इजाफा हुआ है। खाद, बीज एवं पेस्टीसाइड के दामों में भी पिछले साल की तुलना में वृद्धि हुई है। बारिश भी इस माह कम होने से जलस्तर नीचे पहुंच गया है। इससे किसान को सिंचाई के लिये ज्यादा देर तक पंपसेट चलाना पड़ रहा है। किसान देवराज व पुष्पेंद्र का कहना है कि डीजल, बिजली, खाद, बीज एवं कीटनाशकों के दामों में बेतहाशा वृद्धि के चलते धान उत्पादक किसानों की लागत डेढ़ से दो गुनी हो गई है। ऊपर से कम वर्षा ने लागत में और भी इजाफा किया है। इससे किसान परेशानियों में उलझ कर रह गया है।
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धान की किस्म के हिसाब से एक बीघा खेत में उत्पादन
प्रजाति उत्पादन
सुगंधा एक बीघा में अनुमानित 5 क्विंटल
1509 एक बीघा में अनुमानित 3 क्विंटल
पी-10-एक बीघा में अनुमानित 4 क्विंटल
पिछले साल मिले फसलों के रेट
प्रजाति मूल्य
सुगंधा 2200 रुपये क्विंटल
1509 2600 रुपये क्विंटल
पी-10 3000 रुपये क्विंटल
पिछले वर्ष के मुकाबले इस साल के दाम
डीजल पिछले साल जुलाई में करीब 60 रुपये प्रति लीटर, इस साल 90.11 रुपये प्रति लीटर है।
पेस्टीसाइड और हर्बीसाइड : पिछले साल की तुलना में दस से पंद्रह फीसदी की बढ़ोत्तरी।
बिजली: पिछले साल 140 रुपये प्रति हार्स पावर, इस साल 170 रुपये प्रति हार्सपावर।
बुआई की मजदूरी पिछले 500 रुपये प्रति बीघा, इस साल 700 रुपये प्रति बीघा है।
कटाई पिछले साल 600 से 800 रुपये थी, इस बार 150 से 200 रुपये की वृद्धि।
ट्रैक्टर से जुताई : पिछले साल 140 रुपये प्रति बीघा, इस साल 250 रुपये प्रति बीघा है।
कीटनाशक दवाओं के स्प्रे की मजदूरी: पिछले साल 100 रुपये थी, इस साल 150 रुपये है।