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Baghpat News: भारत को पाकिस्तान से खुरपका-मुंहपका के नए वायरस का खतरा
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बागपत। पशुओं की मौत का सबसे बड़ा कारण बन रही खुरपका-मुंहपका की बीमारी का नया वायरस पाकिस्तान से भारत में आ सकता है। दक्षिण अफ्रीका में कहर बरपाने वाला यह लेबल-3 वायरस इरान, इराक, कुवैत, पाकिस्तान तक आ चुका है और इसके भारत आने का खतरा बढ़ गया है।
खुरपका-मुंहपका के सामान्य वायरस के मुकाबले यह लेबल-3 वायरस पशुओं में कई गुणा तेजी से बीमारी फैलाता है। इसलिए देशभर के पशु स्वास्थ्य संस्थानों के वैज्ञानिकों की चिंता बढ़ गई है। वैज्ञानिकों ने पहले ही इस वायरस की आसानी से पहचान से लेकर रोकने के लिए वैक्सीन बनाने को कार्य शुरू कर दिया है।
इसके लिए ही शनिवार को बागपत के चौधरी चरण सिंह राष्ट्रीय पशु स्वास्थ्य संस्थान में केंद्रीय पशुपालन एवं डेयरी विभाग के आयुक्त डॉ. बीएम नवीना ने वैज्ञानिकों के साथ बैठक की। इसमें बागपत, बंगलूरू, भोपाल, भुवनेश्वर के पशु स्वास्थ्य संस्थानों के 11 वैज्ञानिक शामिल रहे।
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डॉ. बीएम नवीना ने विशेष बातचीत में बताया कि पशुओं में नई बीमारियां आ रही हैं। खुरपका-मुंहपका की बीमारी से गाय-भैंस समेत अन्य पशुओं की मौत हो जाती है। इससे बड़ा आर्थिक नुकसान होता है। इसका असर दूध के उत्पादन पर भी पड़ता है। खुरपका-मुंहपका के पुराने वायरस के लिए वैक्सीन बनी थी और वह पशुओं को लगाई भी जाती है।
अब खुरपका-मुंहपका का नया वायरस पाकिस्तान से भारत आ सकता है तो पहले ही काम शुरू हो गया है। उसकी पहचान किस तरह से होगी और उससे बचाव के लिए वैक्सीन बनाई जाएगी। यह कार्य भी बागपत के संस्थान में किया जाएगा। ऐसा पहले ही करके बड़े आर्थिक नुकसान रोका जा सकता है।
-मंत्रालय को भेजी जाएगी पूरी रिपोर्ट
चौधरी चरण सिंह राष्ट्रीय पशु स्वास्थ्य संस्थान के संयुक्त आयुक्त डॉ. अश्विनी कुमार ने बताया कि पशुओं को बीमारियों से बचाने के लिए वैक्सीन बनाने समेत अन्य जितने भी फैसले लिए जाएंगे। इसकी पूरी रिपोर्ट केंद्रीय पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय के पास जाएगी और वहां से इसको लेकर आगे के निर्णय लिए जाएंगे।
-लंपी की नई वैक्सीन पर भी चल रहा काम
बताया गया कि लंपी बीमारी ने भी काफी नुकसान पहुंचाया है। इसकी वैक्सीन बन चुकी है, मगर एक नई वैक्सीन पर कार्य चल रहा है। डॉ. बीएम नवीना के अनुसार उम्मीद है कि वह भी जल्द तैयार हो जाएगी और पशुपालकों को इसका फायदा मिलेगा।
-इस तरह फैलता है खुरपका-मुंहपका
खुरपका-मुंहपका संक्रामक रोग है, जो एक पशु से दूसरे में तेजी से फैलता है। इसके लक्षण दिखाई देने से पहले 14 दिन तक संक्रमण फैलता रहता है। इस रोग के लक्षण पशु के मुंह व खुरों में छाले, लार टपकना, तेज बुखार आना आदि हैं। इस कारण दुधारू पशुओं का दूध 80 प्रतिशत तक कम हो जाता है। पशुओं को समय पर उपचार नहीं मिलने पर मौत तक हो जाती है।
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खुरपका-मुंहपका के सामान्य वायरस के मुकाबले यह लेबल-3 वायरस पशुओं में कई गुणा तेजी से बीमारी फैलाता है। इसलिए देशभर के पशु स्वास्थ्य संस्थानों के वैज्ञानिकों की चिंता बढ़ गई है। वैज्ञानिकों ने पहले ही इस वायरस की आसानी से पहचान से लेकर रोकने के लिए वैक्सीन बनाने को कार्य शुरू कर दिया है।
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इसके लिए ही शनिवार को बागपत के चौधरी चरण सिंह राष्ट्रीय पशु स्वास्थ्य संस्थान में केंद्रीय पशुपालन एवं डेयरी विभाग के आयुक्त डॉ. बीएम नवीना ने वैज्ञानिकों के साथ बैठक की। इसमें बागपत, बंगलूरू, भोपाल, भुवनेश्वर के पशु स्वास्थ्य संस्थानों के 11 वैज्ञानिक शामिल रहे।
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डॉ. बीएम नवीना ने विशेष बातचीत में बताया कि पशुओं में नई बीमारियां आ रही हैं। खुरपका-मुंहपका की बीमारी से गाय-भैंस समेत अन्य पशुओं की मौत हो जाती है। इससे बड़ा आर्थिक नुकसान होता है। इसका असर दूध के उत्पादन पर भी पड़ता है। खुरपका-मुंहपका के पुराने वायरस के लिए वैक्सीन बनी थी और वह पशुओं को लगाई भी जाती है।
अब खुरपका-मुंहपका का नया वायरस पाकिस्तान से भारत आ सकता है तो पहले ही काम शुरू हो गया है। उसकी पहचान किस तरह से होगी और उससे बचाव के लिए वैक्सीन बनाई जाएगी। यह कार्य भी बागपत के संस्थान में किया जाएगा। ऐसा पहले ही करके बड़े आर्थिक नुकसान रोका जा सकता है।
-मंत्रालय को भेजी जाएगी पूरी रिपोर्ट
चौधरी चरण सिंह राष्ट्रीय पशु स्वास्थ्य संस्थान के संयुक्त आयुक्त डॉ. अश्विनी कुमार ने बताया कि पशुओं को बीमारियों से बचाने के लिए वैक्सीन बनाने समेत अन्य जितने भी फैसले लिए जाएंगे। इसकी पूरी रिपोर्ट केंद्रीय पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय के पास जाएगी और वहां से इसको लेकर आगे के निर्णय लिए जाएंगे।
-लंपी की नई वैक्सीन पर भी चल रहा काम
बताया गया कि लंपी बीमारी ने भी काफी नुकसान पहुंचाया है। इसकी वैक्सीन बन चुकी है, मगर एक नई वैक्सीन पर कार्य चल रहा है। डॉ. बीएम नवीना के अनुसार उम्मीद है कि वह भी जल्द तैयार हो जाएगी और पशुपालकों को इसका फायदा मिलेगा।
-इस तरह फैलता है खुरपका-मुंहपका
खुरपका-मुंहपका संक्रामक रोग है, जो एक पशु से दूसरे में तेजी से फैलता है। इसके लक्षण दिखाई देने से पहले 14 दिन तक संक्रमण फैलता रहता है। इस रोग के लक्षण पशु के मुंह व खुरों में छाले, लार टपकना, तेज बुखार आना आदि हैं। इस कारण दुधारू पशुओं का दूध 80 प्रतिशत तक कम हो जाता है। पशुओं को समय पर उपचार नहीं मिलने पर मौत तक हो जाती है।