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मेरठ जाना हो तो शाम सात बजे से पहले ही निपटा लें काम
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संवाद न्यूज एजेंसी
बागपत। मेरठ निवासी अहसान की बागपत में दुकान है। वह रोजाना सुबह बागपत आते हैं और शाम को लौट जाते हैं। शाम होते ही उन्हें चिंता सताने लगती है कि यदि सात बजे तक काम खत्म नहीं किया तो बस नहीं मिलेगी। ऐसे में उन्हें डग्गामार वाहन का सहारा लेना पड़ता है।
यह समस्या अकेले अहसान की नहीं है। अन्य जिलों या शहरों से रोजाना बागपत आवागमन करने वालों के साथ यह बड़ी समस्या हैं। गाजियाबाद के लोनी निवासी मिस्त्री बाबू खान बागपत में आकर काम करते हैं। वह रात में नौ बजे से पहले ही लोनी चले जाते हैं। उन्हें रात में नौ बजे के बाद दिल्ली के लिए बस मिलना मुश्किल है। इस रूट पर डग्गामार वाहन भी शाम होते ही बंद हो जाते हैं। ऐसे में बागपत में बस अड्डा नहीं होने से सबसे बड़ी समस्या रात में बसों का संचालन बंद होने की है। इससे करीब एक से डेढ़ हजार लोग परेशान हैं। उन्हें घर लौटने के लिए काम अधूरे छोड़ने पड़ते हैं। कई बार टैक्सी की व्यवस्था करनी पड़ती है।
जान जोखिम में डालनी पड़ रही
यदि बस छूट जाती है तो करीब एक घंटे बाद तक डग्गामार वाहन सहारा होते हैं। यह भी केवल मेरठ और सोनीपत रूट के लिए है। इसका फायदा डग्गामार वाहन चालक उठाते हैं। वे दोगुने किराया वसूलते हैं। मेरठ के करीब सौ रुपये वसूलते हैं। वहीं, सोनीपत जाने वाले यात्रियों को बहालगढ़ उतार देते हैं। यहां डग्गामार वाहन भी नहीं मिलते। ऐसे में लोगों को ट्रकों में जान जोखिम में डालकर सफर करना पड़ता है।
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बागपत से आखिरी बस सेवा
- मेरठ के लिए शाम सात बजे।
- सोनीपत के लिए शाम छह बजे।
- शामली के लिए रात में आठ बजे।
- दिल्ली के लिए रात को नौ बजे।
- सहारनपुर के लिए कोई निर्धारित समय नहीं।
- दिल्ली से सहारनपुर जाने वाली बसें कई बार बागपत में नहीं रुकती।
आपातकाल में टैक्सी ही सहारा
बागपत के अर्जुन पुरम निवासी नितिन ने बताया कि कभी जरूरी काम से रात में मेरठ या दिल्ली जाना पड़ जाए तो रोडवेज बसें नहीं मिलती हैं। ऐसे में टैक्सी से जाना पड़ता है। इसमें हजारों रुपये खर्च होते हैं। माता कॉलोनी निवासी महताब ने बताया कि रात में टैक्सी दो हजार रुपये से कम में नहीं मिलती है।
बस अड्डा नहीं बनने तक रात में बसों के संचालन का समय बढ़वाने के लिए परिवहन निगम के अधिकारियों से बातचीत की जाएगी। इसका समाधान जरूर निकाला जाएगा, ताकि लोगों को परेशानी न हो। - राजकमल यादव, जिलाधिकारी
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बागपत। मेरठ निवासी अहसान की बागपत में दुकान है। वह रोजाना सुबह बागपत आते हैं और शाम को लौट जाते हैं। शाम होते ही उन्हें चिंता सताने लगती है कि यदि सात बजे तक काम खत्म नहीं किया तो बस नहीं मिलेगी। ऐसे में उन्हें डग्गामार वाहन का सहारा लेना पड़ता है।
यह समस्या अकेले अहसान की नहीं है। अन्य जिलों या शहरों से रोजाना बागपत आवागमन करने वालों के साथ यह बड़ी समस्या हैं। गाजियाबाद के लोनी निवासी मिस्त्री बाबू खान बागपत में आकर काम करते हैं। वह रात में नौ बजे से पहले ही लोनी चले जाते हैं। उन्हें रात में नौ बजे के बाद दिल्ली के लिए बस मिलना मुश्किल है। इस रूट पर डग्गामार वाहन भी शाम होते ही बंद हो जाते हैं। ऐसे में बागपत में बस अड्डा नहीं होने से सबसे बड़ी समस्या रात में बसों का संचालन बंद होने की है। इससे करीब एक से डेढ़ हजार लोग परेशान हैं। उन्हें घर लौटने के लिए काम अधूरे छोड़ने पड़ते हैं। कई बार टैक्सी की व्यवस्था करनी पड़ती है।
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जान जोखिम में डालनी पड़ रही
यदि बस छूट जाती है तो करीब एक घंटे बाद तक डग्गामार वाहन सहारा होते हैं। यह भी केवल मेरठ और सोनीपत रूट के लिए है। इसका फायदा डग्गामार वाहन चालक उठाते हैं। वे दोगुने किराया वसूलते हैं। मेरठ के करीब सौ रुपये वसूलते हैं। वहीं, सोनीपत जाने वाले यात्रियों को बहालगढ़ उतार देते हैं। यहां डग्गामार वाहन भी नहीं मिलते। ऐसे में लोगों को ट्रकों में जान जोखिम में डालकर सफर करना पड़ता है।
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बागपत से आखिरी बस सेवा
- मेरठ के लिए शाम सात बजे।
- सोनीपत के लिए शाम छह बजे।
- शामली के लिए रात में आठ बजे।
- दिल्ली के लिए रात को नौ बजे।
- सहारनपुर के लिए कोई निर्धारित समय नहीं।
- दिल्ली से सहारनपुर जाने वाली बसें कई बार बागपत में नहीं रुकती।
आपातकाल में टैक्सी ही सहारा
बागपत के अर्जुन पुरम निवासी नितिन ने बताया कि कभी जरूरी काम से रात में मेरठ या दिल्ली जाना पड़ जाए तो रोडवेज बसें नहीं मिलती हैं। ऐसे में टैक्सी से जाना पड़ता है। इसमें हजारों रुपये खर्च होते हैं। माता कॉलोनी निवासी महताब ने बताया कि रात में टैक्सी दो हजार रुपये से कम में नहीं मिलती है।
बस अड्डा नहीं बनने तक रात में बसों के संचालन का समय बढ़वाने के लिए परिवहन निगम के अधिकारियों से बातचीत की जाएगी। इसका समाधान जरूर निकाला जाएगा, ताकि लोगों को परेशानी न हो। - राजकमल यादव, जिलाधिकारी