{"_id":"57d5bfe14f1c1ba90a3198fb","slug":"if-you-do-not-pay-cane-farmers-raging","type":"story","status":"publish","title_hn":"गन्ना भुगतान न मिलने पर भड़के किसान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
गन्ना भुगतान न मिलने पर भड़के किसान
ब्यूरो/ अमर उजाला, बागपत
Updated Mon, 12 Sep 2016 02:11 AM IST
विज्ञापन
कूड़ी गांव में बकाया भुगतान की मांग को लेकर बैठक करते किसान।
- फोटो : अमर उजाला
छपरौली। क्षेत्र के कूड़ी गांव में किसानों की बैठक हुई। इसमें वक्ताओं ने मिल प्रबंधन पर गुस्सा निकाला और कहा अगर किसानों को बकाया भुगतान समय से नहीं कराया तो वे कलक्ट्रेट पर सामूहिक आत्महत्या करने को मजबूर होंगे।
बैठक मलकपुर शुगर मिल की गन्ना समिति के चेयरमैन धूम सिंह की अध्यक्षता में बैठक हुई। इसमें तय किया यदि दो दिन में बकाया भुगतान न हुआ तो वे कलक्ट्रेट बागपत पर सामूहिक रूप से आत्महत्या करने को मजबूर होंगे। इसमें महिपाल , साधू , श्याम सिंह, ओमप्रकाश, महेंद्र, सुंदर पाल, मांगेराम आदि रहे।
बकाया भुगतान नहीं होने से किसान नाउम्मीद
बागपत। बकाया भुगतान नहीं होने से किसान नाउम्मीद होने लगे हैं। अकेले मलकपुर चीनी मिल पर अन्नदाताओं का 244 करोड़ 67 लाख 54 हजार रुपये बकाया है। किसानों का आरोप है कि भुगतान के लिए शासन ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया है। भुगतान नहीं होने से खेती पर निर्भर किसान परिवारों की कमर टूट गई है। शिक्षा, चिकित्सा से लेकर शादी तक टालने पड़ रहे हैं। चुनावी दौर शुरू होते ही फिर भुगतान मुद्दा बनोने लगा है, लेकिन इससे किसानों बकाया कब मिलेगा इसका जवाब किसी के पास नहीं है। सरकार ने पिछले दिनों मिल की आरसी जारी कर दी। किसान कहते हैं कि हमें सिर्फ भुगतान चाहिए।
विज्ञापन
विज्ञापन
बैठक मलकपुर शुगर मिल की गन्ना समिति के चेयरमैन धूम सिंह की अध्यक्षता में बैठक हुई। इसमें तय किया यदि दो दिन में बकाया भुगतान न हुआ तो वे कलक्ट्रेट बागपत पर सामूहिक रूप से आत्महत्या करने को मजबूर होंगे। इसमें महिपाल , साधू , श्याम सिंह, ओमप्रकाश, महेंद्र, सुंदर पाल, मांगेराम आदि रहे।
विज्ञापन
बकाया भुगतान नहीं होने से किसान नाउम्मीद
बागपत। बकाया भुगतान नहीं होने से किसान नाउम्मीद होने लगे हैं। अकेले मलकपुर चीनी मिल पर अन्नदाताओं का 244 करोड़ 67 लाख 54 हजार रुपये बकाया है। किसानों का आरोप है कि भुगतान के लिए शासन ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया है। भुगतान नहीं होने से खेती पर निर्भर किसान परिवारों की कमर टूट गई है। शिक्षा, चिकित्सा से लेकर शादी तक टालने पड़ रहे हैं। चुनावी दौर शुरू होते ही फिर भुगतान मुद्दा बनोने लगा है, लेकिन इससे किसानों बकाया कब मिलेगा इसका जवाब किसी के पास नहीं है। सरकार ने पिछले दिनों मिल की आरसी जारी कर दी। किसान कहते हैं कि हमें सिर्फ भुगतान चाहिए।
विज्ञापन