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किसी ने मां को खोया तो कोई पिता से जुदा हुआ, बेटे व डाक्टर का फर्ज साथ निभाया
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ॉ.विभाष राजपूत
- फोटो : BAGHPAT
बागपत। ऐसे भी चिकित्सक हैं, जिन्होंने एक साथ दो-दो फर्ज निभाए हैं। अपने परिवार की पीड़ा दूर की तो दूसरों की जिंदगी बचाकर चिकित्सक का फर्ज भी निभाया। कोरोना की जब भी लहर आई तो उन चिकित्सकों ने हमेशा आगे आकर दिखाया कि वह नौकरी से आगे बढ़कर मानवता के आधार पर भी काम करते हैं। ऐसे यहां कोई एक नहीं, बल्कि कई चिकित्सक हैं। जिन्होंने अपने दर्द को अंदर दबाकर सैकड़ों लोगों की जिंदगियां बचाईं। वह अब भी इस तरह ही लोगों की जिंदगी बचाने में लगे हैं।
मां के देहांत के बाद भी नहीं रुके कदम
बागपत सीएचसी के अधीक्षक डॉ. विभाष राजपूत का पूरा परिवार कोरोना की चपेट में आ गया था। कोरोना संक्रमण के कारण इलाज के दौरान उनकी मां कुमकुम देवी का देहांत हो गया। मां के देहांत के बाद वह एक दिन के लिए घर गए और बेटे का फर्ज निभाकर मरीजों की जिंदगी बचाने के लिए वापस लौट आए। परिवार में परेशानी होने के बाद भी उनका लोगों की सेवा का जज्बा कम नहीं हुआ। उन्होंने अपनी मां कुमकुम से लोगों की सेवा करना सीखा। पिता के देहांत के बाद भी मां ने उन्हें पढ़ाया और हमेशा लोगों की सेवा के लिए प्रेरित किया। उन्हीं के आदर्शों और सीख पर वह अपने कर्तव्य का पालन कर रहे हैं।
पिता के निधन के बाद भी कम नहीं हुआ जज्बा
खेकड़ा सीएचसी अधीक्षक रहे डॉ. ताहिर बताते हैं कि कोरोना संक्रमण के दौरान संसाधनों का अभाव था। लोगों को उपचार दिलाने के लिए काफी मेहनत करनी पड़ी। वह अपनी टीम के साथ रात भर जागे। ऑक्सीजन की कमी के कारण भी बड़ी परेशानी हुई, मगर मुश्किल हालात में स्टॉफ और प्रशासन का भरपूर सहयोग मिला। संक्रमण के दौरान पिता का निधन हो गया था। वे पिता को सुपुर्द खाक कराने के बाद फिर अपनी ड्यूटी पर खड़े हो गए। इस तरह चिकित्सक के फर्ज को निभाने के लिए हमेशा आगे खड़े रहते हैं।
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लोगों के उपचार के साथ पर्यावरण बचाने में जुटे डॉ. दिनेश
बड़ौत के डॉ. दिनेश बंसल मरीजों का उपचार करने के साथ पर्यावरण को स्वच्छ करने के लिए जुटे हुए हैं। उनके यहां इलाज कराने के लिए आने वाले लोगों को पौधा देकर उसकी देखरेख की जिम्मेदारी सौंपते हैं। उन्होंने हरित प्राण ट्रस्ट के माध्यम से एंबुलेंस चलाकर पौधों को बचाने की मुहिम चलाई हुई है। डॉक्टरों को अपने पेशे के साथ अन्य माध्यमों से भी सेवा करनी चाहिए। इसके लिए उन्होंने अपने कार्यालय में एक रजिस्टर भी रखा हुआ है। इस रजिस्टर में किस मरीज को कौन सा पौधा कब दिया गया है, उसका रिकार्ड दर्ज है। वह मरीज को पौधा देने के बाद समय-समय पर पौधे के बारे में जानकारी भी लेते हैं।
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मां के देहांत के बाद भी नहीं रुके कदम
बागपत सीएचसी के अधीक्षक डॉ. विभाष राजपूत का पूरा परिवार कोरोना की चपेट में आ गया था। कोरोना संक्रमण के कारण इलाज के दौरान उनकी मां कुमकुम देवी का देहांत हो गया। मां के देहांत के बाद वह एक दिन के लिए घर गए और बेटे का फर्ज निभाकर मरीजों की जिंदगी बचाने के लिए वापस लौट आए। परिवार में परेशानी होने के बाद भी उनका लोगों की सेवा का जज्बा कम नहीं हुआ। उन्होंने अपनी मां कुमकुम से लोगों की सेवा करना सीखा। पिता के देहांत के बाद भी मां ने उन्हें पढ़ाया और हमेशा लोगों की सेवा के लिए प्रेरित किया। उन्हीं के आदर्शों और सीख पर वह अपने कर्तव्य का पालन कर रहे हैं।
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पिता के निधन के बाद भी कम नहीं हुआ जज्बा
खेकड़ा सीएचसी अधीक्षक रहे डॉ. ताहिर बताते हैं कि कोरोना संक्रमण के दौरान संसाधनों का अभाव था। लोगों को उपचार दिलाने के लिए काफी मेहनत करनी पड़ी। वह अपनी टीम के साथ रात भर जागे। ऑक्सीजन की कमी के कारण भी बड़ी परेशानी हुई, मगर मुश्किल हालात में स्टॉफ और प्रशासन का भरपूर सहयोग मिला। संक्रमण के दौरान पिता का निधन हो गया था। वे पिता को सुपुर्द खाक कराने के बाद फिर अपनी ड्यूटी पर खड़े हो गए। इस तरह चिकित्सक के फर्ज को निभाने के लिए हमेशा आगे खड़े रहते हैं।
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लोगों के उपचार के साथ पर्यावरण बचाने में जुटे डॉ. दिनेश
बड़ौत के डॉ. दिनेश बंसल मरीजों का उपचार करने के साथ पर्यावरण को स्वच्छ करने के लिए जुटे हुए हैं। उनके यहां इलाज कराने के लिए आने वाले लोगों को पौधा देकर उसकी देखरेख की जिम्मेदारी सौंपते हैं। उन्होंने हरित प्राण ट्रस्ट के माध्यम से एंबुलेंस चलाकर पौधों को बचाने की मुहिम चलाई हुई है। डॉक्टरों को अपने पेशे के साथ अन्य माध्यमों से भी सेवा करनी चाहिए। इसके लिए उन्होंने अपने कार्यालय में एक रजिस्टर भी रखा हुआ है। इस रजिस्टर में किस मरीज को कौन सा पौधा कब दिया गया है, उसका रिकार्ड दर्ज है। वह मरीज को पौधा देने के बाद समय-समय पर पौधे के बारे में जानकारी भी लेते हैं।

डॉ.ताहिर- फोटो : BAGHPAT

डॉ.दिनेश बंसल- फोटो : BAGHPAT