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मां बाप ने पाला था, बच्चों को अपना समझकर नहीं पता था ...
ब्यूरो/ अमर उजाला, बागपत
Updated Mon, 10 Oct 2016 03:50 PM IST
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खेकड़ा। लोक साहित्य संस्कृति समिति के तत्वावधान में माता पिता को समर्पित काव्य संग्रह माता पिता नामक पुस्तक का विमोचन कर कवियों ने इसकी महत्ता पर प्रकाश डाला।
सात वर्षों से कवि गजेंद्र कौशिक गजानन एवं राजेंद्र प्रकाश गोयल आदि के द्वारा माता पिता को समर्पित पुस्तक का विमोचन होता आ रहा है। रविवार को पुस्तक का विमोचन डा. रामकिशोर मित्र ने किया। अतिथियों ने पुस्तक में संकलित संग्रह की सराहना की। गजल गायक शौकत अली ने कहा कि कह चंद्रलाल शहीदों ने दिन रात उठाया तिरंगा, मरते दम में भी साथ रहा उनके हाथ तिरंगा।
कवि दिनेश रघुवंशी ने कहा कि जिनके हित से अपने मां की लोरिया आती नहीं, उनके सपनों में भी परिया, तितलिया आती नहीं। कवि गजेंद्र गजानन ने कहा कि मां बाप ने पाला था, बच्चों को अपना समझकर नहीं पता था आंगन बीच दीवार अच्छी नहीं होती। इस मौके पर कवि प्रवीन ने कहा कि जिन बच्चों को देखकर खुश होते मां बाप, उन सब बच्चों के मिट जाते सब संताप, कवि प्रदीप मायूस ने कहा कि मुझे कुछ भी नहीं है सूझता, इसके शिवाय यारो, मैं हर मुश्किल में अपनी मां को याद रखता हूं यारो।
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कवि योगेंद्र सुंदियाल ने कहा कि मां जब भी आंगन में आती कटिया, बछिया, भैंस रंभाती, सब के सब वो चुप हो जाते मां के स्पर्श का स्नेह जब पाते। इसकी अध्यक्षता विजयशंकर कौशिक ने की। संचालन शौकत अली ने किया। इस दौरान अनेक कवि एवं श्रोता मौजूद रहे।
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सात वर्षों से कवि गजेंद्र कौशिक गजानन एवं राजेंद्र प्रकाश गोयल आदि के द्वारा माता पिता को समर्पित पुस्तक का विमोचन होता आ रहा है। रविवार को पुस्तक का विमोचन डा. रामकिशोर मित्र ने किया। अतिथियों ने पुस्तक में संकलित संग्रह की सराहना की। गजल गायक शौकत अली ने कहा कि कह चंद्रलाल शहीदों ने दिन रात उठाया तिरंगा, मरते दम में भी साथ रहा उनके हाथ तिरंगा।
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कवि दिनेश रघुवंशी ने कहा कि जिनके हित से अपने मां की लोरिया आती नहीं, उनके सपनों में भी परिया, तितलिया आती नहीं। कवि गजेंद्र गजानन ने कहा कि मां बाप ने पाला था, बच्चों को अपना समझकर नहीं पता था आंगन बीच दीवार अच्छी नहीं होती। इस मौके पर कवि प्रवीन ने कहा कि जिन बच्चों को देखकर खुश होते मां बाप, उन सब बच्चों के मिट जाते सब संताप, कवि प्रदीप मायूस ने कहा कि मुझे कुछ भी नहीं है सूझता, इसके शिवाय यारो, मैं हर मुश्किल में अपनी मां को याद रखता हूं यारो।
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कवि योगेंद्र सुंदियाल ने कहा कि मां जब भी आंगन में आती कटिया, बछिया, भैंस रंभाती, सब के सब वो चुप हो जाते मां के स्पर्श का स्नेह जब पाते। इसकी अध्यक्षता विजयशंकर कौशिक ने की। संचालन शौकत अली ने किया। इस दौरान अनेक कवि एवं श्रोता मौजूद रहे।