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कैसे हो मानवाधिकारों की सुरक्षा, थानों से बोर्ड तक गायब
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बड़ौत कोतवाली में 11 माह में मानवाधिकार उल्लंघन की जा चुकी है 110 शिकायतें
संवाद न्यूज एजेंसी
बड़ौत। आज हम मानवाधिकार दिवस मना रहे हैं। गोष्ठी और बैठकें होंगी, जिनमें मानवाधिकारों पर भाषण दिए जाएंगे। इनका पालन करने के संकल्प लिए जाएंगे। लेकिन जमीनी हकीकत में मानवाधिकारों को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया जाता है। बड़ौत कोतवाली की ही बात करें तो इस साल यहां तकरीबन 110 से अधिक शिकायतें पुलिस के पास आई है, जिनमें लोगों ने मानवाधिकार के उल्लंघन का आरोप लगाया है। हालत कुछ ऐसे है कि थाने और चौकियों से मानवाधिकारों के प्रति जागरूक करने वाले बोर्ड तक गायब है।
कोने में रख दिए जाते है दिशा-निर्देश
मानवाधिकार आयोग की ओर से पुलिस के लिए दिशा-निर्देश जारी किए गए है। हर थाने में बोर्ड भी लगाए गए है। मगर इन बोर्ड को एक कोने में रख दिया जाता है। पुलिस गिरफ्तारी के समय पर वारंट नहीं दिखाती है। अवैध हिरासत के मामले भी सामने आते है।
केस नंबर एक : बावली गांव के फौजी कपिल ने सीएम सहित प्रदेश के डीजीपी को ऑनलाइन व फैक्स कर कोतवाली पर तैनात रहे कुछ पुलिस कर्मियों पर छोटे भाई को ट्रैक्टर चोर गिरोह का सरगना बताकर झूठा मुकदमा दर्ज कराने की शिकायत की है।
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केस नंबर दो : भड़ल गांव में 13 सितंबर को आधा दर्जन लोगों ने रविन्द्र के मकान में घुसकर जानलेवा हमला कर दिया था। हमलावरों के खिलाफ दोघट थाने में मुकदमा भी दर्ज है, लेकिन आज तक पुलिस एक भी हमलावर को नहीं पकड़ पाई। अब पीड़ित परिवार न्याय की गुुहार लगा रहा है और पुलिस पर मानवाधिकार का उल्लंघन करने का आरोप लगा रहा है।
यदि कोई पुलिसकर्मी किसी फरियादी से अभद्रता करेेगा तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। बताया कि अधिकांश थानों में मानवाधिकार से संबंधित निर्देशों के बोर्ड लगे हैं। - हरीश भदौरिया, सीओ।
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संवाद न्यूज एजेंसी
बड़ौत। आज हम मानवाधिकार दिवस मना रहे हैं। गोष्ठी और बैठकें होंगी, जिनमें मानवाधिकारों पर भाषण दिए जाएंगे। इनका पालन करने के संकल्प लिए जाएंगे। लेकिन जमीनी हकीकत में मानवाधिकारों को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया जाता है। बड़ौत कोतवाली की ही बात करें तो इस साल यहां तकरीबन 110 से अधिक शिकायतें पुलिस के पास आई है, जिनमें लोगों ने मानवाधिकार के उल्लंघन का आरोप लगाया है। हालत कुछ ऐसे है कि थाने और चौकियों से मानवाधिकारों के प्रति जागरूक करने वाले बोर्ड तक गायब है।
कोने में रख दिए जाते है दिशा-निर्देश
मानवाधिकार आयोग की ओर से पुलिस के लिए दिशा-निर्देश जारी किए गए है। हर थाने में बोर्ड भी लगाए गए है। मगर इन बोर्ड को एक कोने में रख दिया जाता है। पुलिस गिरफ्तारी के समय पर वारंट नहीं दिखाती है। अवैध हिरासत के मामले भी सामने आते है।
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केस नंबर एक : बावली गांव के फौजी कपिल ने सीएम सहित प्रदेश के डीजीपी को ऑनलाइन व फैक्स कर कोतवाली पर तैनात रहे कुछ पुलिस कर्मियों पर छोटे भाई को ट्रैक्टर चोर गिरोह का सरगना बताकर झूठा मुकदमा दर्ज कराने की शिकायत की है।
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केस नंबर दो : भड़ल गांव में 13 सितंबर को आधा दर्जन लोगों ने रविन्द्र के मकान में घुसकर जानलेवा हमला कर दिया था। हमलावरों के खिलाफ दोघट थाने में मुकदमा भी दर्ज है, लेकिन आज तक पुलिस एक भी हमलावर को नहीं पकड़ पाई। अब पीड़ित परिवार न्याय की गुुहार लगा रहा है और पुलिस पर मानवाधिकार का उल्लंघन करने का आरोप लगा रहा है।
यदि कोई पुलिसकर्मी किसी फरियादी से अभद्रता करेेगा तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। बताया कि अधिकांश थानों में मानवाधिकार से संबंधित निर्देशों के बोर्ड लगे हैं। - हरीश भदौरिया, सीओ।