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कैसे बनें मकान, ईंटों की कीमत छू रही आसमान

Mon, 12 Feb 2018 12:52 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बागपत
ब्यूरो/अमर उजाला, बागपत Updated Mon, 12 Feb 2018 12:52 AM IST
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How to become house, the price of bricks hike
बागपत में मकान बनाने के लिए लाई गई निर्माण सामग्री। - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
अब सपनों का आशियाना बनाना महंगा हो गया है। ईंट की कीमतों में दो हजार रुपये की बढ़ोत्तरी से  आम आदमी के पास निर्माण रोक देने के अलावा कोई विकल्प नहीं रह गया है। रेत के दाम भी आसमान छू रहे हैं। 
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पिछले करीब आठ माह में ही घर निर्माण की चीजों के दामों में बढ़ोत्तरी से लोग परेशान हैं। ईंट भट्ठे के संचालन पर रोक से परेशानी बढ़ी है। अकेले बागपत में करीब 450 ईंट भट्टे हैं, लेकिन एनजीटी की सख्ती के कारण भट्ठे बंद हैं।
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130 भट्ठों को एनओसी मिल चुकी है, लेकिन अभी संचालन शुरू नहीं हो सका है। पिछले दिनों प्रदूषण विभाग और प्रशासन की टीम ने कई जगह छापे मारी की । भट्ठा संचालन के नए नियम परेशानी बने हैं। जिग जैग प्रणाली के बिना अब संचालन नहीं किया जा सकता, यही वजह है कि भट्ठे बंद हैं और ईंटों के दाम बढ़ रहे हैं।
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यहां से ईंटें हरियाणा, दिल्ली, उत्तराखंड तक सप्लाई की जाती है, लेकिन वर्तमान समय में ईंट सप्लाई बंद है। सरिया और रेत के दामों भी बढ़ोतरी हो गई है। ईट भट्ठा संचालक विनोद गोयल कहते हैं कि जिनके पास एनओसी है, उन भट्ठों को संचालन की छूट मिलनी चाहिए।

डस्ट का प्रयोग, रेत भी महंगा
बागपत। मौरंग के दाम में एक साथ बढ़ोत्तरी होने से लोगों का इससे मोहभंग हो गया है। लोग अब इसकी जगह डस्ट का प्रयोग कर रहे हैं। भवन निर्माण में पत्थर भी लगाया जा रहा है। उधर, रेत के दाम भी महंगे हैं। देहात क्षेत्र में रेत करीब एक सौ रुपये प्रति क्विंटल दिया जा रहा है, जबकि पहले इसके दाम सिर्फ तीस रुपये प्रति क्विंटल तक थे।



इस तरह बढ़ी कीमत
सामान      पहले      अब
ईंट प्रति हजार     3000     5000
सीमेंट प्रति बोरा     320     330
रेत प्रति कुंतल    35     80
रोडी प्रति कुंतल   80     90
डस्ट प्रति कुंतल   80     90
सरिया प्रति कुंतल 3200     4000
(नोट: दाम औसतन हैं।)

क्या कहते हैं लोग
बागपत में मकान का निर्माण कर रहे अधिवक्ता अनुज ढाका कहते हैं कि ईंटों समेत अन्य मैटेरियल के दाम बढ़ने से मकान निर्माण का बजट दोगुना हो गया है। बड़ौत निवासी प्रदीप शर्मा और राजेंद्र  शर्मा बताते है कि भवन निर्माण सामग्री के सामान पर जीएसटी की मार है। इससे ईंट, रेत और लोहा महंगा हो गया है। 

 
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