{"_id":"5f53d1768ebc3e36873ecb18","slug":"hindi-makes-knowledgeable-with-knowledge-starting-from-a-to-illiterate-baghpat-news-mrt4997173143","type":"story","status":"publish","title_hn":"‘अ से अनपढ़ से शुरू होकर ज्ञ से ज्ञानी बनाती हैं हिंदी’","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
‘अ से अनपढ़ से शुरू होकर ज्ञ से ज्ञानी बनाती हैं हिंदी’
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हिंदी हैं हम
दिगंबर जैन डिग्री कॉलेज के सेवानिवृत प्रोफेसर डॉ. नारायण स्वरूप शर्मा का मानना
पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी पर भी लिख चुके हैं पुस्तक ‘ज्योति के पदचिह्न’
संवाद न्यूज एजेंसी
बड़ौत (बागपत)। पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी पर पुस्तक लिखकर ख्याति हासिल कर चुके दिगंबर जैन डिग्री कॉलेज के सेवानिवृत प्रोफेसर व साहित्यिक संस्था विमर्श बड़ौत के अध्यक्ष प्रोफेसर डॉ. नारायण स्वरूप शर्मा का कहना है कि हिंदी एक भाषा ही नहीं बल्कि पूरी एक संस्कृति है। भाषा आप को बताती है कि आप के संस्कार क्या है। हिंदी अ अनपढ़ से शुरू होती है और ज्ञ ज्ञानी बनाती हैं। ये बहुत बड़ा अंतर है हिंदी व दूसरी भाषा में। उन्होंने कहा कि हिंदी को बढ़ावा देने के लिए अमर उजाला की मुहिम सकारात्मक पहल है। इसके अच्छे नतीजे सामने आए रहे है।
उन्होंने कहा कि हिंदी भाषा न केवल भारत में बोली जाती है बल्कि मारीशस, फिजी, गुयाना, सूरीनाम, संयुक्त राज्य अमेरिका, दक्षिण अफ्रीका, यमन, युगांडा, सिंगापुर, नेपाल, न्यूजीलैंड और जर्मनी जैसे देशों के एक बडे़ वर्ग में भी प्रचलित है। कहा कि कोरोना काल में हिंदी को सम्मान मिला। लोगों ने हाथ मिलाना छोड़कर एक दूसरे से नमस्कार कहना शुरू किया। इसका मतलब हैं कि हिंदी वैश्विक हो रही है। ये भी हमारी भाषा की एक जीत है कि हम फिर से अपने पुरानी संस्कृति में लौट रहे हैं। हिंदी भारत की भाषा है तो वार्तालाप करने में क्यों निराशा है। भाषा दरअसल संवाद का विषय नहीं है, वो आप की प्रकृति व प्रवृति बताती हैं।
अकादमिक उपलब्धियां
1962 मेें डीएवी कॉलेज मुजफ्फरनगर में अखिल भारतीय छात्र-काव्य प्रतियोगिता में प्रथम स्थान।
1964 में उद्योग प्रदर्शनी, मुजफ्फरनगर में कवि सम्मेलन में संयोजन के साथ काव्य-पाठ पर राष्ट्र कवि श्याम नारायण पांडेय से महती प्रशंसा प्राप्त।
1989 में सलकिया में पंडित रामेश्वर शर्मा पटेल स्मृति व्याख्यान माला में कामायनी पर व्याख्यान के बाद नागरिक अभिनंदन।
2000 में सेवानिवृत्त के बाद जिला एवं सत्र न्यायाधीश बागपत द्वारा हिन्दी सेवाओं के लिए सम्मानित।
2012 में विमर्श बड़ौत द्वारा अमृत महोत्सव में सम्मानित।
2015 में शिक्षक दिवस पर कोलकाता के मंत्री प्रोफेसर श्यामलाल उपाध्याय के संयोजकरण में भारत गौरव सारस्वत सम्मान से सम्मानित।
लिखी गई पुस्तकें
1- अक्षरश:, 2- समवेत, 3- भारतीय वाडमय पीठ, 4- जय वर्धमान वस्तु और शिल्प, 5- ध्रुव स्वामिनी, 6- ज्योति के पदचिह्न, 7- साहित्य समीक्षा के सोपान, 8- अभिज्ञान भारत, 9- सतततर, 10- उर्दू हिंदी कोश, 11- समीक्षा के रंग मानक और मूल्य, 12- पांचवां विमर्श आदि शामिल है।
विज्ञापन
विज्ञापन
दिगंबर जैन डिग्री कॉलेज के सेवानिवृत प्रोफेसर डॉ. नारायण स्वरूप शर्मा का मानना
पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी पर भी लिख चुके हैं पुस्तक ‘ज्योति के पदचिह्न’
संवाद न्यूज एजेंसी
बड़ौत (बागपत)। पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी पर पुस्तक लिखकर ख्याति हासिल कर चुके दिगंबर जैन डिग्री कॉलेज के सेवानिवृत प्रोफेसर व साहित्यिक संस्था विमर्श बड़ौत के अध्यक्ष प्रोफेसर डॉ. नारायण स्वरूप शर्मा का कहना है कि हिंदी एक भाषा ही नहीं बल्कि पूरी एक संस्कृति है। भाषा आप को बताती है कि आप के संस्कार क्या है। हिंदी अ अनपढ़ से शुरू होती है और ज्ञ ज्ञानी बनाती हैं। ये बहुत बड़ा अंतर है हिंदी व दूसरी भाषा में। उन्होंने कहा कि हिंदी को बढ़ावा देने के लिए अमर उजाला की मुहिम सकारात्मक पहल है। इसके अच्छे नतीजे सामने आए रहे है।
उन्होंने कहा कि हिंदी भाषा न केवल भारत में बोली जाती है बल्कि मारीशस, फिजी, गुयाना, सूरीनाम, संयुक्त राज्य अमेरिका, दक्षिण अफ्रीका, यमन, युगांडा, सिंगापुर, नेपाल, न्यूजीलैंड और जर्मनी जैसे देशों के एक बडे़ वर्ग में भी प्रचलित है। कहा कि कोरोना काल में हिंदी को सम्मान मिला। लोगों ने हाथ मिलाना छोड़कर एक दूसरे से नमस्कार कहना शुरू किया। इसका मतलब हैं कि हिंदी वैश्विक हो रही है। ये भी हमारी भाषा की एक जीत है कि हम फिर से अपने पुरानी संस्कृति में लौट रहे हैं। हिंदी भारत की भाषा है तो वार्तालाप करने में क्यों निराशा है। भाषा दरअसल संवाद का विषय नहीं है, वो आप की प्रकृति व प्रवृति बताती हैं।
विज्ञापन
अकादमिक उपलब्धियां
1962 मेें डीएवी कॉलेज मुजफ्फरनगर में अखिल भारतीय छात्र-काव्य प्रतियोगिता में प्रथम स्थान।
1964 में उद्योग प्रदर्शनी, मुजफ्फरनगर में कवि सम्मेलन में संयोजन के साथ काव्य-पाठ पर राष्ट्र कवि श्याम नारायण पांडेय से महती प्रशंसा प्राप्त।
1989 में सलकिया में पंडित रामेश्वर शर्मा पटेल स्मृति व्याख्यान माला में कामायनी पर व्याख्यान के बाद नागरिक अभिनंदन।
2000 में सेवानिवृत्त के बाद जिला एवं सत्र न्यायाधीश बागपत द्वारा हिन्दी सेवाओं के लिए सम्मानित।
2012 में विमर्श बड़ौत द्वारा अमृत महोत्सव में सम्मानित।
2015 में शिक्षक दिवस पर कोलकाता के मंत्री प्रोफेसर श्यामलाल उपाध्याय के संयोजकरण में भारत गौरव सारस्वत सम्मान से सम्मानित।
लिखी गई पुस्तकें
1- अक्षरश:, 2- समवेत, 3- भारतीय वाडमय पीठ, 4- जय वर्धमान वस्तु और शिल्प, 5- ध्रुव स्वामिनी, 6- ज्योति के पदचिह्न, 7- साहित्य समीक्षा के सोपान, 8- अभिज्ञान भारत, 9- सतततर, 10- उर्दू हिंदी कोश, 11- समीक्षा के रंग मानक और मूल्य, 12- पांचवां विमर्श आदि शामिल है।
विज्ञापन