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Baghpat News: धनौरा सिल्वरनगर में लंपी की चपेट में 50 गोवंश
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बिनौली। धनौरा सिल्वरनगर गांव में गोवंश में लंपी बीमारी फैलने से पशुपालक चिंतित हैं। पशुपालकों ने बताया कि 50 गोवंश बीमारी के कारण कमजोर हो रहे हैं और शिकायत के बाद भी चिकित्सक गांव में नहीं आ रहे हैं। उन्होंने अधिकारियों से शिकायत कर उपचार करवाने की मांग की है।
गांव के सतेंद्र राणा के दो, राजू, बिट्टू के एक-एक, सुखपाल के दो और ओमपाल के दो गोवंश सहित करीब 50 गोवंश लंपी से संक्रमित हैं। पशुपालकों का आरोप है कि गांव स्थित पशु चिकित्सालय केंद्र पर सूचना देने के बावजूद अभी तक टीकाकरण अभियान शुरू नहीं किया गया है। इसके चलते उन्हें निजी चिकित्सकों से गोवंश का उपचार और टीकाकरण कराना पड़ रहा है। इससे पशुपालकों में रोष है। वीर सिंह प्रधान, मास्टर सत्यवीर राठी, गौरव राणा, मोनू राणा व अजय आदि ने बताया कि यदि जल्द ही पशु चिकित्सकों ने पहुंचकर उपचार शुरू नहीं किया तो कलक्ट्रेट में धरना दिया जाएगा। वहीं मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. रमेश चंद यादव ने बताया कि जल्द ही पशु चिकित्सकों को भेजकर उपचार करवाया जाएगा।
दूध पीने से नहीं कोई परेशानी
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. रमेशचंद यादव ने बताया कि लंपी बीमारी के दौरान पशु दूध दे रहा है तो उसका दूध पीने से कोई परेशानी नहीं होती है। दूध चारा खाने से बनता है। दूध पीने से लोगाें के स्वास्थ्य पर कोई असर नहीं पड़ता है। यह बीमारी सिर्फ गोवंश की त्वचा को प्रभावित करती है, इसलिए लोगों को बीमारी के दौरान या उसके बाद दूध पीने से डरना नहीं चाहिए।
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गांव के सतेंद्र राणा के दो, राजू, बिट्टू के एक-एक, सुखपाल के दो और ओमपाल के दो गोवंश सहित करीब 50 गोवंश लंपी से संक्रमित हैं। पशुपालकों का आरोप है कि गांव स्थित पशु चिकित्सालय केंद्र पर सूचना देने के बावजूद अभी तक टीकाकरण अभियान शुरू नहीं किया गया है। इसके चलते उन्हें निजी चिकित्सकों से गोवंश का उपचार और टीकाकरण कराना पड़ रहा है। इससे पशुपालकों में रोष है। वीर सिंह प्रधान, मास्टर सत्यवीर राठी, गौरव राणा, मोनू राणा व अजय आदि ने बताया कि यदि जल्द ही पशु चिकित्सकों ने पहुंचकर उपचार शुरू नहीं किया तो कलक्ट्रेट में धरना दिया जाएगा। वहीं मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. रमेश चंद यादव ने बताया कि जल्द ही पशु चिकित्सकों को भेजकर उपचार करवाया जाएगा।
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दूध पीने से नहीं कोई परेशानी
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. रमेशचंद यादव ने बताया कि लंपी बीमारी के दौरान पशु दूध दे रहा है तो उसका दूध पीने से कोई परेशानी नहीं होती है। दूध चारा खाने से बनता है। दूध पीने से लोगाें के स्वास्थ्य पर कोई असर नहीं पड़ता है। यह बीमारी सिर्फ गोवंश की त्वचा को प्रभावित करती है, इसलिए लोगों को बीमारी के दौरान या उसके बाद दूध पीने से डरना नहीं चाहिए।
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