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जाना था गंगा पार, प्रभु केवट की नाव चढे़

Fri, 30 Sep 2022 12:06 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Fri, 30 Sep 2022 12:06 AM IST
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Had to go across the Ganges, the boat of Lord Kevat boarded
तितरौदा में रामलीला का मंचन करते कलाकार। - फोटो : BARAUT
खेकड़ा। क्षेत्र चल रही रामलीला में वन जाते हुए राम केवट से गंगा पार कराने का निवेदन करते हैं। केवट से राम के संवादों का मार्मिक मंचन हुआ। भरत भी वनों में जाकर राम को वापिस अयोध्या चलने को कहते हैं, लेकिन वे राम की खडाऊ लेकर अयोध्या वापस लौट आते हैं।
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गांधी प्याऊ पर श्री धार्मिक रामलीला और मोहल्ला अहिरान श्रीबालाजी रामलीला कमेटी की ओर से रामलीला का मंचन चल रहा है। भगवान राम, लक्ष्मण और सीता को समझाते है कि वे अकेले ही वन जाएंगे। पिता का आदेश उनको ही मिला है, लेकिन वे नही मानते। वन जाते समय विशालकाय गंगा नदी बीच में आती है। केवट राम के चरण धोकर फिर गंगा पार कराता है।
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उधर भरत ननिहाल से वापस लौटते हैं, तो अयोध्या का हाल पता चलता है। वे अपनी मां कैकयी को खरी खोटी सुनाते हैं। राम पिता की आज्ञा की बात कहते हैं, तो भरत राम की खड़ाऊ लेकर वापस लौट आते हैं। इस दौरान श्रीबालाजी रामलीला में अध्यक्ष नितिन जैन, डायरेक्टर राजेश शर्मा, आनंद यादव, दीपक कुमार, नरेंद्र शर्मा, मनोज धामा, मनोज जैन, श्रीधार्मिक रामलीला में डायरेक्टर नरेश शर्मा, अध्यक्ष दीपक शर्मा, पुष्पेंद्र कुमार मौजूद रहे।
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वन गए श्रीराम, पुत्र वियोग में दशरथ ने त्यागे प्राण
बिनौली। तितरौदा गांव की धर्मशाला में अनमोल रामलीला पार्टी के तत्वाधान की ओर से रामलीला मंचन में दशरथ मरण, राम वनवास की लीला का कलाकारों ने मंचन किया। मंचन में राम-सीता और लक्ष्मण का वन को प्रस्थान करने पर राम के वियोग में राजा दशरथ प्राण त्याग देते हैं। श्रीराम को वनवास जाते देखकर भक्तों की आंखों में पानी आ जाता है।

श्री प्रेम मंडल रामलीला कमेटी बिनौली के तत्वाधान में शिव मंदिर प्रांगण में चल रहे रामलीला मंचन में सीता स्वयंवर, लक्ष्मण परशुराम संवाद लीला का मंचन किया। मंचन के दौरान जनकपुर के महाराजा जनक सीता स्वयंवर की घोषणा करते हैं। स्वयंवर में आए सभी राजकुमार भगवान शंकर के धनुष को उठाने का प्रयास करते हैं, लेकिन विफल रहते हैं। तब महर्षि विश्वामित्र राम से कहते हैं कि उठहुं राम भंजहु भव चापा, मेटहु तात जनक परितापा। राम महर्षि की आज्ञा पाकर उठते हैं और शिव धनुष को एक ही पल में उठाकर तोड़ देते हैं। इस दृश्य के मंचन के साथ ही जोरदार पटाखों की आवाज होती है और लोग जय श्री राम के जयघोष लगाते हैं। इसके बाद श्रीराम व सीता का विवाह संपन्न होता है। इसके बाद लक्ष्मण और भगवान परशुराम संवाद होता है।
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