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भड़ल में चर्म शोधन ईकाइयों के कारण दूषित हो गया गांव का पानी
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दोघट। भड़ल गांव में चल रही चर्म शोधन इकाइयों के कारण गांव का भूजल दूषित हो रहा है। गांव की पेयजल टंकी भी कई वर्ष से बंद पड़ी है। जिससे ग्रामीणों को परेशानी उठानी पड़ रही है। ग्रामीणों के बार-बार मांग करने के बाद भी समस्या का समाधान नहीं हो रहा है। ग्रामीणों ने प्रशासन से समस्या का जल्द समाधान कराने की मांग की है।
भड़ल गांव की पांच हजार की आबादी है। गांव में चल रही चर्म शोधन इकाइयां ग्रामीणों की सबसे बड़ी परेशानी हैं। इनसे भूजल दूषित हो जाने से ग्रामीणों को परेशानियों से जूझना पड़ रहा है।
गांव से बाहर करें इकाइयां
ग्रामीण जितेंद्र राणा का कहना है कि चर्म शोधन इकाइयों की वजह से जल प्रदूषण बढ़ रहा है। जिस कारण यहां पर लोग गंभीर बीमारियों से पीड़ित हैं। यदि चर्म शोधन इकाई गांव से बाहर चली जाएं तो यहां का पानी और हवा को दूषित होने से रोका जा सकता है।
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टंकी काफी दिन से बंद
सुखवीर सिंह राणा का कहना है कि चर्म शोधन इकाइयों से निकलने वाले पानी से भूजल दूषित हो गया है। पानी की टंकी भी काफी दिन से बंद है। जिससे ग्रामीणों को पेयजल के लिए परेशानी उठानी पड़ रही है।
दूषित पानी से बदबू
डॉ. विनोद राणा का कहना है कि चर्म शोधन इकाइयों का पानी नाली में बहता रहता है। इससे बदबू फैली रहती है। कई बार प्रशासन को अवगत कराने के बाद भी समस्या का समाधान नहीं हो पाया है।
सुरक्षा का सवाल
सुनील शर्मा का कहना है कि चर्मशोधन इकाइयों को गांव से बाहर किए जाने पर सुरक्षा का सवाल खड़ा होना लाजिमी है। प्रशासन को इन इकाइयों में काम करने वालों की खातिर इस बारे में गंभीरता से सोचना चाहिए।
ग्राम प्रधान मीनाक्षी का कहना है कि चर्म शोधन इकाइयों से निकलने वाले पानी को पाइप लाइन से नहर में डलवाया जा रहा है। अभी समस्या है तो उसका समाधान कराया जाएगा।
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भड़ल गांव की पांच हजार की आबादी है। गांव में चल रही चर्म शोधन इकाइयां ग्रामीणों की सबसे बड़ी परेशानी हैं। इनसे भूजल दूषित हो जाने से ग्रामीणों को परेशानियों से जूझना पड़ रहा है।
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गांव से बाहर करें इकाइयां
ग्रामीण जितेंद्र राणा का कहना है कि चर्म शोधन इकाइयों की वजह से जल प्रदूषण बढ़ रहा है। जिस कारण यहां पर लोग गंभीर बीमारियों से पीड़ित हैं। यदि चर्म शोधन इकाई गांव से बाहर चली जाएं तो यहां का पानी और हवा को दूषित होने से रोका जा सकता है।
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टंकी काफी दिन से बंद
सुखवीर सिंह राणा का कहना है कि चर्म शोधन इकाइयों से निकलने वाले पानी से भूजल दूषित हो गया है। पानी की टंकी भी काफी दिन से बंद है। जिससे ग्रामीणों को पेयजल के लिए परेशानी उठानी पड़ रही है।
दूषित पानी से बदबू
डॉ. विनोद राणा का कहना है कि चर्म शोधन इकाइयों का पानी नाली में बहता रहता है। इससे बदबू फैली रहती है। कई बार प्रशासन को अवगत कराने के बाद भी समस्या का समाधान नहीं हो पाया है।
सुरक्षा का सवाल
सुनील शर्मा का कहना है कि चर्मशोधन इकाइयों को गांव से बाहर किए जाने पर सुरक्षा का सवाल खड़ा होना लाजिमी है। प्रशासन को इन इकाइयों में काम करने वालों की खातिर इस बारे में गंभीरता से सोचना चाहिए।
ग्राम प्रधान मीनाक्षी का कहना है कि चर्म शोधन इकाइयों से निकलने वाले पानी को पाइप लाइन से नहर में डलवाया जा रहा है। अभी समस्या है तो उसका समाधान कराया जाएगा।