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स्वतंत्रता सेनानी इलम सिंह का निधन
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स्वतंत्रता सैनानी चौ. इलम सिंह।
- फोटो : BARAUT
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आजाद हिंद फौज में नेताजी सुभाष चंद के साथ मिलकर लिया था अंग्रेजों से लोहा
102 साल की उम्र में हुआ निधन, गांव मेें शोक की लहर, आज होगी अंत्येष्टि
संवाद न्यूज एजेंसी
बड़ौत (बागपत)। नेताजी सुभाष चंद बोस के नेतृत्व में आजाद हिंद फौज में शामिल होकर अंग्रेजों के छक्के छुड़ाने वाले बावली गांव के स्वतंत्रता सेनानी इलम सिंह (102) का सोमवार की शाम बीमारी के चलते निधन हो गया। इसकी सूचना पर गांव में शोक की लहर दौड़ गई। गणमान्य लोगों ने उसके निधन पर शोक जताया। मंगलवार को गांव में ही उनकी अंत्येष्टि की जाएगी।
बावली गांव निवासी स्वतंत्रता सेनानी इलम सिंह को 1941-42 में आजाद हिंद फौज में तोपखाने में काम पर लगाया गया था। 25 दिनों तक सिंगापुर में भूखे-प्यासे रहकर नेताजी सुभाष चंद के नेतृत्व में उन्होंने लड़ाई लड़ी और अंग्रेजों के छक्के छुड़ाए। 15 अगस्त 1972 को उन्हें दो ताम्रपत्र मिले, जिनमें से एक इंदिरा गांधी और दूसरा उप्र सरकार ने दिया। अविवाहित इलम सिंह ने अपने भतीजे के बेटे अजित सिंह को गोद लिया हुआ था।
वह 102 साल के थे और कई माह से बीमार चल रहे थे। इसी बीमारी के चलते सोमवार की शाम उनका निधन हो गया। इसकी सूचना पर परिवार और गांव में शोक की लहर दौड़ गई। क्षेत्र के गणमान्य लोग उनके आवास पहुंचे और शोक संवेदना व्यक्त की। शोक जताने वालों में भतीजा चरण सिंह, ईश्वर सिंह, ब्रह्म सिंह के अलावा ग्राम प्रधान ओमवीर, वरुण, मनोहर सिंह तोमर आदि शामिल रहे। अजित सिंह ने बताया मंगलवार को गांव में उनकी अंत्येष्टि की जाएगी।
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102 साल की उम्र में हुआ निधन, गांव मेें शोक की लहर, आज होगी अंत्येष्टि
संवाद न्यूज एजेंसी
बड़ौत (बागपत)। नेताजी सुभाष चंद बोस के नेतृत्व में आजाद हिंद फौज में शामिल होकर अंग्रेजों के छक्के छुड़ाने वाले बावली गांव के स्वतंत्रता सेनानी इलम सिंह (102) का सोमवार की शाम बीमारी के चलते निधन हो गया। इसकी सूचना पर गांव में शोक की लहर दौड़ गई। गणमान्य लोगों ने उसके निधन पर शोक जताया। मंगलवार को गांव में ही उनकी अंत्येष्टि की जाएगी।
बावली गांव निवासी स्वतंत्रता सेनानी इलम सिंह को 1941-42 में आजाद हिंद फौज में तोपखाने में काम पर लगाया गया था। 25 दिनों तक सिंगापुर में भूखे-प्यासे रहकर नेताजी सुभाष चंद के नेतृत्व में उन्होंने लड़ाई लड़ी और अंग्रेजों के छक्के छुड़ाए। 15 अगस्त 1972 को उन्हें दो ताम्रपत्र मिले, जिनमें से एक इंदिरा गांधी और दूसरा उप्र सरकार ने दिया। अविवाहित इलम सिंह ने अपने भतीजे के बेटे अजित सिंह को गोद लिया हुआ था।
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वह 102 साल के थे और कई माह से बीमार चल रहे थे। इसी बीमारी के चलते सोमवार की शाम उनका निधन हो गया। इसकी सूचना पर परिवार और गांव में शोक की लहर दौड़ गई। क्षेत्र के गणमान्य लोग उनके आवास पहुंचे और शोक संवेदना व्यक्त की। शोक जताने वालों में भतीजा चरण सिंह, ईश्वर सिंह, ब्रह्म सिंह के अलावा ग्राम प्रधान ओमवीर, वरुण, मनोहर सिंह तोमर आदि शामिल रहे। अजित सिंह ने बताया मंगलवार को गांव में उनकी अंत्येष्टि की जाएगी।
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