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ड्रेस और किताबों के लिए साढ़े चार लाख रुपये की जरूरत, मिले केवल साढ़े नौ हजार
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शिक्षा का अधिकार अधिनियम
- शिक्षा विभाग की ओर से 2020-21 में हुए बच्चों के प्रवेश के लिए की गई थी डिमांड
- एक बच्चे को विभाग की ओर से दिए जाते है ड्रेस और किताबों के पांच हजार रुपये
संवाद न्यूज एजेंसी
बागपत। शिक्षा का अधिकार अधिनियम के अंतर्गत प्राइवेट स्कूलों में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं को ड्रेस और किताबों के लिए पांच-पांच हजार रुपये दिए जाते है। विभाग की ओर से 2022-21 में प्रवेश कराए गए बच्चों की ड्रेस और किताबों के लिए साढ़े चार लाख रुपये की डिमांड भेजी गई थी। मगर, शासन स्तर से केवल साढ़े नौ हजार रुपये का बजट मिला है। बजट के अभाव में बच्चों को ड्रेस और किताबों की धनराशि नहीं मिल पाई है।
शिक्षा के अधिकार अधिनियम के अंतर्गत प्राइवेट स्कूलों में 25 प्रतिशत बच्चों को निशुल्क शिक्षा देने का प्रावधान है। बच्चों का स्कूलों में एडमिशन कराने के लिए साल में तीन बार लॉटरी निकाली जाती है। लॉटरी में नंबर आने पर बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से गरीब बच्चों का स्कूलों में प्रवेश कराया जाता है। इन बच्चों की फीस शासन स्तर से सीधे स्कूलों को भेजी जाती है जबकि जिला स्तर पर बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से बच्चे की ड्रेस और किताबों की धनराशि उसके अभिभावक के खाते में स्थानांतरित की जाती है। एक बच्चे को ड्रेस और किताबों के लिए पांच हजार रुपये दिए जाते है।
बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से वित्त वर्ष 2020-21 में ऐसे बच्चों की ड्रेस और किताबों के लिए साढ़े चार लाख रुपये की डिमांड भेजी गई थी, जबकि शासन स्तर से विभाग को 9460 रुपये भेजे गए है। बजट न मिलने के कारण बच्चों के अभिभावकों के खातों में धनराशि नहीं भेजी जा सकी है।
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फिर से भेजी जाएगी डिमांड
बेसिक शिक्षा अधिकारी राघवेंद्र सिंह ने बताया कि शासन स्तर से केवल 9460 रुपये भेजे गए है। यह धनराशि बच्चों के अभिभावकों के खाते में भेज दी गई है। अब फिर से शासन को बजट के लिए डिमांड भेजी जाएगी।
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- शिक्षा विभाग की ओर से 2020-21 में हुए बच्चों के प्रवेश के लिए की गई थी डिमांड
- एक बच्चे को विभाग की ओर से दिए जाते है ड्रेस और किताबों के पांच हजार रुपये
संवाद न्यूज एजेंसी
बागपत। शिक्षा का अधिकार अधिनियम के अंतर्गत प्राइवेट स्कूलों में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं को ड्रेस और किताबों के लिए पांच-पांच हजार रुपये दिए जाते है। विभाग की ओर से 2022-21 में प्रवेश कराए गए बच्चों की ड्रेस और किताबों के लिए साढ़े चार लाख रुपये की डिमांड भेजी गई थी। मगर, शासन स्तर से केवल साढ़े नौ हजार रुपये का बजट मिला है। बजट के अभाव में बच्चों को ड्रेस और किताबों की धनराशि नहीं मिल पाई है।
शिक्षा के अधिकार अधिनियम के अंतर्गत प्राइवेट स्कूलों में 25 प्रतिशत बच्चों को निशुल्क शिक्षा देने का प्रावधान है। बच्चों का स्कूलों में एडमिशन कराने के लिए साल में तीन बार लॉटरी निकाली जाती है। लॉटरी में नंबर आने पर बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से गरीब बच्चों का स्कूलों में प्रवेश कराया जाता है। इन बच्चों की फीस शासन स्तर से सीधे स्कूलों को भेजी जाती है जबकि जिला स्तर पर बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से बच्चे की ड्रेस और किताबों की धनराशि उसके अभिभावक के खाते में स्थानांतरित की जाती है। एक बच्चे को ड्रेस और किताबों के लिए पांच हजार रुपये दिए जाते है।
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बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से वित्त वर्ष 2020-21 में ऐसे बच्चों की ड्रेस और किताबों के लिए साढ़े चार लाख रुपये की डिमांड भेजी गई थी, जबकि शासन स्तर से विभाग को 9460 रुपये भेजे गए है। बजट न मिलने के कारण बच्चों के अभिभावकों के खातों में धनराशि नहीं भेजी जा सकी है।
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फिर से भेजी जाएगी डिमांड
बेसिक शिक्षा अधिकारी राघवेंद्र सिंह ने बताया कि शासन स्तर से केवल 9460 रुपये भेजे गए है। यह धनराशि बच्चों के अभिभावकों के खाते में भेज दी गई है। अब फिर से शासन को बजट के लिए डिमांड भेजी जाएगी।