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Baghpat News: बनी में रणनीति बनाकर लड़ी अंग्रेजों के खिलाफ जंग

Thu, 15 Aug 2024 12:28 AM IST
मेरठ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बागपत
संवाद न्यूज एजेंसी, बागपत Updated Thu, 15 Aug 2024 12:28 AM IST
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Fought against the British by making strategy in Bani
बड़ौत। अंग्रेजों ने देश की जनता पर कहर बरपा रखा था। हर कोई अंग्रेजी हुकूमत से परेशान था। ऐसे में बावली गांव ने अंग्रेजों के खिलाफ जंग लड़कर व रणनीति बनाकर आजादी के लिए अहम भूमिका निभाई।
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जंग-ए-आजादी में बागपत जनपद का गौरवशाली इतिहास रहा है। यहां के वीर बहादुरों ने अपने प्राणों की आहुतियां देकर अंग्रेजों को देश छोड़ने पर मजबूर किया। आजादी की लड़ाई के वक्त देश की जनता अंग्रेजों की हरकतों से परेशान थी। उस समय बावली गांव मेें 200 बीघे में फैली बनी (जंगल) में अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई की रणनीति बनाई जाती थी। आज भी बावली गांव के ग्रामीण उस किस्से को युवाओं को सुनाते हैं और देश के लिए कुछ कर गुजरने की बात कहते हैं।
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बावली गांव के ग्राम प्रधान गौरव तोमर बताते हैं कि सब अंग्रेजी शासन से निजात चाहते थे। बावली गांव में अंग्रेजों से निपटने के लिए गांव के बाहर गोपी वाली बनी (जंगल), जो करीबन 200 बीघे में फैली हुई थी, उसमें आसपास क्षेत्र के गांवों के लोग रात के समय एकत्रित होते थे और अंग्रेजों से निपटने के लिए योजनाएं बनाते थे। योजना बनते ही अंग्रेजों को कई बार मुंहतोड़ जवाब दिया गया।
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- अंग्रेजों को बाबा शाहमल ने चटाई थी धूल
बिजरौल गांव जहां अमर शहीद बाबा शाहमल का जन्म हुआ, अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई लड़ने और 1857 क्रांति में हिस्सा लेने के कारण अंग्रेजों द्वारा पूरी तरह बर्बाद कर दिया गया। इसको लेकर अंग्रेजी सरकार ने जुल्म की हद पार कर बिजरौल गांव को बागी करार दिया था और यहां के 32 क्रांतिकारियों को गांव के दक्षिणी छोर पर मौजूद बरगद के पेड़ पर फांसी पर लटका दिया गया था।


- पूरे देश मेें भड़क गई थी मेरठ से उठी क्रांति की चिंगारी

अमीनगर सराय। 10 मई 1857 में मेरठ से क्रांति की चिंगारी पूरे देश में भड़क गई थी। बाबा शाहमल के नेतृत्व में बसौद की जामा मस्जिद को मुख्यालय बनाया गया था। अंग्रेजों को क्रांतिकारियों की जानकारी हो गई और 17 जुलाई 1857 को अंग्रेजों ने गांव पर हमला कर दिया। अंग्रेजों ने 180 क्रांतिकारियों को मार दिया था। क्रांतिकारियों के खून से गांव के तालाब का पानी लाल हो गया था। इसके अलावा अंग्रेजों ने 15 क्रांतिकारियों को बरगद के पेड़ पर लटकाकर फांसी दे दी थी और गांव को आग लगा दी थी।
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