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उत्तम संयम का करें पालन, तभी कल्याण संभव
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दस लक्षण पर्व पर बडागांव के त्रिलोक तीर्थ धाम जैन मंदिर में आयोजित विधान में पूजा अर्चना करते श्र
- फोटो : KAHKRA
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खेकड़ा। भगवान महावीर दिगंबर जैन मंदिर में दशलक्षण पर्व के छठे दिन ब्रह्मचारी पवन कुमार जैन के सानिध्य में कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। सर्व प्रथम नित्य नियम सामूहिक पूजन के बाद कल्याण मंदिर विधान में श्रद्धालुओं ने भगवान महावीर की पूजा की।
ब्रह्मचारी पवन जैन ने उत्तम संयम, सुगंध दशमी पर विचार व्यक्त किए। कहा कि संयम जीवन संगीत के साथ ही जीवन का परम आनंद है। परमात्मा के असीम आनंद में लीन होकर जीवन को सुखमय बनाए। तभी मनुष्य का जीवन उत्तम हो सकता है। इसलिए सभी को उत्तम संयम का पालन करना चाहिए। तभी कल्याण संभव है। इस दौरान प्रवीन जैन, शुभम जैन, चुन्नू जैन, रीना जैन, सलोचना जैन, मधु, ऊषा, अंजलि, उर्मिला जैन मौजूद रहे। रात्रि में शास्त्र प्रवचन, प्रश्न मंच एवं तमोला गेम का आयोजन हुआ।
छोटा बाजार स्थित श्रीशांति नाथ प्राचीन दिगंबर जैन बड़ा मंदिर, बड़ागांव के त्रिलोक तीर्थ धाम जैन मंदिर, प्राचीन दिगंबर जैन मंदिर बड़ागांव, श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर मोहल्ला अहिरान, श्री 1008 पार्श्वनाथ धरणेंद्र पदमावती धाम जैन मंदिर में भी धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन हुआ। मंदिर परिसर श्रीजी के जयकारों से गूंज उठे।
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इंद्रियां निगृह करना ही संयम धर्म : महेश शास्त्री
बिनौली। बरनावा के श्री चंद्रप्रभ दिगंबर जैन मंदिर में चल रहे 41 दिवसीय शांतिनाथ विधान और दशलक्षण पर्व के छठे दिन श्रद्धालुओं ने उत्तम संयम धर्म की पूजा कर श्रीफल अर्पित किए। विधान में पंडित महेश चंद शास्त्री कहा कि संयम रूपी नोका में सवार होकर ही मनुष्य संसार रूपी भवसागर को पार कर सकता है। इंद्रियां निगृह करना ही संयम है। पंचेंद्रिय विषयों का त्याग ही संयम है, संयम का अर्थ है जागरूक रहना काम, क्रोध, माया लोभ से आत्मा को बचाना। आपका शरीर वाहन है और मन उसका सारथी, आत्मा मालिक है। अर्थात मालिक के संकेत पर ही वाहन को सारथी गंतव्य स्थान तक पहुंचाता है, संयम की टिकट लेकर आप शिवधाम जा सकते हैं। पूजा में बादामी जैन, लता जैन, नमन जैन, मुकेश जैन, विशांत जैन, मुकेश जैन, सचिन जैन आदि उपस्थित रहे। उधर बिनौली के श्री दिगंबर जैन पुराना मंदिर व बड़ा मंदिर में श्रद्धालुओं ने पूजा अर्चना कर उत्तम संयम धर्म को अंगीकार किया।
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ब्रह्मचारी पवन जैन ने उत्तम संयम, सुगंध दशमी पर विचार व्यक्त किए। कहा कि संयम जीवन संगीत के साथ ही जीवन का परम आनंद है। परमात्मा के असीम आनंद में लीन होकर जीवन को सुखमय बनाए। तभी मनुष्य का जीवन उत्तम हो सकता है। इसलिए सभी को उत्तम संयम का पालन करना चाहिए। तभी कल्याण संभव है। इस दौरान प्रवीन जैन, शुभम जैन, चुन्नू जैन, रीना जैन, सलोचना जैन, मधु, ऊषा, अंजलि, उर्मिला जैन मौजूद रहे। रात्रि में शास्त्र प्रवचन, प्रश्न मंच एवं तमोला गेम का आयोजन हुआ।
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छोटा बाजार स्थित श्रीशांति नाथ प्राचीन दिगंबर जैन बड़ा मंदिर, बड़ागांव के त्रिलोक तीर्थ धाम जैन मंदिर, प्राचीन दिगंबर जैन मंदिर बड़ागांव, श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर मोहल्ला अहिरान, श्री 1008 पार्श्वनाथ धरणेंद्र पदमावती धाम जैन मंदिर में भी धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन हुआ। मंदिर परिसर श्रीजी के जयकारों से गूंज उठे।
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इंद्रियां निगृह करना ही संयम धर्म : महेश शास्त्री
बिनौली। बरनावा के श्री चंद्रप्रभ दिगंबर जैन मंदिर में चल रहे 41 दिवसीय शांतिनाथ विधान और दशलक्षण पर्व के छठे दिन श्रद्धालुओं ने उत्तम संयम धर्म की पूजा कर श्रीफल अर्पित किए। विधान में पंडित महेश चंद शास्त्री कहा कि संयम रूपी नोका में सवार होकर ही मनुष्य संसार रूपी भवसागर को पार कर सकता है। इंद्रियां निगृह करना ही संयम है। पंचेंद्रिय विषयों का त्याग ही संयम है, संयम का अर्थ है जागरूक रहना काम, क्रोध, माया लोभ से आत्मा को बचाना। आपका शरीर वाहन है और मन उसका सारथी, आत्मा मालिक है। अर्थात मालिक के संकेत पर ही वाहन को सारथी गंतव्य स्थान तक पहुंचाता है, संयम की टिकट लेकर आप शिवधाम जा सकते हैं। पूजा में बादामी जैन, लता जैन, नमन जैन, मुकेश जैन, विशांत जैन, मुकेश जैन, सचिन जैन आदि उपस्थित रहे। उधर बिनौली के श्री दिगंबर जैन पुराना मंदिर व बड़ा मंदिर में श्रद्धालुओं ने पूजा अर्चना कर उत्तम संयम धर्म को अंगीकार किया।