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फजलपुर में आर्य समाज का वार्षिकोत्सव शुरू
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फजलपुर सुंदर नगर के आर्य समाज में भजन प्रस्तुत करते भजनोपदेशक
- फोटो : BARAUT
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फजलपुर में आर्य समाज का वार्षिकोत्सव शुरू
बिनौली। फजलपुर सुंदरनगर में शुक्रवार को आर्य समाज के तीन दिवसीय 95वें वार्षिकोत्सव का शुभारंभ हुआ। वैदिक विद्वानों और भजनोपदेशकों ने वेद मार्ग पर चलने का आह्वान किया।
वार्षिकोत्सव में ओमपाल शास्त्री ने वेद मंत्रों के उच्चारण के साथ यज्ञ संपन्न कराया। दोपहर में हुई सभा में विद्वान आचार्य गजराज सिंह वेद वाचस्पति ने कहा कि वेद परमात्मा की वाणी है। वेदानुकूल आचरण से मानव का कल्याण हो सकता है। राजेंद्र आर्य ने यज्ञ को सर्वश्रष्ठ कर्म बताया। उन्होंने कहा कि यज्ञ हमारी प्राचीन संस्कृति एवं परंपरा का प्रतीक है। यज्ञ से पर्यावरण के साथ आत्मिक शुद्धि भी होती है। भजनपोदेशक मोहित शास्त्री, सविता आर्या, महाशय ओमप्रकाश ने समाजसुधार, कुरीति उन्मूलन, देशभक्ति से ओतप्रोत सुमधुर भजन प्रस्तुत किए। स्वामी यज्ञमुनि वानप्रस्थी ने अध्यक्षता की। संचालन मास्टर विनोद आर्य ने किया। इस दौरान ब्रजपाल सिंह शास्त्री, राजवीर सिंह आर्य, प्रमोद कुमार आर्य, सुखबीर कश्यप, डॉ. ईश्वर आर्य, मास्टर विजय सिंह, चंद्रभान, ओमेंद्र, नन्दकुमार, आजाद सिंह, मांगेराम आदि मौजूद रहे।
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बिनौली। फजलपुर सुंदरनगर में शुक्रवार को आर्य समाज के तीन दिवसीय 95वें वार्षिकोत्सव का शुभारंभ हुआ। वैदिक विद्वानों और भजनोपदेशकों ने वेद मार्ग पर चलने का आह्वान किया।
वार्षिकोत्सव में ओमपाल शास्त्री ने वेद मंत्रों के उच्चारण के साथ यज्ञ संपन्न कराया। दोपहर में हुई सभा में विद्वान आचार्य गजराज सिंह वेद वाचस्पति ने कहा कि वेद परमात्मा की वाणी है। वेदानुकूल आचरण से मानव का कल्याण हो सकता है। राजेंद्र आर्य ने यज्ञ को सर्वश्रष्ठ कर्म बताया। उन्होंने कहा कि यज्ञ हमारी प्राचीन संस्कृति एवं परंपरा का प्रतीक है। यज्ञ से पर्यावरण के साथ आत्मिक शुद्धि भी होती है। भजनपोदेशक मोहित शास्त्री, सविता आर्या, महाशय ओमप्रकाश ने समाजसुधार, कुरीति उन्मूलन, देशभक्ति से ओतप्रोत सुमधुर भजन प्रस्तुत किए। स्वामी यज्ञमुनि वानप्रस्थी ने अध्यक्षता की। संचालन मास्टर विनोद आर्य ने किया। इस दौरान ब्रजपाल सिंह शास्त्री, राजवीर सिंह आर्य, प्रमोद कुमार आर्य, सुखबीर कश्यप, डॉ. ईश्वर आर्य, मास्टर विजय सिंह, चंद्रभान, ओमेंद्र, नन्दकुमार, आजाद सिंह, मांगेराम आदि मौजूद रहे।
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