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Baghpat News: गेहूं कटाई को लेकर बागपत और हरियाणा के किसान भिड़े
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छपरौली। टांडा गांव के यमुना खादर में पुलिस लेकर गेहूं की फसल काटने पहुंचे हरियाणा के समालखा के किसानों का स्थानीय किसानों ने विरोध किया। इसके बाद दोनों राज्यों के किसान आपस में भिड़ गए और उनके बीच नोकझोंक हुई और घंटों हंगामा चलता रहा। इस दौरान छपरौली और हरियाणा पुलिस के बीच भी नोकझोंक हुई। बाद में वहां पहुंचे राजस्व विभाग के अधिकारियों ने 28 अप्रैल को बैठक में समस्या का समाधान करने का आश्वासन देकर मामला शांत कराया।
टांडा गांव के किसान आसिफ, चांदमियां, अमजद खान, फाजिल, अमानत आदि ने बताया कि उन्होंने गांव के यमुना खादर में सैकड़ों बीघा जमीन पर गेहूं की फसल बोई थी। आरोप लगाया कि शुक्रवार को हरियाणा के समालखा के किसान अपने साथ पुलिस बल और मशीनें लेकर उनके खेतों में खड़ी सैकड़ों बीघा गेहूं की फसल की काटने के लिए पहुंचे। उन्होंने पुलिस की मौजूदगी में गेहूं की कटाई शुरू कर दी, जिसका टांडा के किसानों ने विरोध किया और वहां हंगामा खड़ा हो गया।
सूचना मिलने पर छपरौली थाना प्रभारी कुलदीप सिंह सिरोही पुलिस बल के साथ पहुंचे। जहां उन्होंने समालखा के किसानों को समझाने का प्रयास किया तो उनके साथ भी नोकझोक होने लगी। इसके बाद रमाला थाना पुलिस भी पहुंची। किसानों के बाद दोनों राज्यों के पुलिसकर्मियों के बीच तीखी नोकझोक होने लगी, जिन्हें किसी तरह शांत कराया गया।
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सूचना मिलने पर एसडीएम बड़ौत अमन चंद वर्मा राजस्व की टीम लेकर यमुना खादर में पहुंचे। जहां बड़ौत एसडीएम और हरियाणा के पानीपत जिले के समालखा के तहसीलदार कैलाश सिंह के बीच वार्ता हुई और 28 अप्रैल को समालखा में समाधान निकालने पर सहमति बनी। इसके बाद किसान शांत होकर वापस लौटे।
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पिछले साल पुलिस की मौजूदगी में काट ले गये थे फसल
टांडा के प्रधान नवाजिश खान ने बताया कि पिछले साल भी हरियाणा के किसान अपने साथ पुलिस लेकर आए और मशीनों से उनकी फसल काटकर ले गये थे। उन्होंने बताया कि उन्होंने विरोध भी किया, लेकिन हरियाणा पुलिस ने लाठियां भांजकर भगा दिया था।
हथियारों के बल पर कई बार काटी फसल
यूपी और हरियाणा के किसानों के बीच चल रहे सीमा विवाद में गेहूं की कटाई का समय तनातनी बढ़ जाती है और बवाल होने की आशंका भी बढ़ जाती है। हर साल गेहूं कटाई के दौरान हरियाणा और यूपी के किसान आमने-सामने आ जाते हैं। जहां कई बार हथियारों के दम पर गेहूं की फसल की कटाई कराई जाती थी तो पहले बवाल भी हो चुके हैं।
टांडा गांव के यमुना खादर में गेहूं की फसल की कटाई को लेकर विवाद हो गया था। जिसे शांत करा दिया गया है। 28 अप्रैल को समालखा में बैठक में विवाद का हल निकाला जाएगा। - अमर चंद वर्मा, एसडीएम बड़ौत।
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टांडा गांव के किसान आसिफ, चांदमियां, अमजद खान, फाजिल, अमानत आदि ने बताया कि उन्होंने गांव के यमुना खादर में सैकड़ों बीघा जमीन पर गेहूं की फसल बोई थी। आरोप लगाया कि शुक्रवार को हरियाणा के समालखा के किसान अपने साथ पुलिस बल और मशीनें लेकर उनके खेतों में खड़ी सैकड़ों बीघा गेहूं की फसल की काटने के लिए पहुंचे। उन्होंने पुलिस की मौजूदगी में गेहूं की कटाई शुरू कर दी, जिसका टांडा के किसानों ने विरोध किया और वहां हंगामा खड़ा हो गया।
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सूचना मिलने पर छपरौली थाना प्रभारी कुलदीप सिंह सिरोही पुलिस बल के साथ पहुंचे। जहां उन्होंने समालखा के किसानों को समझाने का प्रयास किया तो उनके साथ भी नोकझोक होने लगी। इसके बाद रमाला थाना पुलिस भी पहुंची। किसानों के बाद दोनों राज्यों के पुलिसकर्मियों के बीच तीखी नोकझोक होने लगी, जिन्हें किसी तरह शांत कराया गया।
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सूचना मिलने पर एसडीएम बड़ौत अमन चंद वर्मा राजस्व की टीम लेकर यमुना खादर में पहुंचे। जहां बड़ौत एसडीएम और हरियाणा के पानीपत जिले के समालखा के तहसीलदार कैलाश सिंह के बीच वार्ता हुई और 28 अप्रैल को समालखा में समाधान निकालने पर सहमति बनी। इसके बाद किसान शांत होकर वापस लौटे।
पिछले साल पुलिस की मौजूदगी में काट ले गये थे फसल
टांडा के प्रधान नवाजिश खान ने बताया कि पिछले साल भी हरियाणा के किसान अपने साथ पुलिस लेकर आए और मशीनों से उनकी फसल काटकर ले गये थे। उन्होंने बताया कि उन्होंने विरोध भी किया, लेकिन हरियाणा पुलिस ने लाठियां भांजकर भगा दिया था।
हथियारों के बल पर कई बार काटी फसल
यूपी और हरियाणा के किसानों के बीच चल रहे सीमा विवाद में गेहूं की कटाई का समय तनातनी बढ़ जाती है और बवाल होने की आशंका भी बढ़ जाती है। हर साल गेहूं कटाई के दौरान हरियाणा और यूपी के किसान आमने-सामने आ जाते हैं। जहां कई बार हथियारों के दम पर गेहूं की फसल की कटाई कराई जाती थी तो पहले बवाल भी हो चुके हैं।
टांडा गांव के यमुना खादर में गेहूं की फसल की कटाई को लेकर विवाद हो गया था। जिसे शांत करा दिया गया है। 28 अप्रैल को समालखा में बैठक में विवाद का हल निकाला जाएगा। - अमर चंद वर्मा, एसडीएम बड़ौत।