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36 साल चली चकबंदी से टूट गए किसान

Wed, 06 Dec 2017 01:48 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बागपत
ब्यूरो/अमर उजाला, बागपत Updated Wed, 06 Dec 2017 01:48 AM IST
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Farmer who broke down after 36 years of chakbandi
बामनौली में किसान की मौत के बाद गमगीन परिवार की महिलाएं। - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
बामनौली गांव में चकबंदी प्रक्रिया 36 साल तक चली। विवादों के बवंडर उठते रहे। पिछले वर्ष चकबंदी की टीम पहुंचे तो किसान धरने पर बैठ गए। नौ दिन तक धरना चला। इसके बाद किसानों को किसी तरह मनाकर चकबंदी कराई गई, लेकिन इसके बाद भी इस पर सवाल उठते रहे हैं।
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पूर्व प्रधान महिपाल सिंह ने बताया  बामनौली गांव में 1981 से चकबंदी प्रक्रिया शुरू की गई। आरोप लगाया कि किसानों के गलत तरीके से चक बनाए गए थे। इसको लेकर किसान कोर्ट चले गए। इसके बाद फिर 1989 में चक काटे गए, वह भी गलत तरीके से काटे गए थे। इसके बाद 1991 में चक काटे गए और धारा 20 लगा दी। उस समय न्यायालय के आदेश पर विजिलेंस की टीम ने इसकी जांच की तो खामियां पाई गई।
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फिर से चक बनाने के लिए कहा गया था। किसानों का आरोप है कि चकबंदी प्राधिकारियों ने चकबंदी में व्याप्त खामियों को दूर किए बिना ही फिर से चक काट दिए। इसके खिलाफ फिर से किसान कोर्ट चले गए।किसानों ने कहा वर्ष 2016 में चकबंदी अधिकारियों ने फर्जी दस्तावेज न्यायालय में पेश कर चकबंदी कराने के आदेश जारी कराए और कोर्ट के आदेश पर चकबंदी कराई।
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चकबंदी में इतनी खामियां थी कि किसानों ने इसका पुरजोर विरोध भी किया, लेकिन पुलिस प्रशासन न  कोर्ट के आदेश पर यहां चकबंदी करा दी, लेकिन खामियां दूर नहीं की गई। चकबंदी अधिकारियों आनन-फानन में चकबंदी प्रक्रिया पूरी कर चले गए। आधे किसानों को चकों पर कब्जे दिलाए और आधों को नहीं। चकबंदी प्रक्रिया पिछले वर्ष अगस्त में पूरी की गई थी। इसके बावजूद कई बार विवाद उठे। किसानों ने कहा हवाई चक काटे गए हैं। इसके अलावा कई किसानों को अब तक कब्जे नहीं मिले। 

बच्चों के सिर से उठ गया पिता का साया
दोघट। मृतक किसान कृष्णपाल के दो बेटी और दो बेटे हैं। सबसे बड़ी बेटी 15 साल की है और कक्षा 10 में पढ़ रही है। ग्रामीणों का कहना है कि किसान की मौत का जिम्मेदार प्रशासन है।


डीएम को बुलाने की जिद पर अड़े ग्रामीण
दोघट। ग्रामीणों ने कहा डीएम को मौके पर आकर किसानों की पीड़ा सुननी चाहिए। चकबंदी अधिकारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई होनी ही चाहिए। दोघट एसओ चितवन कुमार पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और आश्वासन दिया कि इस मामले में रिपोर्ट दर्ज की जाएगी। इस आश्वासन के बाद शव का अंतिम संस्कार किया।
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