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किसान बोले, मिले चार सौ रुपये प्रति क्विंटल का भाव
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किसान बोले, मिले चार सौ रुपये प्रति क्विंटल का भाव
शुगर इंडस्ट्री के दावों से सहमत नहीं किसान, देरी से चली हैं मिलें
बागपत। नये पेराई सत्र में गन्ना मूल्य निर्धारण की प्रक्रिया शुरू हो गई है। शुगर इंडस्ट्री का तर्क है कि रिकवरी घट गई है, इस कारण गन्ना मूल्य नहीं बढ़ाया जाना चाहिए। किसान संगठनों ने कहा गन्ने की फसल पर पिछले साल के सापेक्ष लागत बढ़ गई है। लागत के हिसाब से ही किसानों को चार सौ रुपये प्रति क्विंटल का भाव दिया जाना चाहिए।
भारतीय किसान संगठन के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अनु मलिक का कहना है कि फसलों पर लागत बढ़ रही है। शुगर इंडस्ट्री के तर्क के कोई मायने नहीं है। पेराई सत्र देर से शुरू हुआ है। पिछले साल रिकॉर्ड रिकवरी रही, शुगर इंडस्ट्री को उसमें मुनाफा भी किसानों को देना चाहिए। इस साल भी रिकवरी बढ़ेगी, गन्ने का भाव बढ़ना चाहिए।
भाकियू जिलाध्यक्ष प्रताप गुर्जर का कहना है कि किसानों को लागत और बचत के हिसाब से गन्ना मूल्य दिया जाना चाहिए। गन्ने में रिकवरी कम नहीं है। पेराई सत्र की शुरूआत ही हुई है। पिछले साल रिकॉर्ड रिकवरी हो चुकी है।
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इनसेट
चीनी परता-26 नवंबर 2019
मिल चीनी प्रतिशत
मलकपुर 10.95
बागपत 9.85
रमाला 9.21
इनसेट
चीनी परता-26 नवंबर 2020
मिल चीनी प्रतिशत
मलकपुर 9.92
बागपत 9.01
रमाला 9.09
इनसेट
देरी से शुरू हुआ पेराई सत्र
बागपत। पिछले साल मलकपुर चीनी मिल ने पेराई सत्र की शुरूआत 24 अक्तूबर से की थी, इस बार पेराई सत्र 12 नवंबर से शुरू किया। रमाला चीनी मिल ने पिछले साल 15 नवंबर से पेराई शुरू की थी, इस बार चार नवंबर से शुरूआत हुई। बागपत चीनी मिल दोनों सत्र में नौ नवंबर से ही शुरू हुई है।
इनसेट
जिले में बढ़ गया गन्ना क्षेत्रफल
बागपत। पिछले पेराई सत्र के सापेक्ष इस बार जिले में गन्ना क्षेत्रफल बढ़ गया। पेराई सत्र 2019-20 में 70122.193 लाख हेक्टेयर में गन्ना था, इस बार क्षेत्रफल 74195.982 पहुंच गया है। यानि 5810 हेक्टेयर गन्ना इस बार अधिक है।
आज बैठक, जल्द घोषित होगा गन्ना मूल्य
बागपत। गन्ना मूल्य निर्धारण के लिए शुक्रवार को मुख्य सचिव आरके तिवारी किसानों, चीनी मिल प्रतिनिधियों और गन्ना शोध संस्थानों के वैज्ञानिकों के साथ बैठक करेंगे। संयुक्त बैठक के बाद गन्ना मूल्य का प्रस्ताव तैयार किया जाएगा।
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शुगर इंडस्ट्री के दावों से सहमत नहीं किसान, देरी से चली हैं मिलें
बागपत। नये पेराई सत्र में गन्ना मूल्य निर्धारण की प्रक्रिया शुरू हो गई है। शुगर इंडस्ट्री का तर्क है कि रिकवरी घट गई है, इस कारण गन्ना मूल्य नहीं बढ़ाया जाना चाहिए। किसान संगठनों ने कहा गन्ने की फसल पर पिछले साल के सापेक्ष लागत बढ़ गई है। लागत के हिसाब से ही किसानों को चार सौ रुपये प्रति क्विंटल का भाव दिया जाना चाहिए।
भारतीय किसान संगठन के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अनु मलिक का कहना है कि फसलों पर लागत बढ़ रही है। शुगर इंडस्ट्री के तर्क के कोई मायने नहीं है। पेराई सत्र देर से शुरू हुआ है। पिछले साल रिकॉर्ड रिकवरी रही, शुगर इंडस्ट्री को उसमें मुनाफा भी किसानों को देना चाहिए। इस साल भी रिकवरी बढ़ेगी, गन्ने का भाव बढ़ना चाहिए।
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भाकियू जिलाध्यक्ष प्रताप गुर्जर का कहना है कि किसानों को लागत और बचत के हिसाब से गन्ना मूल्य दिया जाना चाहिए। गन्ने में रिकवरी कम नहीं है। पेराई सत्र की शुरूआत ही हुई है। पिछले साल रिकॉर्ड रिकवरी हो चुकी है।
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चीनी परता-26 नवंबर 2019
मिल चीनी प्रतिशत
मलकपुर 10.95
बागपत 9.85
रमाला 9.21
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चीनी परता-26 नवंबर 2020
मिल चीनी प्रतिशत
मलकपुर 9.92
बागपत 9.01
रमाला 9.09
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देरी से शुरू हुआ पेराई सत्र
बागपत। पिछले साल मलकपुर चीनी मिल ने पेराई सत्र की शुरूआत 24 अक्तूबर से की थी, इस बार पेराई सत्र 12 नवंबर से शुरू किया। रमाला चीनी मिल ने पिछले साल 15 नवंबर से पेराई शुरू की थी, इस बार चार नवंबर से शुरूआत हुई। बागपत चीनी मिल दोनों सत्र में नौ नवंबर से ही शुरू हुई है।
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जिले में बढ़ गया गन्ना क्षेत्रफल
बागपत। पिछले पेराई सत्र के सापेक्ष इस बार जिले में गन्ना क्षेत्रफल बढ़ गया। पेराई सत्र 2019-20 में 70122.193 लाख हेक्टेयर में गन्ना था, इस बार क्षेत्रफल 74195.982 पहुंच गया है। यानि 5810 हेक्टेयर गन्ना इस बार अधिक है।
आज बैठक, जल्द घोषित होगा गन्ना मूल्य
बागपत। गन्ना मूल्य निर्धारण के लिए शुक्रवार को मुख्य सचिव आरके तिवारी किसानों, चीनी मिल प्रतिनिधियों और गन्ना शोध संस्थानों के वैज्ञानिकों के साथ बैठक करेंगे। संयुक्त बैठक के बाद गन्ना मूल्य का प्रस्ताव तैयार किया जाएगा।