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Baghpat News: 43 साल से चकबंदी के जाल में फंसे किसान
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बागपत। बामनौली और बरनावा के किसान 43 साल से चकबंदी के जाल में फंसे हुए हैं। पिछले 10 साल से तारीख पर तारीख मिल रही है और चकबंदी अभी पूरी होती नहीं दिख रही है। अब यह सवाल उठने लगा है कि आखिर कब तक किसानों का यह दर्द दूर होगा।
इन दोनों गांवों में वर्ष 1982 में चकबंदी शुरू हुई थी। बामनौली में 2338 और बरनावा में 1880 किसानों के चक हैं। चकबंदी जब पूरी होती नहीं दिखी तो इन दोनों गांवों के लोग हाईकोर्ट में पहुंच गए। वहां याचिका दायर करने पर हाईकोर्ट ने बरनावा में 2015-16 और बामनौली में 2016-17 में चकबंदी पूरे करने के आदेश दिए। तब अधिकारियों ने हाईकोर्ट से निर्धारित समय में चकबंदी पूरी करने की बात कही थी।
इसके बावजूद हर दो महीने बाद डीएम की तरफ से हाईकोर्ट में शपथ पत्र दाखिल किया जाता है और चकबंदी पूरी करने के लिए दो महीने का समय मांगा जाता है। इस तरह 10 साल से किसानों को चकबंदी पूरी करने के लिए तारीख पर तारीख मिल रही है और चकबंदी फिर भी पूरी नहीं हो रही।
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चक परिवर्तन के बाद बढ़ गई परेशानी
हाईकोर्ट की सख्ती के बाद इन गांवों में वर्ष 2015-16 में चक परिवर्तन की कार्रवाई कर दी गई, मगर चकबंदी पूरी नहीं हो सकी। चक परिवर्तन से किसानों की परेशानी बढ़ गई। किसी को ज्यादा जमीन मिल गई तो किसी की जमीन कम हो गई। उनको परेशान होकर चकबंदी अधिकारियों की कोर्ट में केस डालना पड़ा, इसलिए सीओ, एसओसी, डीडीसी की कोर्ट में 450 मुकदमे चल रहे हैं। किसानों को इससे समय व आर्थिक रूप से परेशानी झेलनी पड़ रही है।
पुराने गांवों में पूरी नहीं हुई, नए में शुरू हो गई
यहां वर्ष 1982 से बामनौली व बरनावा में चल रही चकबंदी भले ही पूरी नहीं हुई हो, मगर नए गांवों महनवा व बरनावा में शुरू करा दी गई। महनवा गांव में 223 किसान व निरपुड़ा में 741 किसान इस दायरे में आए हैं। इन दोनों जगह चकबंदी के लिए बैठक हो चुकी है तो आगे की कार्रवाई चल रही है।
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हमारे यहां चकबंदी पिछले 43 साल से चल रही है। कभी चक गुम हो जाता है तो उसको तलाश करने के लिए अधिकारियों के चक्कर काटने पड़ते हैं। कभी चकबंदी की कार्रवाई पूरी कराने के लिए चक्कर लगाने पड़ते हैं। मेरा चक गुम कर दिया गया जो 13 साल बाद मिला। चकबंदी पूरी नहीं होने पर परेशानी बढ़ती जा रही है। -दिनेश शर्मा, किसान बरनावा
मेरी 18 बीघा जमीन है, जो किसी दूसरे को दे दी गई। मुझे अपनी जमीन लेने के लिए पांच साल तक कोर्ट में केस लड़ना पड़ा। आदेश मेरे पक्ष में आ गया, मगर जमीन अभी तक मुझे नहीं मिल सकी। अधिकारियों के पास शिकायत करते हुए परेशान हो गए हैं। चकबंदी ने परेशानी को बढ़ाया हुआ है। -अनुज, किसान बामनौली
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चकबंदी का कार्य बामनौली और बरनावा दोनों जगह लगभग पूरा होने वाला है। अब अंतिम स्तर पर कार्य चल रहा है और किसानों की सभी समस्याएं दूर हो जाएंगी। जिन दो गांवों में चकबंदी शुरू हुई है, वहां अभी समय लगेगा। -पंकज वर्मा, एडीएम
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इन दोनों गांवों में वर्ष 1982 में चकबंदी शुरू हुई थी। बामनौली में 2338 और बरनावा में 1880 किसानों के चक हैं। चकबंदी जब पूरी होती नहीं दिखी तो इन दोनों गांवों के लोग हाईकोर्ट में पहुंच गए। वहां याचिका दायर करने पर हाईकोर्ट ने बरनावा में 2015-16 और बामनौली में 2016-17 में चकबंदी पूरे करने के आदेश दिए। तब अधिकारियों ने हाईकोर्ट से निर्धारित समय में चकबंदी पूरी करने की बात कही थी।
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इसके बावजूद हर दो महीने बाद डीएम की तरफ से हाईकोर्ट में शपथ पत्र दाखिल किया जाता है और चकबंदी पूरी करने के लिए दो महीने का समय मांगा जाता है। इस तरह 10 साल से किसानों को चकबंदी पूरी करने के लिए तारीख पर तारीख मिल रही है और चकबंदी फिर भी पूरी नहीं हो रही।
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चक परिवर्तन के बाद बढ़ गई परेशानी
हाईकोर्ट की सख्ती के बाद इन गांवों में वर्ष 2015-16 में चक परिवर्तन की कार्रवाई कर दी गई, मगर चकबंदी पूरी नहीं हो सकी। चक परिवर्तन से किसानों की परेशानी बढ़ गई। किसी को ज्यादा जमीन मिल गई तो किसी की जमीन कम हो गई। उनको परेशान होकर चकबंदी अधिकारियों की कोर्ट में केस डालना पड़ा, इसलिए सीओ, एसओसी, डीडीसी की कोर्ट में 450 मुकदमे चल रहे हैं। किसानों को इससे समय व आर्थिक रूप से परेशानी झेलनी पड़ रही है।
पुराने गांवों में पूरी नहीं हुई, नए में शुरू हो गई
यहां वर्ष 1982 से बामनौली व बरनावा में चल रही चकबंदी भले ही पूरी नहीं हुई हो, मगर नए गांवों महनवा व बरनावा में शुरू करा दी गई। महनवा गांव में 223 किसान व निरपुड़ा में 741 किसान इस दायरे में आए हैं। इन दोनों जगह चकबंदी के लिए बैठक हो चुकी है तो आगे की कार्रवाई चल रही है।
हमारे यहां चकबंदी पिछले 43 साल से चल रही है। कभी चक गुम हो जाता है तो उसको तलाश करने के लिए अधिकारियों के चक्कर काटने पड़ते हैं। कभी चकबंदी की कार्रवाई पूरी कराने के लिए चक्कर लगाने पड़ते हैं। मेरा चक गुम कर दिया गया जो 13 साल बाद मिला। चकबंदी पूरी नहीं होने पर परेशानी बढ़ती जा रही है। -दिनेश शर्मा, किसान बरनावा
मेरी 18 बीघा जमीन है, जो किसी दूसरे को दे दी गई। मुझे अपनी जमीन लेने के लिए पांच साल तक कोर्ट में केस लड़ना पड़ा। आदेश मेरे पक्ष में आ गया, मगर जमीन अभी तक मुझे नहीं मिल सकी। अधिकारियों के पास शिकायत करते हुए परेशान हो गए हैं। चकबंदी ने परेशानी को बढ़ाया हुआ है। -अनुज, किसान बामनौली
चकबंदी का कार्य बामनौली और बरनावा दोनों जगह लगभग पूरा होने वाला है। अब अंतिम स्तर पर कार्य चल रहा है और किसानों की सभी समस्याएं दूर हो जाएंगी। जिन दो गांवों में चकबंदी शुरू हुई है, वहां अभी समय लगेगा। -पंकज वर्मा, एडीएम