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गुफा मंदिर पर मेला आज से, हाईवे पर डायवर्ट होंगे वाहन

Sun, 08 Mar 2020 12:42 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sun, 08 Mar 2020 12:42 AM IST
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Fair on cave temple from today, vehicles will be diverted on highway
बागपत। होली के त्योहार पर सरूरपुर कलां के निकट गुफा मंदिर पर लगने वाले मेले के मद्देनजर हाईवे पर वाहन डायवर्ट किए जाएंगे। बड़ौत और बागपत से वाहनों को अमीनगर सराय से निकाला जाएगा। नैथला से भी वाहन निकाले जाएंगे। मंदिर पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात रहेगा।
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दिल्ली-सहारनपुर हाईवे पर सरूरपुर गांव के गुफा मंदिर पर प्रतिवर्ष होली के त्योहार पर मेले का आयोजन होता है। मंदिर में दूर-दराज से आए श्रद्धालु पूजा अर्चना कर मन्नतें मांगते है। लोगों की धारणा है कि बाबा के दरबार में जो भी मन्नत मांगी जाती है, आसानी से पूरी हो जाती है। मंदिर में बागपत के अलावा, मेरठ, शामली, सहारनपुर, गाजियाबाद, दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान से श्रद्धालु आकर प्रसाद चढ़ाते है। मेले में सुरक्षा व्यवस्था के लिए प्रशासन पुलिस बल तैनात करता है। साथ ही मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं को परेशानी न हो, इसके लिए पर्व के दौरान मार्ग भी डायवर्ट कर दिया जाता है। बड़ौत में औद्योगिक चौकी से अमीनगर सराय और बागपत में राष्ट्रवंदना चौक से अमीनगर सराय होते हुए वाहन निकाले जाएंगे। नैथला से भी वाहन निकाले जाएंगे।
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क्या है मंदिर की कथा
बागपत। मंदिर ट्रस्ट के प्रबंधक सुरेश चंद पालीवाल और सचिव सुखपाल का कहना है कि पहले यहां एक गुफा थी। इस गुफा में बाबा तपस्या करते थे। एक भैंसा बाबा की तपस्या में विघभन डालता था। इस पर बाबा ने भैंसे को चिमटा मारकर पत्थर बना दिया था। बाबा की मृत्यु के बाद यहां उनकी समाधि बना दी गई। मान्यता है कि बाबा के दरबार से आज तक कोई निराश नहीं लौटा। बाबा सबकी मनोकामना पूरी करते हैं। मंदिर के पुजारी पंडित योगेश का कहना है कि कई पीढ़ियों से उनके परिवार के सदस्य मंदिर के पुजारी है। सरूरपुर गांव में बाबा की असीम कृपा है।
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सबकी मुरादें पुरी करते है चकबंदी देवता
बालैनी। बालैनी के चकबंदी देवता भक्तों की मुरादें पूरी करते है। डौलचा गांव के मानसिंह कहते है कि एक युवक वहां से पेड़ काट लाया था, जिससे उसके पूरे शरीर पर फफोले पड़ गए थे। युवक के पिता ने माफी मांगी और देवता के स्थान पर पंडितों को भोजन कराने का प्रण किया, तब उनका बेटा ठीक हुआ। वहां एक बूमी थी। लोगों ने पानी से बूमी का भरने का प्रयास किया, मगर बूमी को भर नही पाए। इसके अलावा भी अन्य दंत कथाएं प्रचलित हैं। त्योहारों पर यहां भी मेले और पूजन का आयोजन होता है।
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